By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
Prateek Yadav Death Cause: समाजवादी पार्टी से जुड़े परिवार के सदस्य और अपर्णा यादव के पति प्रतीक यादव के निधन की खबर ने हर किसी को चौंका दिया है। हालांकि उनकी मौत की आधिकारिक वजह अब तक पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो पाई है, लेकिन बताया जा रहा है कि उन्हें फेफड़ों में क्लॉट यानी ब्लड क्लॉट की गंभीर समस्या थी और उनका इलाज चल रहा था। इसके बाद लोगों के मन में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या फेफड़ों का इंफेक्शन या क्लॉट अचानक किसी की जान ले सकता है? क्या निमोनिया, टीबी या फेफड़ों की दूसरी बीमारियां कुछ ही घंटों में खतरनाक रूप ले सकती हैं?

इस मामले पर डॉक्टर गुरमीत सिंह छाबड़ा, निदेशक पल्मोनोलॉजी, यथार्थ हॉस्पिटल सेक्टर-20 फरीदाबाद ने विस्तार से जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि फेफड़ों का गंभीर इंफेक्शन, ब्लड क्लॉट या अचानक सांस से जुड़ी जटिलताएं कई बार बेहद खतरनाक साबित हो सकती हैं और कुछ मामलों में अचानक मौत का कारण भी बन सकती हैं।
क्या फेफड़ों का इंफेक्शन अचानक जानलेवा बन सकता है?
डॉक्टर के अनुसार, यह पूरी तरह इस बात पर निर्भर करता है कि संक्रमण किस प्रकार का है और मरीज की इम्युनिटी कैसी है। कई बैक्टीरिया और फंगल इंफेक्शन इतने तेजी से फैलते हैं कि कुछ ही घंटों में मरीज की हालत गंभीर हो सकती है। खासकर उन लोगों में जिनका इम्यून सिस्टम पहले से कमजोर होता है। डॉक्टर ने बताया कि डायबिटीज के मरीज, जिनका ब्लड शुगर कंट्रोल में नहीं रहता, क्रॉनिक किडनी डिजीज यानी CKD के मरीज, लिवर की बीमारी CLD से पीड़ित लोग और COPD जैसी फेफड़ों की पुरानी बीमारी वाले मरीज ज्यादा जोखिम में रहते हैं। ऐसे मरीजों में शरीर की बीमारी से लड़ने की क्षमता कमजोर हो जाती है और संक्रमण बहुत तेजी से पूरे शरीर में फैल सकता है।

निमोनिया कैसे बन सकता है खतरनाक?
फेफड़ों का संक्रमण अगर तेजी से बढ़ता है तो निमोनिया गंभीर रूप ले सकता है। डॉक्टर के मुताबिक कई बार निमोनिया कुछ ही घंटों में पूरे फेफड़ों को प्रभावित कर देता है। जब संक्रमण तेजी से बढ़ता है तो वह सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता बल्कि पूरे शरीर में फैलने लगता है। इस स्थिति को सेप्सिस या सेप्टिक शॉक कहा जाता है। इसमें मरीज का ब्लड प्रेशर तेजी से गिरने लगता है और शरीर के दूसरे अंग जैसे किडनी, हार्ट और लिवर भी प्रभावित होने लगते हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह स्थिति जानलेवा साबित हो सकती है।

रेस्पिरेटरी फेलियर क्या होता है?
डॉक्टर ने बताया कि गंभीर संक्रमण के दौरान कई बार मरीज को रेस्पिरेटरी फेलियर हो जाता है। इसका मतलब है कि शरीर में ऑक्सीजन की मात्रा कम होने लगती है और खून में कार्बन डाइऑक्साइड बढ़ने लगती है। इससे शरीर का pH स्तर बिगड़ जाता है और मरीज को सांस लेने में गंभीर दिक्कत होने लगती है। ऐसी स्थिति में मरीज को ICU में भर्ती करना पड़ सकता है और कई बार वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत भी पड़ती है। यदि समय रहते इलाज न मिले तो यह स्थिति घातक साबित हो सकती है।

क्या TB और फंगल इंफेक्शन भी खतरनाक हो सकते हैं?
विशेषज्ञों के अनुसार, टीबी, फंगल इंफेक्शन या गंभीर निमोनिया भी कई बार फेफड़ों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर संक्रमण फेफड़ों की झिल्ली या सांस की मुख्य नली तक पहुंच जाए तो झिल्ली फट सकती है। इस स्थिति को न्यूमोथोरैक्स कहा जाता है। न्यूमोथोरैक्स में फेफड़ों और छाती के बीच हवा भरने लगती है जिससे मरीज को अचानक सांस लेने में दिक्कत होती है। यदि तुरंत इलाज न मिले तो मरीज की हालत बेहद गंभीर हो सकती है। खासकर वेंटिलेटर पर भर्ती मरीजों में यह स्थिति ज्यादा खतरनाक मानी जाती है।

फेफड़ों में क्लॉट कितना खतरनाक होता है?
डॉक्टर ने बताया कि गंभीर बीमारियों से जूझ रहे मरीजों में खून के थक्के यानी ब्लड क्लॉट बनने का खतरा बढ़ जाता है। लंबे समय तक बिस्तर पर रहने, शरीर में सूजन, कम गतिविधि और ऑक्सीजन की कमी के कारण पैरों की नसों में क्लॉट बनने लगते हैं।
जब यही क्लॉट टूटकर फेफड़ों तक पहुंच जाता है तो उसे पल्मोनरी एम्बोलिज्म कहा जाता है। यह एक बेहद गंभीर स्थिति होती है और अचानक मौत का कारण बन सकती है। कई बार मरीज को अचानक सांस फूलना, सीने में तेज दर्द और ऑक्सीजन लेवल गिरने जैसी समस्याएं शुरू हो जाती हैं।
किन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें?
डॉक्टरों के मुताबिक यदि किसी व्यक्ति को लगातार तेज बुखार, सांस लेने में दिक्कत, सीने में दर्द, ऑक्सीजन लेवल कम होना, लगातार खांसी, खून वाली खांसी या अचानक कमजोरी महसूस हो रही हो तो तुरंत जांच करानी चाहिए।
विशेषज्ञों का कहना है कि फेफड़ों के संक्रमण को हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है। शुरुआती लक्षणों पर इलाज शुरू होने से गंभीर खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कैसे किया जाता है इलाज?
गंभीर संक्रमण वाले मरीजों में डॉक्टर तुरंत एंटीबायोटिक और जरूरी दवाओं की शुरुआत करते हैं। मरीज की स्थिति को लगातार मॉनिटर किया जाता है। इसके लिए Procalcitonin, CRP और कई ब्लड टेस्ट किए जाते हैं ताकि संक्रमण की गंभीरता को समझा जा सके।
अगर संक्रमण दवाओं से कंट्रोल नहीं होता तो मरीज को ICU में भर्ती करना पड़ सकता है। कई मामलों में ऑक्सीजन सपोर्ट या वेंटिलेटर की जरूरत भी पड़ती है।

डॉक्टर की सलाह
विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज, COPD, किडनी और लिवर की बीमारी वाले लोगों को फेफड़ों के संक्रमण से ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। समय पर जांच, सही इलाज और डॉक्टर की सलाह का पालन करने से गंभीर खतरे को टाला जा सकता है।
इस लेख में दी गई जानकारी डॉक्टर द्वारा साझा की गई मेडिकल जानकारी और सामान्य स्वास्थ्य तथ्यों पर आधारित है। यह किसी भी तरह से चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या आपात स्थिति में तुरंत योग्य डॉक्टर से संपर्क करें।

