By: Vikash Kumar (Vicky)

देवघर। झारखंड:
देवघर सदर अस्पताल से एक बेहद चिंताजनक और गंभीर मामला सामने आया है, जहां अस्पताल में कार्यरत सफाई कर्मियों और जनरेटर ऑपरेटरों को पिछले तीन महीनों से वेतन नहीं मिला है। वेतन भुगतान में इस देरी ने न केवल कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को कमजोर किया है, बल्कि उनके परिवारों के सामने भी गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, सदर अस्पताल में कार्यरत ये सभी सफाई कर्मी और जनरेटर ऑपरेटर एक निजी एजेंसी “समानता” के माध्यम से नियुक्त किए गए हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि वे नियमित रूप से अपनी ड्यूटी का निर्वहन कर रहे हैं, बावजूद इसके उन्हें तीन महीने से वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। इस स्थिति ने कर्मचारियों के बीच भारी नाराजगी पैदा कर दी है।

नियमित काम के बावजूद नहीं मिल रहा मेहनताना
सफाई कर्मियों का कहना है कि वे अस्पताल परिसर की साफ-सफाई, वार्डों की देखभाल और अन्य आवश्यक सेवाएं पूरी जिम्मेदारी से निभा रहे हैं। इसके बावजूद उन्हें समय पर वेतन नहीं मिल रहा है, जो उनके लिए बेहद निराशाजनक है।
एक कर्मी ने बताया,
“हम लोग पिछले तीन महीनों से लगातार काम कर रहे हैं, लेकिन अब तक हमें एक भी महीने का वेतन नहीं मिला है। कई बार एजेंसी और संबंधित अधिकारियों से बात की, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन ही मिला।”

आर्थिक संकट गहराया, परिवार पर पड़ा असर
वेतन नहीं मिलने के कारण इन कर्मचारियों के सामने रोजमर्रा की जरूरतें पूरी करना भी मुश्किल हो गया है। कई कर्मियों ने बताया कि घर का खर्च चलाना, बच्चों की पढ़ाई, किराया और दवा जैसे जरूरी खर्चों को पूरा करना अब बेहद कठिन हो गया है।
एक अन्य कर्मचारी ने कहा,
“घर चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की फीस भरने में परेशानी हो रही है। राशन तक खरीदने के लिए पैसे नहीं हैं। हम लोग मानसिक तनाव में जी रहे हैं।”

अस्पताल व्यवस्था पर भी पड़ सकता है असर
सफाई कर्मियों की यह स्थिति अस्पताल की व्यवस्था पर भी असर डाल सकती है। यदि समय रहते इस समस्या का समाधान नहीं किया गया, तो अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था प्रभावित हो सकती है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सफाई कर्मियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। ऐसे में उनका मनोबल गिरना और असंतोष बढ़ना स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है।
एजेंसी की चुप्पी बनी हुई है सवाल
इस पूरे मामले में संबंधित निजी एजेंसी “समानता” की ओर से अब तक कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। कर्मचारियों का कहना है कि वे कई बार एजेंसी के अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन उन्हें कोई ठोस जवाब नहीं मिला।
एजेंसी की इस चुप्पी ने कर्मचारियों के बीच असमंजस और असंतोष को और बढ़ा दिया है।

प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग
कर्मचारियों ने जिला प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन से इस मामले में जल्द हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द ही वेतन का भुगतान नहीं किया गया, तो वे आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
कर्मचारियों का यह भी कहना है कि वे अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाते रहेंगे और जरूरत पड़ने पर धरना-प्रदर्शन भी करेंगे।

समाधान की आवश्यकता
यह मामला न केवल श्रमिक अधिकारों से जुड़ा है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता से भी सीधे तौर पर संबंधित है। ऐसे में जरूरी है कि संबंधित एजेंसी और प्रशासन इस मुद्दे को गंभीरता से लें और जल्द से जल्द समाधान निकालें।
यदि समय रहते कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया, तो इसका असर पूरे अस्पताल की कार्यप्रणाली पर पड़ सकता है।

