By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
सनातन धर्म में गंगा दशहरा का पर्व अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी माना जाता है। वर्ष 2026 में गंगा दशहरा 25 मई को मनाया जा रहा है। इस दिन मां गंगा की पूजा-अर्चना, स्नान और दान का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मां गंगा स्वर्ग से धरती पर अवतरित हुई थीं। यही वजह है कि इस दिन को गंगा अवतरण दिवस के रूप में भी जाना जाता है।

मान्यता है कि गंगा दशहरा के दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ मां गंगा की पूजा करने से व्यक्ति के 10 प्रकार के महापाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि का आगमन होता है। इस दिन देशभर के गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। लोग पवित्र गंगा में स्नान कर पुण्य लाभ प्राप्त करते हैं।
क्यों खास है गंगा दशहरा का पर्व
धार्मिक ग्रंथों के अनुसार राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थीं ताकि उनके पूर्वजों का उद्धार हो सके। माना जाता है कि मां गंगा के जल में स्नान करने से व्यक्ति के पाप समाप्त होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। गंगा दशहरा का पर्व ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन गंगा स्नान, दान-पुण्य और मंत्र जाप करने का विशेष महत्व होता है। कई लोग इस दिन व्रत भी रखते हैं और मां गंगा से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।

गंगा दशहरा पर जरूर करें ये काम
गंगा स्नान करें
गंगा दशहरा के दिन पवित्र नदी में स्नान करना बेहद शुभ माना जाता है। अगर गंगा नदी तक जाना संभव न हो तो घर में नहाने के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है और पापों से मुक्ति मिलती है।
मां गंगा की पूजा करें
इस दिन मां गंगा की विधि-विधान से पूजा करनी चाहिए। पूजा के दौरान दीपक जलाएं, फूल अर्पित करें और गंगा स्तोत्र या गंगा चालीसा का पाठ करें। ऐसा करने से जीवन में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

दान-पुण्य का विशेष महत्व
गंगा दशहरा के दिन जरूरतमंद लोगों को दान देना अत्यंत शुभ माना गया है। इस दिन जल से भरे घड़े, कपड़े, फल, अनाज और धन का दान करने से पुण्य फल की प्राप्ति होती है। धार्मिक मान्यता है कि दान करने से जीवन की परेशानियां कम होती हैं।
भगवान शिव की पूजा करें
मां गंगा को भगवान शिव ने अपनी जटाओं में धारण किया था। इसलिए इस दिन भगवान शिव की पूजा करना भी शुभ माना जाता है। शिवलिंग पर जल और गंगाजल अर्पित करने से विशेष फल प्राप्त होता है।

मंत्र जाप और ध्यान करें
गंगा दशहरा के दिन “ॐ नमः शिवाय” और मां गंगा के मंत्रों का जाप करना शुभ माना जाता है। इससे मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
10 प्रकार के पापों से मुक्ति की मान्यता
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गंगा दशहरा पर श्रद्धा भाव से स्नान और पूजा करने से 10 प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है। इन्हीं 10 पापों के नाश के कारण इस पर्व को “दशहरा” कहा जाता है। माना जाता है कि इस दिन किए गए शुभ कार्य कई गुना फल प्रदान करते हैं।

घर में कैसे करें मां गंगा की पूजा
अगर आप गंगा नदी तक नहीं जा सकते हैं तो घर में भी पूजा कर सकते हैं। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पूजा स्थल पर मां गंगा की तस्वीर या गंगाजल स्थापित करें। इसके बाद दीप जलाकर आरती करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें।

गंगा दशहरा का आध्यात्मिक महत्व
गंगा दशहरा केवल एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि आस्था, शुद्धता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक भी माना जाता है। यह पर्व लोगों को दान, सेवा और आध्यात्मिक जीवन की ओर प्रेरित करता है। इस दिन किए गए अच्छे कर्म व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला सकते हैं।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं और ज्योतिषीय जानकारी पर आधारित है। विभिन्न परंपराओं और मान्यताओं के अनुसार पूजा विधि और नियमों में अंतर संभव है। किसी भी धार्मिक कार्य को करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

