By: Vikash Kumar (Vicky)
देवघर: झारखंड के देवघर जिले में साइबर अपराध के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने एटीएम फ्रॉड करने वाले एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किया है। नगर थाना क्षेत्र में की गई इस कार्रवाई के दौरान चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो एटीएम कार्ड की अदला-बदली और तकनीकी तरीके से लोगों के खातों से अवैध निकासी करते थे। पुलिस की इस कार्रवाई से इलाके में हड़कंप मच गया है।

पुलिस के अनुसार, यह गिरोह लंबे समय से देवघर और आसपास के क्षेत्रों में सक्रिय था। आरोपी खासतौर पर एटीएम कियोस्क को निशाना बनाते थे, जहां वे भोले-भाले लोगों को मदद के बहाने अपने जाल में फंसाते थे। जैसे ही कोई व्यक्ति एटीएम मशीन पर पैसे निकालने आता था, ये आरोपी उसे भ्रमित कर उसका कार्ड बदल लेते थे और बाद में उस कार्ड का इस्तेमाल कर खाते से पैसे निकाल लेते थे।

शिकायत के बाद खुला मामला
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब एक पीड़ित ने अपने बैंक खाते से लगातार हो रही अवैध निकासी की शिकायत नगर थाना में दर्ज कराई। पीड़ित ने बताया कि उसने एटीएम से पैसे निकालने के दौरान एक अज्ञात व्यक्ति से मदद ली थी, जिसके बाद उसके खाते से पैसे कटने लगे। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू की। तकनीकी टीम की मदद से एटीएम के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए और संदिग्धों की पहचान की गई। इसके बाद गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।

बरामद हुए कई अहम सामान
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से कई अहम सामान बरामद किए हैं, जिनमें अलग-अलग बैंकों के कई एटीएम कार्ड, मोबाइल फोन, सिम कार्ड, एक स्कॉर्पियो वाहन और अन्य तकनीकी उपकरण शामिल हैं। बरामद सामान से यह स्पष्ट होता है कि गिरोह सुनियोजित तरीके से लोगों को अपना शिकार बना रहा था। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि आरोपियों के पास से करीब 30 से अधिक एटीएम कार्ड बरामद किए गए हैं, जो विभिन्न लोगों के हो सकते हैं। इसके अलावा मोबाइल फोन में कई संदिग्ध लेन-देन के प्रमाण भी मिले हैं, जिसकी जांच की जा रही है।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
गिरफ्तार आरोपियों में दिल्लीखुर्द निवासी एक 33 वर्षीय युवक शामिल है। इसके अलावा रजनीकांत उर्फ सिंटू (31 वर्ष), मोहित कुमार (22 वर्ष) और मनीष कुमार (36 वर्ष) को भी पुलिस ने गिरफ्तार किया है। सभी आरोपी आपस में मिलकर गिरोह के रूप में काम करते थे और अलग-अलग क्षेत्रों में जाकर वारदात को अंजाम देते थे।
तकनीकी तरीके से देते थे वारदात को अंजाम
जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी सिर्फ कार्ड बदलने तक ही सीमित नहीं थे, बल्कि एटीएम मशीन के पास खड़े होकर लोगों की गोपनीय जानकारी भी हासिल कर लेते थे। कई बार वे एटीएम मशीन में तकनीकी छेड़छाड़ कर पिन नंबर तक जान लेते थे। इसके बाद वे आसानी से खातों से पैसे निकाल लेते थे। पुलिस का कहना है कि गिरोह के सदस्य बेहद शातिर हैं और हर बार अपनी लोकेशन बदलते रहते थे, ताकि पुलिस की नजर से बच सकें। हालांकि, इस बार पुलिस ने सटीक सूचना और तकनीकी निगरानी के आधार पर इन्हें पकड़ने में सफलता हासिल की।

पुलिस की अपील
देवघर पुलिस ने आम लोगों से अपील की है कि वे एटीएम का उपयोग करते समय पूरी सावधानी बरतें। किसी भी अजनबी व्यक्ति से मदद लेने से बचें और अपना पिन नंबर किसी के साथ साझा न करें। अगर एटीएम में कोई संदिग्ध गतिविधि दिखाई दे, तो तुरंत इसकी सूचना पुलिस को दें। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि साइबर अपराधियों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा और ऐसे गिरोहों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही इस मामले में और भी लोगों की संलिप्तता की जांच की जा रही है।

जांच जारी, और गिरफ्तारी संभव
फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों से पूछताछ कर रही है और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी हुई है। संभावना जताई जा रही है कि इस गिरोह का नेटवर्क अन्य जिलों और राज्यों तक फैला हो सकता है। पुलिस जल्द ही इस मामले में और खुलासे कर सकती है।

