By: Vikash , Mala Mandal
देवघर। झारखंड के देवघर में सामाजिक सेवा का एक प्रेरणादायक उदाहरण सामने आया है, जहां श्रील फाउंडेशन द्वारा संचालित “भोजन सेवा केंद्र” ने अपने सफलतापूर्वक 6 वर्ष पूरे कर लिए हैं। कोरोना महामारी के कठिन दौर में 2 अप्रैल 2020 को शुरू हुई यह पहल आज लाखों लोगों के लिए सहारा बन चुकी है। संस्था ने इन 6 वर्षों में 6 लाख से अधिक गरीब, असहाय और जरूरतमंद लोगों को भोजन उपलब्ध कराकर मानव सेवा की एक मिसाल कायम की है।

कोरोना काल में जब पूरे देश में लॉकडाउन लगा था और हजारों लोग भोजन और रोजगार के संकट से जूझ रहे थे, उस समय श्रील फाउंडेशन ने जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाने का संकल्प लिया। उस दौर में शुरू हुई यह सेवा आज भी उसी समर्पण और निरंतरता के साथ जारी है। यह पहल न केवल भूख मिटाने का कार्य कर रही है, बल्कि समाज में सहयोग और संवेदनशीलता का संदेश भी दे रही है।

वर्तमान में यह भोजन सेवा देवघर सदर अस्पताल परिसर में संचालित की जा रही है, जहां प्रतिदिन 300 से अधिक लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जाता है। इनमें मरीजों के परिजन, दूर-दराज से इलाज कराने आए लोग और अन्य जरूरतमंद व्यक्ति शामिल होते हैं। खास बात यह है कि यह भोजन मात्र 10 रुपये में उपलब्ध कराया जाता है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर लोग भी सम्मानपूर्वक भोजन प्राप्त कर सकें।

यह सेवा दिन में दो बार संचालित होती है, ताकि कोई भी व्यक्ति भूखा न रहे। दोपहर और शाम के समय जरूरतमंदों को ताजा, संतुलित और पौष्टिक भोजन दिया जाता है। भोजन की गुणवत्ता और विविधता पर विशेष ध्यान दिया जाता है। मेन्यू में भात-दाल, रोटी-सब्जी, खिचड़ी-चोखा, पूड़ी-सब्जी, मिठाई, पापड़, घी, नमक, मिर्च और अचार जैसी चीजें शामिल होती हैं, जिससे लोगों को घर जैसा स्वाद और संतुष्टि मिलती है।

श्रील फाउंडेशन के सचिव राकेश वर्मा ने बताया कि, “कोरोना काल में शुरू हुई यह सेवा आज 6 वर्षों का लंबा सफर तय कर चुकी है। हमारी कोशिश सिर्फ भोजन उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि जरूरतमंदों को सम्मान के साथ सेवा देना है। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि सदर अस्पताल में कोई भी गरीब या असहाय व्यक्ति भूखा न रहे।”
उन्होंने आगे कहा कि संस्था भविष्य में इस सेवा को और विस्तारित करने की योजना बना रही है, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक इसका लाभ पहुंचाया जा सके। इसके लिए समाज के सहयोग की भी जरूरत है।

संयुक्त सचिव महिमा देवी ने बताया कि इस सेवा को सफल बनाने में समाज के दानवीरों, समाजसेवियों और स्थानीय नागरिकों का विशेष योगदान रहा है। उन्होंने कहा कि “लोगों के सहयोग और समर्थन के कारण ही यह सेवा निरंतर चल रही है। हर दिन सैकड़ों लोगों तक भोजन पहुंचाना आसान नहीं है, लेकिन समाज के सहयोग से यह संभव हो पाया है।”
इस पुनीत कार्य को संचालित करने के लिए संस्था में कुल पांच सेवा कर्मी कार्यरत हैं, जो दिन-रात मेहनत कर इस सेवा को सफल बना रहे हैं। ये कर्मी भोजन तैयार करने से लेकर वितरण तक हर कार्य को पूरी जिम्मेदारी के साथ निभाते हैं।

श्रील फाउंडेशन की यह पहल सिर्फ भोजन वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में मानवता, सहयोग और संवेदनशीलता की भावना को भी मजबूत करती है। यह सेवा उन लोगों के लिए उम्मीद की किरण है, जो आर्थिक तंगी के कारण दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
आज के समय में, जब समाज में स्वार्थ और प्रतिस्पर्धा का माहौल बढ़ता जा रहा है, ऐसे में श्रील फाउंडेशन जैसे संगठनों की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। यह संस्था न केवल लोगों की भूख मिटा रही है, बल्कि उन्हें यह एहसास भी करा रही है कि समाज में अभी भी मानवता जिंदा है।

अंत में, श्रील फाउंडेशन ने समाज के सभी सक्षम और जागरूक नागरिकों से अपील की है कि वे इस पुनीत कार्य में आगे आएं और सहयोग करें। संस्था का कहना है कि किसी भी प्रकार का छोटा सा योगदान—चाहे वह आर्थिक हो या सामग्री के रूप में—किसी जरूरतमंद व्यक्ति के लिए जीवन का सहारा बन सकता है।
इस प्रकार, श्रील फाउंडेशन का “भोजन सेवा केंद्र” न केवल एक सेवा परियोजना है, बल्कि यह समाज के लिए एक प्रेरणा है, जो यह सिखाता है कि अगर इरादा मजबूत हो तो छोटी-सी पहल भी लाखों लोगों की जिंदगी में बदलाव ला सकती है।
