By: Mala Mandal
भूटान में रविवार रात आए 5.6 तीव्रता के भूकंप ने पूरे पूर्वोत्तर भारत और पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में लोगों को झकझोर कर रख दिया। भूकंप के झटके भूटान के अलावा उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी, जलपाईगुड़ी, अलीपुरद्वार, कूचबिहार, दार्जिलिंग समेत कई जिलों में महसूस किए गए। इतना ही नहीं, राज्य की राजधानी कोलकाता में भी लोगों ने हल्के झटकों का अनुभव किया। अचानक धरती के हिलने से लोग घबराकर घरों और इमारतों से बाहर निकल आए।

रिपोर्टों के अनुसार, भूकंप का केंद्र भूटान क्षेत्र में बताया गया है और इसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 5.6 मापी गई। भूकंप रात के समय आया, जब अधिकांश लोग अपने घरों में मौजूद थे। अचानक कंपन महसूस होते ही कई परिवारों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। हालांकि शुरुआती जानकारी के मुताबिक किसी बड़े जान-माल के नुकसान की खबर सामने नहीं आई है, लेकिन प्रशासन पूरी स्थिति पर नजर बनाए हुए है।
उत्तर बंगाल के सिलीगुड़ी में सबसे अधिक झटके महसूस किए गए। स्थानीय लोगों के अनुसार कुछ सेकंड तक धरती हिलती हुई महसूस हुई। कई लोग नींद से जाग गए और सुरक्षा के लिए खुले स्थानों की ओर चले गए। बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोगों ने भी झटकों की पुष्टि की। कुछ इलाकों में लोग देर रात तक घरों के बाहर खड़े रहे क्योंकि उन्हें दोबारा भूकंप आने की आशंका थी।

कोलकाता में भी भूकंप के हल्के झटके महसूस किए गए। शहर के विभिन्न हिस्सों से लोगों ने सोशल मीडिया के माध्यम से अपने अनुभव साझा किए। कई लोगों ने बताया कि पंखे और अन्य घरेलू सामान कुछ क्षणों के लिए हिलते हुए दिखाई दिए। हालांकि झटकों की तीव्रता कम होने के कारण किसी प्रकार की बड़ी क्षति की सूचना नहीं मिली।
विशेषज्ञों का कहना है कि हिमालयी क्षेत्र भूकंपीय दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जाता है। भूटान, नेपाल, सिक्किम और उत्तर बंगाल का इलाका भूकंप संभावित क्षेत्रों में शामिल है। भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटों के बीच लगातार हो रही भूगर्भीय गतिविधियों के कारण इस क्षेत्र में समय-समय पर भूकंप आते रहते हैं। यही वजह है कि वैज्ञानिक और आपदा प्रबंधन एजेंसियां इस क्षेत्र को लेकर लगातार सतर्क रहती हैं।

भूकंप के बाद पश्चिम बंगाल राज्य आपदा प्रबंधन विभाग और जिला प्रशासन ने स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी। अधिकारियों ने बताया कि फिलहाल किसी बड़े नुकसान की सूचना नहीं मिली है। फिर भी सभी जिलों को सतर्क रहने और किसी भी आपात स्थिति के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करें।
भूकंप के बाद सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर काफी चर्चा देखने को मिली। कई लोगों ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें कुछ सेकंड तक जमीन हिलती हुई महसूस हुई। कुछ लोगों ने इसे हाल के वर्षों में महसूस किए गए सबसे स्पष्ट झटकों में से एक बताया। हालांकि विशेषज्ञों ने कहा है कि भूकंप की तीव्रता मध्यम श्रेणी की थी और इससे व्यापक स्तर पर नुकसान की संभावना कम थी।

आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों का कहना है कि भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान घबराने के बजाय सावधानी बरतना सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि भूकंप के झटके महसूस हों तो लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थान पर जाना चाहिए। बहुमंजिला इमारतों में रहने वाले लोगों को लिफ्ट का उपयोग नहीं करना चाहिए और मजबूत फर्नीचर या दीवारों के पास शरण लेनी चाहिए। खुले स्थानों में बिजली के खंभों और ऊंची इमारतों से दूरी बनाए रखना भी जरूरी है।

भूटान और उसके आसपास का क्षेत्र पहले भी कई बार भूकंप की गतिविधियों का केंद्र रहा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्र में भूगर्भीय दबाव लगातार बनता रहता है, जिसके कारण समय-समय पर कंपन महसूस होते हैं। यही कारण है कि इस पूरे क्षेत्र में भूकंपरोधी निर्माण और आपदा प्रबंधन योजनाओं को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।

फिलहाल राहत की बात यह है कि इस भूकंप से किसी बड़े नुकसान या हताहत होने की सूचना सामने नहीं आई है। लेकिन इस घटना ने एक बार फिर लोगों को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति सतर्क रहने की आवश्यकता का एहसास कराया है। प्रशासन और विशेषज्ञ लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं तथा नागरिकों से शांति और सतर्कता बनाए रखने की अपील कर रहे हैं।
भूटान में आए इस 5.6 तीव्रता के भूकंप ने उत्तर बंगाल और कोलकाता सहित पूर्वी भारत के कई हिस्सों में लोगों को चिंता में डाल दिया। हालांकि नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन यह घटना इस बात की याद दिलाती है कि भूकंप संभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को हमेशा तैयार और जागरूक रहना चाहिए। आने वाले दिनों में वैज्ञानिक एजेंसियों और प्रशासन की निगरानी इस क्षेत्र में संभावित गतिविधियों पर बनी रहेगी।

