By: Vikash, Mala Mandal
पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर गरमा चुकी है। आगामी विधानसभा चुनाव 2026 को लेकर राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। सवाल वही पुराना लेकिन बेहद अहम है—क्या ममता बनर्जी एक बार फिर सत्ता में वापसी करेंगी या इस बार बीजेपी उनका किला ढहा देगी?

पिछले कुछ वर्षों में पश्चिम बंगाल की राजनीति में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की मुखिया और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लगातार तीन बार सत्ता हासिल कर अपनी पकड़ मजबूत बनाई है। लेकिन भारतीय जनता पार्टी (BJP) भी राज्य में तेजी से अपने पैर पसार रही है और इस बार मुकाबला पहले से ज्यादा कड़ा माना जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो ममता बनर्जी की सबसे बड़ी ताकत उनकी मजबूत जमीनी पकड़ और कल्याणकारी योजनाएं हैं। ‘लक्ष्मी भंडार’, ‘कन्याश्री’ और ‘स्वास्थ्य साथी’ जैसी योजनाओं ने ग्रामीण और महिला वोटरों के बीच TMC की पकड़ को मजबूत किया है। यही कारण है कि आज भी ममता बनर्जी का जनाधार काफी मजबूत माना जाता है।

वहीं दूसरी ओर बीजेपी राज्य में हिंदुत्व, विकास और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों को लेकर लगातार हमलावर है। 2021 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए मुख्य विपक्षी दल का दर्जा हासिल किया था। इस बार पार्टी और ज्यादा सीटें जीतने के लक्ष्य के साथ मैदान में उतर रही है।
बंगाल की राजनीति में ध्रुवीकरण भी एक बड़ा फैक्टर बन चुका है। एक तरफ TMC अल्पसंख्यक और ग्रामीण वोट बैंक को साधने में जुटी है, तो दूसरी ओर बीजेपी शहरी और युवा वोटरों को अपनी ओर आकर्षित करने की कोशिश कर रही है। इसके अलावा केंद्रीय एजेंसियों की कार्रवाई, भ्रष्टाचार के आरोप और नेताओं के दल-बदल ने भी चुनावी माहौल को गर्म कर दिया है।

हाल ही में कई बड़े नेताओं की गिरफ्तारी और घोटालों के आरोपों ने TMC की छवि को कुछ हद तक नुकसान पहुंचाया है। शिक्षक भर्ती घोटाला और नगर निकाय से जुड़े भ्रष्टाचार के मामलों को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर हमला कर रहा है। हालांकि TMC इन आरोपों को साजिश बताकर खारिज करती रही है।
अगर जनता के मूड की बात करें तो ग्रामीण इलाकों में अब भी ममता सरकार के प्रति भरोसा देखने को मिल रहा है। खासकर महिलाओं और लाभार्थी वर्ग के बीच उनकी योजनाओं का असर साफ दिखाई देता है। लेकिन शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी, उद्योगों की कमी और कानून-व्यवस्था को लेकर नाराजगी भी सामने आ रही है।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार चुनाव में असली मुकाबला TMC और बीजेपी के बीच ही रहेगा। कांग्रेस और वाम दलों की स्थिति फिलहाल कमजोर नजर आ रही है, हालांकि वे गठबंधन के जरिए कुछ सीटों पर प्रभाव डाल सकते हैं।
चुनाव के नतीजे कई फैक्टर्स पर निर्भर करेंगे—जैसे उम्मीदवारों का चयन, गठबंधन की रणनीति, वोटरों की भागीदारी और चुनावी प्रचार। इसके अलावा राष्ट्रीय मुद्दों का भी असर राज्य की राजनीति पर देखने को मिल सकता है।

अगर मौजूदा हालात का विश्लेषण करें तो ममता बनर्जी अब भी मजबूत स्थिति में नजर आती हैं। उनकी पार्टी का संगठन जमीनी स्तर पर काफी सक्रिय है और सरकारी योजनाओं का लाभ उन्हें मिल सकता है। लेकिन बीजेपी की आक्रामक रणनीति और बढ़ती पकड़ चुनाव को बेहद दिलचस्प बना रही है।

अंततः यह कहना जल्दबाजी होगी कि 2026 में सत्ता किसके हाथ आएगी। लेकिन इतना तय है कि पश्चिम बंगाल का यह चुनाव देश की राजनीति के लिए बेहद अहम साबित होगा। आने वाले महीनों में चुनावी माहौल और ज्यादा गरमाएगा और राजनीतिक दल पूरी ताकत झोंक देंगे।
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या ममता बनर्जी एक बार फिर ‘दीदी’ के नाम पर जनता का भरोसा जीत पाएंगी या बीजेपी ‘परिवर्तन’ का नारा देकर इतिहास रच देगी।

