By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
देवघर में शुक्रवार सुबह एक दर्दनाक घटना ने लोगों को झकझोर कर रख दिया। हरियाणा के पानीपत निवासी अभिषेक कुमार, जो देवघर में रहकर एक अपार्टमेंट में प्राइवेट नौकरी किया करते थे, मॉर्निंग वॉक और दौड़ के दौरान अचानक बेहोश होकर गिर पड़े। इलाज के लिए उन्हें पहले एक निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां कथित रूप से उन्हें तत्काल उपचार नहीं मिला। बाद में सदर अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद शहर में निजी अस्पतालों की व्यवस्था और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जानकारी के अनुसार अभिषेक कुमार पिछले कुछ समय से देवघर में अपनी पत्नी के साथ रह रहे थे। वे रोजाना सुबह K K N स्टेडियम में दौड़ और व्यायाम करने जाया करते थे। शुक्रवार सुबह भी वह अपने निर्धारित समय पर स्टेडियम पहुंचे और दौड़ लगा रहे थे। इसी दौरान अचानक उनकी सांसें तेज चलने लगीं और कुछ ही देर में वह मैदान में बेहोश होकर गिर पड़े।

स्टेडियम में मौजूद अन्य खिलाड़ियों और युवाओं ने तुरंत अभिषेक को संभाला। उनकी हालत गंभीर देखकर आसपास मौजूद लोगों ने बिना देर किए उन्हें नजदीकी त्रिदेव हॉस्पिटल पहुंचाया। आरोप है कि अस्पताल में मौजूद कर्मियों ने यह कहकर मरीज को भर्ती करने से इनकार कर दिया कि अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा उपलब्ध नहीं है।

प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि काफी अनुरोध और मिन्नत के बावजूद अस्पताल कर्मियों ने अभिषेक का इलाज शुरू नहीं किया। आरोप यह भी लगाया जा रहा है कि मरीज को प्राथमिक उपचार तक नहीं दिया गया। इसके बाद युवक को आनन-फानन में देवघर सदर अस्पताल ले जाया गया, जहां ऑन ड्यूटी डॉक्टर ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया।

इस घटना के बाद स्टेडियम में खेलने और अभ्यास करने वाले युवाओं में भारी आक्रोश देखा गया। खिलाड़ियों का कहना है कि K K N स्टेडियम में हर रोज बड़ी संख्या में युवा, बुजुर्ग और खिलाड़ी मॉर्निंग वॉक, दौड़ और खेल गतिविधियों के लिए पहुंचते हैं, लेकिन वहां किसी प्रकार की मेडिकल सुविधा उपलब्ध नहीं है। खिलाड़ियों ने मांग की है कि स्टेडियम परिसर में स्थायी रूप से डॉक्टरों की टीम, एम्बुलेंस और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था की जाए ताकि भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में समय रहते इलाज मिल सके।

घटना के बाद स्थानीय लोगों ने निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि बड़े-बड़े दावे और आधुनिक सुविधाओं के प्रचार के बावजूद यदि गंभीर स्थिति में मरीज को प्राथमिक उपचार तक नहीं मिलता है, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। लोगों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि वास्तव में अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं थी, तब भी अस्पताल प्रशासन की जिम्मेदारी बनती थी कि मरीज को प्राथमिक उपचार देकर बेहतर अस्पताल रेफर किया जाता। वहीं यदि अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा मौजूद थी, तो फिर इलाज में देरी क्यों हुई, यह भी जांच का विषय है।

मामले को लेकर शहर में स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि निजी अस्पतालों को केवल व्यवसायिक केंद्र बनाकर नहीं चलाया जा सकता। गंभीर स्थिति में मरीजों को तुरंत चिकित्सा सुविधा देना अस्पताल प्रबंधन की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है।
इस घटना ने यह भी उजागर कर दिया है कि देवघर जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में खेल मैदानों और सार्वजनिक स्थानों पर मेडिकल इमरजेंसी व्यवस्था की कितनी जरूरत है। खिलाड़ियों और स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि सभी प्रमुख स्टेडियमों और खेल परिसरों में प्राथमिक चिकित्सा केंद्र, ऑक्सीजन सिलेंडर, स्ट्रेचर और प्रशिक्षित मेडिकल स्टाफ की व्यवस्था अनिवार्य रूप से की जाए।

फिलहाल अभिषेक कुमार की मौत के बाद उनके परिवार में मातम पसरा हुआ है। स्थानीय लोग और खिलाड़ी प्रशासन से पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। वहीं यह घटना शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी अस्पतालों की जवाबदेही पर कई गंभीर सवाल खड़े कर रही है।

