By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
झारखंड के देवघर की पावन धरती से निकले युवा खिलाड़ी आयुष संतोषी ने अपनी कड़ी मेहनत, अनुशासन और अटूट जुनून के दम पर वह मुकाम हासिल कर लिया है, जो हर खिलाड़ी का सपना होता है। आज आयुष सिर्फ एक नाम नहीं, बल्कि पूरे राज्य और देश के युवाओं के लिए प्रेरणा का प्रतीक बन चुके हैं। उनकी सफलता की कहानी यह साबित करती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं होती।

वर्ष 2025 आयुष संतोषी के करियर का सबसे सुनहरा दौर साबित हुआ। उन्होंने पावरलिफ्टिंग (बेंच प्रेस) में शानदार प्रदर्शन करते हुए 7 स्टेट गोल्ड मेडल जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इतना ही नहीं, उन्होंने 3 बार “बेस्ट लिफ्टर” का खिताब भी अपने नाम किया, जो उनकी ताकत, तकनीक और निरंतरता का प्रमाण है। राज्य स्तर पर लगातार जीत ने उन्हें एक उभरते हुए चैंपियन के रूप में स्थापित कर दिया।

लेकिन आयुष का सपना सिर्फ राज्य स्तर तक सीमित नहीं था। उनका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश का नाम रोशन करना था, और उन्होंने इसे सच कर दिखाया। श्रीलंका के कोलंबो में आयोजित अंतरराष्ट्रीय “गोल शॉट बॉल” प्रतियोगिता में आयुष ने गोल्ड मेडल जीतकर भारत का तिरंगा विश्व मंच पर लहरा दिया। इस प्रतियोगिता में भारत के अलावा बांग्लादेश, मालदीव, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे कुल 7 देशों के खिलाड़ी शामिल हुए थे। कड़े मुकाबले के बीच आयुष ने अपनी प्रतिभा का बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए गोल्ड मेडल अपने नाम किया।

यह जीत केवल एक खिलाड़ी की व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि पूरे देश के सम्मान की जीत है। आयुष की इस सफलता ने न सिर्फ झारखंड बल्कि पूरे भारत को गर्व से भर दिया है। खास बात यह भी रही कि झारखंड से यूथ टीम में केवल दो खिलाड़ियों का चयन हुआ था, जिनमें आयुष संतोषी का नाम शामिल था। यह चयन ही इस बात का संकेत था कि वह कुछ बड़ा करने वाले हैं—और उन्होंने अपने प्रदर्शन से इस विश्वास को सही साबित कर दिया।

आयुष की इस सफलता के पीछे उनकी माँ कुमारी अलका सोनी का महत्वपूर्ण योगदान है। उन्होंने हर कठिन परिस्थिति में अपने बेटे का साथ दिया और उसे कभी हार मानने नहीं दिया। एक माँ के त्याग, समर्पण और विश्वास ने ही आयुष को इस मुकाम तक पहुँचाया। उनकी कहानी इस बात का उदाहरण है कि परिवार का समर्थन किसी भी सफलता की सबसे मजबूत नींव होता है।
इसके अलावा आयुष के कोच राजेश रंजन और संजय सिंह का मार्गदर्शन भी उनकी सफलता में अहम भूमिका निभाता है। राजेश रंजन, जो इस अंतरराष्ट्रीय चैंपियनशिप में टीम इंडिया के कोच भी थे, ने आयुष को उच्च स्तर की ट्रेनिंग दी और उन्हें मानसिक व शारीरिक रूप से मजबूत बनाया। उनके अनुभव और अनुशासन ने आयुष को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी बनने में मदद की।

देवघर के महावीर अखाड़ा और स्मार्ट जिम में की गई कठोर मेहनत ने आयुष के सपनों को साकार किया। रोजाना घंटों अभ्यास, संतुलित आहार और अनुशासित जीवनशैली ने उन्हें इस मुकाम तक पहुँचाया। उनकी सफलता यह दर्शाती है कि छोटे शहरों से भी बड़े सपने पूरे किए जा सकते हैं, यदि समर्पण और मेहनत में कोई कमी न हो।
वर्तमान में आयुष संतोषी पंजाब के जालंधर स्थित DAV University में अपनी पढ़ाई कर रहे हैं। विश्वविद्यालय के HOD यशबीर सिंह ने उनकी उपलब्धियों पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि आयुष जैसे प्रतिभाशाली छात्र देश का भविष्य हैं और युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

आज आयुष संतोषी की कहानी हर युवा के दिल में नई ऊर्जा और उत्साह भर रही है। उनकी सफलता यह सिखाती है कि परिस्थितियां चाहे कैसी भी हों, अगर इंसान ठान ले तो वह हर बाधा को पार कर सकता है। देवघर का यह बेटा आज देश का हीरो बन चुका है और उसकी उपलब्धियां आने वाली पीढ़ियों को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती रहेंगी।
आयुष संतोषी ने यह साबित कर दिया है कि सफलता किसी एक दिन में नहीं मिलती, बल्कि यह निरंतर मेहनत, धैर्य और संघर्ष का परिणाम होती है। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके परिवार और शहर के लिए, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है।

