By: Mala Mandal
नई दिल्ली। देशभर में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में शुक्रवार से भारी बढ़ोतरी लागू कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल और डीजल के दाम में करीब ₹3 प्रति लीटर तक की वृद्धि की है। पिछले चार वर्षों में यह पहली बड़ी बढ़ोतरी मानी जा रही है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में लगातार उछाल और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण यह फैसला लिया गया है।

तेल कंपनियों के अनुसार नई कीमतें तत्काल प्रभाव से लागू हो गई हैं। राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत अब ₹97.77 प्रति लीटर और डीजल ₹90.67 प्रति लीटर हो गया है। वहीं मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और अन्य महानगरों में भी ईंधन की कीमतों में समान रूप से वृद्धि दर्ज की गई है।
जानकारों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंचने के कारण सरकारी तेल कंपनियों पर भारी आर्थिक दबाव बढ़ गया था। पिछले कई महीनों से कंपनियां घाटे में ईंधन बेच रही थीं। ऐसे में तेल कंपनियों ने कीमतों में वृद्धि का फैसला लिया है।

बताया जा रहा है कि पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई प्रभावित हुई है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय कीमतों का सीधा असर घरेलू बाजार पर पड़ रहा है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि परिवहन लागत बढ़ने से रोजमर्रा की वस्तुएं भी महंगी हो सकती हैं। ट्रांसपोर्ट, कृषि, निर्माण और छोटे व्यवसायों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

ईंधन महंगा होने के बाद माल ढुलाई की लागत बढ़ने की संभावना है, जिससे फल, सब्जी, दूध, अनाज समेत अन्य जरूरी सामानों की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। इसके अलावा सार्वजनिक परिवहन सेवाओं के किराये में भी वृद्धि की आशंका जताई जा रही है। कई राज्यों में ऑटो, बस और टैक्सी संगठनों ने किराया संशोधन की मांग उठानी शुरू कर दी है।
उधर केंद्र सरकार ने लोगों से ईंधन की बचत करने की अपील की है। सरकार का कहना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में ऊर्जा संरक्षण बेहद जरूरी है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि देश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और आपूर्ति सामान्य बनी हुई है।

तेल कंपनियों के मुताबिक ईंधन की कीमतें रोज सुबह 6 बजे संशोधित की जाती हैं। विभिन्न राज्यों में वैट और स्थानीय टैक्स अलग-अलग होने के कारण कीमतों में अंतर देखने को मिलता है। बिहार, झारखंड, महाराष्ट्र, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में टैक्स अधिक होने के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतें अपेक्षाकृत ज्यादा हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट नहीं आती है, तो आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि सरकार स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर टैक्स में राहत जैसे विकल्पों पर विचार कर सकती है।

शेयर बाजार में भी इस फैसले का असर देखने को मिला। तेल कंपनियों के शेयरों में उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। निवेशकों को आशंका है कि बढ़ती वैश्विक अस्थिरता का असर ऊर्जा क्षेत्र पर लंबे समय तक बना रह सकता है।
देशभर में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में हुई इस वृद्धि ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। महंगाई पहले से ही आम जनता की जेब पर असर डाल रही थी, ऐसे में ईंधन महंगा होने से घरेलू बजट और अधिक प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।

