By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
सीबीएसई 12वीं कक्षा की परीक्षा 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो गई थी। परीक्षा खत्म होने के बाद छात्रों को उम्मीद थी कि इस बार परिणाम बेहतर आएंगे, लेकिन मई में जारी हुए रिजल्ट ने हजारों छात्रों की उम्मीदों को झटका दे दिया। कई छात्रों और अभिभावकों का कहना है कि उन्हें उम्मीद से काफी कम अंक मिले हैं, जबकि परीक्षा अच्छी गई थी। अब सोशल मीडिया से लेकर स्कूलों तक, मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठने लगे हैं।

परिणाम जारी होने के बाद बड़ी संख्या में छात्र मानसिक तनाव का सामना कर रहे हैं। कई छात्र ऐसे हैं जिन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं, कॉलेज एडमिशन और स्कॉलरशिप के लिए अच्छे अंकों की आवश्यकता थी। लेकिन उम्मीद से कम अंक मिलने के कारण उनका भविष्य प्रभावित होता नजर आ रहा है।
छात्रों ने मूल्यांकन प्रक्रिया पर उठाए सवाल
कई छात्रों का कहना है कि इस बार कॉपियों की जांच में पारंपरिक प्रणाली की जगह डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया अपनाई गई, जिसके कारण अंक देने में गड़बड़ी हुई है। छात्रों का आरोप है कि उनके उत्तरों का सही तरीके से मूल्यांकन नहीं किया गया। कुछ छात्रों ने दावा किया कि जिन विषयों में उन्हें हमेशा अच्छे अंक मिलते थे, उन्हीं विषयों में इस बार बेहद कम नंबर दिए गए हैं।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी छात्र लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। ट्विटर, इंस्टाग्राम और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर #CBSEResult2026 और #RecheckCBSECopies जैसे हैशटैग ट्रेंड कर रहे हैं। छात्र बोर्ड से पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे हैं।

अभिभावकों की बढ़ी चिंता
केवल छात्र ही नहीं, बल्कि अभिभावक भी इस पूरे मामले को लेकर चिंतित हैं। उनका कहना है कि बच्चों ने पूरे साल मेहनत की, लेकिन परिणाम उम्मीद के अनुसार नहीं आए। कई अभिभावकों ने बोर्ड से उत्तर पुस्तिकाओं की दोबारा जांच कराने की मांग की है। कुछ अभिभावकों का आरोप है कि मूल्यांकन प्रक्रिया में जल्दबाजी की गई। उनका कहना है कि इतने बड़े स्तर पर परीक्षा परिणाम तैयार करने में अगर तकनीकी खामियां हुई हैं, तो इसका खामियाजा छात्रों को नहीं भुगतना चाहिए।

कॉलेज एडमिशन पर पड़ सकता है असर
12वीं बोर्ड परीक्षा के अंक छात्रों के भविष्य के लिए बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। देश के कई प्रतिष्ठित कॉलेज और विश्वविद्यालय एडमिशन के लिए बोर्ड अंकों को प्राथमिकता देते हैं। ऐसे में कम अंक आने से हजारों छात्रों के एडमिशन पर असर पड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि छात्रों को लगता है कि उनके अंक गलत आए हैं, तो उन्हें री-इवैल्यूएशन और री-चेकिंग का विकल्प जरूर अपनाना चाहिए। इससे कई मामलों में छात्रों के अंक बढ़ भी जाते हैं।

बोर्ड की ओर से क्या कहा गया?
सीबीएसई की ओर से फिलहाल आधिकारिक तौर पर कहा गया है कि मूल्यांकन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निर्धारित नियमों के अनुसार की गई है। बोर्ड का कहना है कि यदि किसी छात्र को अपने अंकों को लेकर संदेह है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत उत्तर पुस्तिका की जांच के लिए आवेदन कर सकता है। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया कि डिजिटल मूल्यांकन प्रक्रिया का उद्देश्य परिणामों को अधिक सटीक और तेज बनाना था। हालांकि छात्रों के विरोध के बाद अब इस मुद्दे पर बहस तेज हो गई है।

मानसिक तनाव से गुजर रहे छात्र
रिजल्ट के बाद कई छात्र मानसिक दबाव महसूस कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि परीक्षा परिणाम जीवन का अंतिम सत्य नहीं होता। छात्रों को निराश होने की बजाय आगे की तैयारी पर ध्यान देना चाहिए। परिवार और शिक्षकों को भी इस समय बच्चों का मनोबल बढ़ाने की जरूरत है। करियर काउंसलर्स का कहना है कि कम अंक आने के बावजूद छात्रों के पास कई विकल्प मौजूद होते हैं। जरूरी यह है कि छात्र आत्मविश्वास बनाए रखें और सही दिशा में आगे बढ़ें।

री-चेकिंग के लिए बढ़ रहे आवेदन
रिजल्ट जारी होने के बाद बड़ी संख्या में छात्र री-चेकिंग और री-इवैल्यूएशन के लिए आवेदन कर रहे हैं। बोर्ड की वेबसाइट पर लगातार ट्रैफिक बढ़ने की खबरें भी सामने आई हैं। कई स्कूलों ने छात्रों को प्रक्रिया समझाने के लिए विशेष हेल्प डेस्क भी शुरू किए हैं।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि किसी छात्र को अपने प्रदर्शन पर भरोसा है, तो उसे दोबारा जांच के लिए आवेदन करने में हिचकिचाना नहीं चाहिए। कई बार तकनीकी या मानवीय त्रुटियों के कारण अंक प्रभावित हो सकते हैं।
छात्रों की मांग- मूल्यांकन प्रक्रिया में हो सुधार
छात्रों और अभिभावकों की मांग है कि बोर्ड मूल्यांकन प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाए। साथ ही डिजिटल जांच प्रणाली में यदि कोई कमी है, तो उसे जल्द दूर किया जाए ताकि भविष्य में छात्रों को इस तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े।
फिलहाल सीबीएसई 12वीं रिजल्ट 2026 को लेकर देशभर में चर्चा जारी है। अब सभी की नजर बोर्ड के अगले कदम पर टिकी हुई है कि छात्रों की शिकायतों पर क्या कार्रवाई की जाती है।

