By: Vikash kumar (Vicky)

मां बगलामुखी जयंती का पर्व शक्ति उपासना करने वाले साधकों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। साल 2026 में यह पावन दिन एक विशेष शुभ संयोग में पड़ रहा है, जिससे इसकी आध्यात्मिक शक्ति और भी बढ़ जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन विधि-विधान से मां बगलामुखी की पूजा और उनके मंत्र का जाप करने से जीवन की बड़ी से बड़ी बाधाएं दूर हो सकती हैं और शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।
2026 में कब मनाई जाएगी बगलामुखी जयंती
साल 2026 में मां बगलामुखी जयंती 24 अप्रैल, शुक्रवार को मनाई जाएगी। इस दिन अष्टमी तिथि का आरंभ सुबह 7 बजकर 18 मिनट पर होगा और इसका समापन 25 अप्रैल सुबह 5 बजकर 51 मिनट पर होगा। शुक्रवार का दिन माता लक्ष्मी और देवी शक्ति की उपासना के लिए विशेष शुभ माना जाता है, ऐसे में इस दिन बगलामुखी जयंती का पड़ना अत्यंत फलदायी योग बना रहा है।

मां बगलामुखी का धार्मिक महत्व
मां बगलामुखी को दस महाविद्याओं में स्तंभन शक्ति की देवी के रूप में जाना जाता है। उनकी कृपा से शत्रुओं की शक्ति को निष्क्रिय किया जा सकता है और विरोधियों की वाणी पर नियंत्रण पाया जा सकता है। ज्योतिष और तंत्र साधना में उनका विशेष स्थान है। कोर्ट-कचहरी के मामलों, विवादों, नकारात्मक ऊर्जा और शत्रु बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए उनकी पूजा अत्यंत प्रभावशाली मानी जाती है।

चमत्कारी मंत्र से बदल सकता है जीवन
मां बगलामुखी की आराधना में मंत्र जाप का अत्यधिक महत्व है। मान्यता है कि सच्चे मन और श्रद्धा के साथ किया गया मंत्र जाप साधक के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाता है। उनका प्रमुख मंत्र है
“ॐ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्वां कीलय बुद्धिं विनाशय ह्रीं ॐ स्वाहा”
इस मंत्र का नियमित जाप करने से शत्रुओं की नकारात्मक शक्ति समाप्त होती है और व्यक्ति को आत्मबल और सफलता प्राप्त होती है।

मंत्र जाप की सही विधि
मां बगलामुखी के मंत्र का जाप हल्दी की माला से करना सबसे श्रेष्ठ माना जाता है। हल्दी का संबंध पीले रंग से होता है, जो इस देवी को अत्यंत प्रिय है। साधक को शांत मन से एक निश्चित संख्या में मंत्र का जाप करना चाहिए। विशेष रूप से बगलामुखी जयंती के दिन किया गया जाप कई गुना फलदायी माना जाता है।
पूजन विधि और जरूरी नियम
मां बगलामुखी की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व होता है, इसलिए उन्हें पीतांबरा देवी भी कहा जाता है। इस दिन सुबह स्नान करके स्वच्छ पीले वस्त्र धारण करें और पीले आसन पर बैठकर पूजा करें। पूजा स्थान को गंगाजल से शुद्ध करें और मां की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें। इसके बाद पीले फूल, हल्दी, पीला चंदन, फल और बेसन के लड्डू का भोग लगाएं। घी या सरसों के तेल का दीपक जलाकर श्रद्धा से ध्यान करें और मंत्र जाप अवश्य करें। व्रत रखने से भी विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।

किसे करना चाहिए यह विशेष साधना
जिन लोगों के जीवन में बार-बार बाधाएं आ रही हैं, शत्रु परेशान कर रहे हैं या कोर्ट-कचहरी के मामले चल रहे हैं, उनके लिए मां बगलामुखी की उपासना अत्यंत लाभकारी मानी जाती है। इसके अलावा जो लोग अपनी वाणी पर नियंत्रण पाना चाहते हैं या मानसिक शांति चाहते हैं, उन्हें भी इस साधना से लाभ मिल सकता है।

बगलामुखी जयंती 2026 का यह शुभ संयोग साधकों के लिए विशेष अवसर लेकर आया है। इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से की गई पूजा और मंत्र जाप न केवल शत्रु बाधाओं को दूर कर सकता है, बल्कि जीवन में सफलता और आत्मविश्वास भी बढ़ा सकता है।

इसलिए इस दिन को व्यर्थ न जाने दें और मां बगलामुखी की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करें।

यह लेख धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय विश्वासों पर आधारित है। किसी भी प्रकार की साधना या उपाय करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ या जानकार से सलाह लेना उचित है।
