By: Mala Mandal
देशभर में पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। पिछले 9 दिनों के भीतर केंद्र सरकार की ओर से तीन बार ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी किए जाने के बाद विपक्षी दलों ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल (RJD) समेत कई विपक्षी पार्टियों ने इसे आम जनता की जेब पर बोझ बताते हुए केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए हैं।

विपक्ष का कहना है कि महंगाई पहले से ही लोगों की कमर तोड़ रही है और अब पेट्रोल-डीजल के दामों में लगातार इजाफा होने से आम आदमी की परेशानी और बढ़ जाएगी। वहीं सरकार की ओर से अब तक इस मुद्दे पर कोई बड़ा बयान सामने नहीं आया है, लेकिन तेल कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और सप्लाई संकट का असर घरेलू कीमतों पर पड़ रहा है।
9 दिनों में तीन बार बढ़े दाम
देश की प्रमुख तेल कंपनियों ने पिछले 9 दिनों के दौरान तीन अलग-अलग चरणों में पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में बढ़ोतरी की है। राजधानी दिल्ली समेत कई बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और वैश्विक तनाव के कारण ईंधन की लागत लगातार बढ़ रही है। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है।

कांग्रेस ने कहा- जनता पर किस्तों में हमला
कांग्रेस पार्टी ने पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार जनता पर “किस्तों में महंगाई का हमला” कर रही है। कांग्रेस प्रवक्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार टैक्स कम करने की बजाय लगातार कीमतें बढ़ाकर आम लोगों को परेशान कर रही है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री से जवाब मांगते हुए कहा कि जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल कीमतें पहले कम हुई थीं तब जनता को राहत क्यों नहीं दी गई। पार्टी का कहना है कि सरकार को एक्साइज ड्यूटी कम करनी चाहिए ताकि लोगों को राहत मिल सके।

RJD ने भी केंद्र सरकार को घेरा
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने भी इस मुद्दे को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला है। पार्टी नेताओं ने कहा कि लगातार बढ़ती ईंधन कीमतों से ट्रांसपोर्ट महंगा होगा, जिसका असर सीधे खाद्य पदार्थों और रोजमर्रा की जरूरतों की कीमतों पर पड़ेगा। आरजेडी नेताओं ने कहा कि सरकार महंगाई पर नियंत्रण करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। पार्टी ने इसे गरीब और मध्यम वर्ग के खिलाफ आर्थिक बोझ बताया है।

महंगाई बढ़ने की आशंका
आर्थिक जानकारों का कहना है कि पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ वाहन चालकों तक सीमित नहीं रहता। ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने से फल, सब्जी, दूध, राशन और अन्य जरूरी सामानों की कीमतों में भी इजाफा हो सकता है। CNG के दाम बढ़ने से ऑटो, टैक्सी और सार्वजनिक परिवहन सेवाओं का किराया भी बढ़ सकता है। इससे रोजाना यात्रा करने वाले लाखों लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ेगा।

सरकार पर बढ़ा दबाव
विपक्ष लगातार सरकार से पेट्रोलियम उत्पादों पर टैक्स कम करने की मांग कर रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग बढ़ती महंगाई को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। कई यूजर्स ने कहा कि आम आदमी पहले ही महंगे राशन, बिजली और गैस सिलेंडर की मार झेल रहा है, ऐसे में ईंधन कीमतों में बढ़ोतरी ने मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में यह मुद्दा और ज्यादा गरमा सकता है, क्योंकि ईंधन कीमतों का सीधा असर हर वर्ग के लोगों पर पड़ता है।

जनता की क्या है राय?
देश के अलग-अलग हिस्सों से लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोगों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय हालात की वजह से कीमतें बढ़ रही हैं, जबकि कई लोग इसे सरकार की गलत आर्थिक नीतियों का परिणाम बता रहे हैं।
फिलहाल जनता की नजर सरकार के अगले कदम पर टिकी है। अगर आने वाले दिनों में भी पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में बढ़ोतरी जारी रहती है तो इसका असर आम आदमी के बजट पर और ज्यादा दिखाई दे सकता है।

