By: Mala Mandal
देशभर में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी तेल विपणन कंपनियों ने मंगलवार को पेट्रोल और डीजल के दाम में करीब 90 पैसे प्रति लीटर की नई बढ़ोतरी कर दी। एक हफ्ते के भीतर यह दूसरी बड़ी वृद्धि मानी जा रही है, जिससे पहले से महंगाई की मार झेल रहे लोगों की जेब पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है।

नई दरें लागू होने के बाद देश के कई बड़े शहरों में पेट्रोल और डीजल की कीमतें फिर नए रिकॉर्ड स्तर के करीब पहुंच गई हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में ईंधन के दाम बढ़ने के बाद परिवहन लागत में भी इजाफा होने की संभावना जताई जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में कमी नहीं आती है तो घरेलू बाजार में भी राहत मिलने की उम्मीद कम है।

सरकारी तेल कंपनियों के अनुसार अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी का असर घरेलू ईंधन कीमतों पर पड़ रहा है। यही वजह है कि लगातार पेट्रोल और डीजल के दाम बढ़ रहे हैं। हालांकि आम उपभोक्ताओं का मानना है कि लगातार हो रही बढ़ोतरी ने घरेलू बजट पूरी तरह बिगाड़ दिया है।
देश के कई हिस्सों में लोग पहले से ही खाद्य पदार्थों, रसोई गैस और बिजली की बढ़ती कीमतों से परेशान हैं। अब पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। खासकर मध्यम वर्ग और दैनिक मजदूरी करने वाले लोगों के लिए रोजमर्रा का खर्च संभालना चुनौती बनता जा रहा है। वाहन चालकों का कहना है कि हर कुछ दिनों में ईंधन की कीमतें बढ़ने से उनकी आमदनी पर सीधा असर पड़ रहा है।

पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर केवल वाहन चलाने वालों तक सीमित नहीं रहता। ट्रांसपोर्ट महंगा होने से फल, सब्जी, दूध और अन्य जरूरी सामानों की ढुलाई लागत बढ़ जाती है। इसका सीधा असर बाजार कीमतों पर दिखाई देता है। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में खाने-पीने की वस्तुओं समेत कई जरूरी चीजें और महंगी हो सकती हैं।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि ईंधन की कीमतें किसी भी देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। जब पेट्रोल और डीजल महंगे होते हैं तो उद्योगों की लागत भी बढ़ती है। इसका असर उत्पादन, परिवहन और सेवाओं पर पड़ता है। कई उद्योगों के लिए डीजल प्रमुख ईंधन है, इसलिए कीमत बढ़ने से कारोबार की लागत बढ़ना तय माना जाता है।

विपक्षी दलों ने भी पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। कई नेताओं ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई ने आम लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। विपक्ष का आरोप है कि सरकार टैक्स में कटौती कर जनता को राहत दे सकती है, लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है। वहीं सरकार की ओर से कहा जा रहा है कि वैश्विक परिस्थितियों का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ रहा है और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
सोशल मीडिया पर भी पेट्रोल और डीजल की कीमतों को लेकर लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोग लगातार बढ़ती कीमतों पर नाराजगी जाहिर कर रहे हैं तो कुछ लोग सरकार से राहत पैकेज की मांग कर रहे हैं। खासकर नौकरीपेशा और छोटे व्यापारियों का कहना है कि आय सीमित है लेकिन खर्च लगातार बढ़ते जा रहे हैं।

ऑटो और टैक्सी चालकों ने भी ईंधन कीमतों में वृद्धि पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि किराया बढ़ाने पर यात्रियों की संख्या कम हो सकती है, जबकि किराया नहीं बढ़ाने पर कमाई प्रभावित होगी। ऐसे में उनके सामने आर्थिक संकट की स्थिति बनती जा रही है।
ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेट्रोल और डीजल महंगा होने का असर साफ दिखाई देने लगा है। खेती-किसानी में इस्तेमाल होने वाले डीजल की कीमत बढ़ने से किसानों की लागत बढ़ेगी। ट्रैक्टर, पंपसेट और अन्य कृषि उपकरणों के संचालन में अतिरिक्त खर्च आएगा। इससे कृषि उत्पादन लागत पर भी असर पड़ सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार टैक्स में कुछ राहत देती है या अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें कम होती हैं तो आने वाले समय में उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है। फिलहाल लगातार बढ़ती कीमतों ने आम जनता की चिंता बढ़ा दी है और लोग सरकार से जल्द राहत की उम्मीद कर रहे हैं।
देश में बढ़ती महंगाई के बीच पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर आम आदमी बढ़ते खर्चों का सामना कब तक करेगा। आने वाले दिनों में सरकार और तेल कंपनियों के फैसलों पर सभी की नजरें टिकी रहेंगी।

