By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर। आस्था और भक्ति की नगरी देवघर में बाबा बैद्यनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था का एक अनोखा उदाहरण सामने आया है। मन्नत पूरी होने के बाद आठ महिला श्रद्धालु दंड देते हुए बाबा के दरबार की ओर प्रस्थान कर चुकी हैं। ये महिलाएं पांच दिनों से कठिन साधना करते हुए अपने गांव से चलकर देवघर पहुंची हैं और अब बाबा के दरबार में पहुंचकर पूजा-अर्चना कर अपनी कृतज्ञता प्रकट करेंगी।

जानकारी के अनुसार पुनासी क्षेत्र के आस्था गांव से आठ महिला श्रद्धालुओं का समूह बाबा बैद्यनाथ के प्रति गहरी आस्था के साथ दंड देते हुए देवघर पहुंचा है। रविवार को ये सभी महिलाएं वर्णवाल धर्मशाला के पास पहुंची, जहां स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया। श्रद्धालु महिलाओं के बाबा के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा और वातावरण पूरी तरह भक्तिमय हो गया।

बताया जा रहा है कि इन महिलाओं ने बाबा बैद्यनाथ से अपनी मनोकामना पूरी होने की प्रार्थना की थी। जब उनकी मुराद पूरी हुई तो उन्होंने बाबा के दरबार तक दंड देते हुए आने का संकल्प लिया। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए सभी महिलाएं पांच दिन पहले अपने गांव से रवाना हुई थीं। कठिन यात्रा और तपस्या के बावजूद उनकी आस्था और उत्साह में कोई कमी नहीं दिखी।
महिला श्रद्धालु मुन्नी देवी ने बताया कि उन्होंने और उनके साथ की अन्य महिलाओं ने बाबा से मन्नत मांगी थी। जब उनकी मनोकामना पूरी हुई तो उन्होंने बाबा के दरबार तक दंड देते हुए आने का प्रण लिया। उन्होंने कहा कि बाबा बैद्यनाथ की कृपा से उनकी मुराद पूरी हुई है, इसलिए वे आभार प्रकट करने के लिए इस कठिन साधना के साथ देवघर पहुंची हैं।

मुन्नी देवी ने बताया कि आस्था गांव से आठ महिला श्रद्धालु एक साथ यात्रा कर रही हैं। पिछले पांच दिनों से वे लगातार दंड देते हुए आगे बढ़ रही हैं। रास्ते में कई जगह स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं ने उनका स्वागत किया और उन्हें विश्राम तथा भोजन की व्यवस्था भी कराई। श्रद्धालुओं ने बाबा के जयकारे लगाकर उनका उत्साह बढ़ाया।
रविवार को सभी महिलाएं देवघर पहुंच गई हैं और फिलहाल वर्णवाल धर्मशाला के पास विश्राम कर रही हैं। बताया गया है कि वे शाम को बाबा बैद्यनाथ मंदिर पहुंचकर विश्राम करेंगी और सोमवार को विधि-विधान के साथ बाबा की पूजा-अर्चना करेंगी।

श्रद्धालुओं के अनुसार दंड देना एक बेहद कठिन साधना मानी जाती है। इसमें श्रद्धालु अपने शरीर को पूरी तरह जमीन पर झुकाकर आगे बढ़ते हैं और इसी तरह लगातार यात्रा करते हुए अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। यह साधना भक्ति, श्रद्धा और विश्वास का प्रतीक मानी जाती है।
देवघर में बाबा बैद्यनाथ के दरबार में देशभर से श्रद्धालु अपनी-अपनी आस्था के अनुसार पूजा-अर्चना करने आते हैं। कोई पैदल चलकर, कोई कांवर यात्रा करके तो कोई दंड देते हुए बाबा के दरबार पहुंचता है। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी लाखों श्रद्धालु इसे पूरी श्रद्धा के साथ निभाते हैं।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इस तरह की भक्ति और तपस्या लोगों के भीतर बाबा के प्रति गहरी आस्था को दर्शाती है। दंड देते हुए यात्रा करना शारीरिक और मानसिक रूप से बेहद कठिन होता है, लेकिन श्रद्धालु इसे बाबा की कृपा पाने और धन्यवाद देने का माध्यम मानते हैं।
महिला श्रद्धालुओं की इस यात्रा ने रास्ते भर लोगों का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। जहां-जहां से ये महिलाएं गुजरीं, वहां लोगों ने उनका स्वागत किया और उनके लिए पानी, भोजन और विश्राम की व्यवस्था की। कई लोगों ने उनके साथ बाबा बैद्यनाथ के जयकारे भी लगाए।

श्रद्धालुओं का कहना है कि बाबा बैद्यनाथ के दरबार में आने वाला कोई भी भक्त खाली हाथ नहीं लौटता। सच्चे मन से मांगी गई हर मुराद बाबा जरूर पूरी करते हैं। यही कारण है कि हर साल बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा के दरबार पहुंचकर अपनी आस्था व्यक्त करते हैं।
सोमवार को सभी महिलाएं बाबा बैद्यनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना कर बाबा का आशीर्वाद लेंगी और अपनी मन्नत पूरी होने पर बाबा के प्रति आभार प्रकट करेंगी। श्रद्धालुओं की इस अनोखी भक्ति ने एक बार फिर देवघर में श्रद्धा और विश्वास की मिसाल पेश की है।

