By:vikash kumar (vicky)

भारत में हवाई यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के लिए जल्द ही बड़ी राहत की खबर सामने आ सकती है। केंद्र सरकार ने एयरलाइंस द्वारा वसूले जाने वाले छिपे हुए शुल्कों (Hidden Charges) पर लगाम लगाने की दिशा में ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। खासतौर पर सीट चुनने के नाम पर लिए जाने वाले अतिरिक्त शुल्क (Seat Selection Charges) को खत्म करने पर विचार किया जा रहा है।

सूत्रों के अनुसार, नागरिक उड्डयन मंत्रालय और नियामक एजेंसियां इस दिशा में नई गाइडलाइंस तैयार कर रही हैं, जिनका उद्देश्य यात्रियों को अधिक पारदर्शी और न्यायसंगत सेवाएं उपलब्ध कराना है। यह कदम ऐसे समय में उठाया जा रहा है जब लगातार शिकायतें मिल रही थीं कि एयरलाइंस टिकट के बेस किराए के अलावा कई तरह के अतिरिक्त शुल्क जोड़कर यात्रियों पर आर्थिक बोझ डाल रही हैं।

क्या है पूरा मामला?
वर्तमान में भारत की कई प्रमुख एयरलाइंस टिकट बुकिंग के दौरान सीट चयन के लिए अलग से शुल्क वसूलती हैं। अगर यात्री अपनी पसंद की सीट चुनना चाहता है—जैसे विंडो सीट, आइल सीट या आगे की सीट—तो उसे अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। यह शुल्क कभी-कभी टिकट के मूल किराए का बड़ा हिस्सा बन जाता है।
सरकार का मानना है कि यह एक “अनुचित प्रथा” है, क्योंकि सीट आवंटन एक बुनियादी सेवा का हिस्सा होना चाहिए। इसलिए प्रस्ताव है कि एयरलाइंस सभी यात्रियों को बिना अतिरिक्त शुल्क के सीट उपलब्ध कराएं, खासकर परिवारों और बुजुर्ग यात्रियों के लिए।

यात्रियों के अधिकार होंगे मजबूत
नई नीति के तहत यात्रियों के अधिकारों को भी और अधिक स्पष्ट और मजबूत बनाया जाएगा। इसमें निम्नलिखित पहलुओं पर ध्यान दिया जा रहा है:
– टिकट बुकिंग के समय सभी शुल्कों की पूरी जानकारी पहले से देना अनिवार्य होगा
– अंतिम भुगतान के समय कोई छिपा हुआ चार्ज नहीं जोड़ा जा सकेगा
– फ्लाइट कैंसिलेशन और देरी की स्थिति में मुआवजे के नियम स्पष्ट किए जाएंगे
– बुजुर्गों, दिव्यांगों और बच्चों के साथ यात्रा करने वालों के लिए विशेष सुविधाएं सुनिश्चित की जाएंगी

सरकार चाहती है कि एयरलाइंस “ट्रांसपेरेंसी” (पारदर्शिता) को प्राथमिकता दें, ताकि यात्रियों को टिकट की वास्तविक कीमत का सही अंदाजा पहले ही लग सके।
एयरलाइंस पर क्या होगा असर?
अगर यह प्रस्ताव लागू होता है, तो एयरलाइंस की कमाई के एक बड़े स्रोत पर असर पड़ सकता है। सीट चयन शुल्क, अतिरिक्त बैगेज फीस और अन्य सेवाओं से एयरलाइंस को अच्छी खासी आमदनी होती है। ऐसे में संभव है कि एयरलाइंस टिकट के बेस किराए में थोड़ा बदलाव करें।

हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि इससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कंपनियां बेहतर सेवाएं देने के लिए प्रेरित होंगी। इससे लंबे समय में यात्रियों को ही फायदा होगा।
यात्रियों की क्या है प्रतिक्रिया?
यात्रियों ने इस प्रस्ताव का स्वागत किया है। कई लोगों का कहना है कि टिकट बुक करते समय बार-बार अतिरिक्त शुल्क जोड़ने से कुल खर्च बढ़ जाता है और यह पारदर्शी नहीं होता।
एक यात्री ने कहा, “हम टिकट खरीदते समय जो कीमत देखते हैं, अंत में वह उससे कहीं ज्यादा हो जाती है। अगर सरकार यह नियम लागू करती है, तो यह हमारे लिए बहुत राहत की बात होगी।”

कब तक लागू हो सकते हैं नए नियम?
सरकार द्वारा तैयार की जा रही नई गाइडलाइंस को जल्द ही अंतिम रूप दिया जा सकता है। इसके बाद इन्हें लागू करने के लिए एयरलाइंस को निश्चित समयसीमा दी जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार चलता है, तो आने वाले कुछ महीनों में ही यात्रियों को इसका फायदा मिलना शुरू हो सकता है।
हवाई यात्रा को अधिक किफायती और पारदर्शी बनाने की दिशा में सरकार का यह कदम काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। यदि सीट चयन शुल्क खत्म होता है और छिपे हुए चार्ज पर रोक लगती है, तो इससे न केवल यात्रियों का भरोसा बढ़ेगा बल्कि पूरे एविएशन सेक्टर में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकता है।
