By: Mala Mandal
Deoghar AIIMS News: झारखंड के देवघर स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS Deoghar) ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक नई उपलब्धि हासिल करते हुए इतिहास रच दिया है। संस्थान में पहली बार बिना किसी बड़े ऑपरेशन के जन्मजात हृदय दोष (Patent Ductus Arteriosus – PDA) का सफल उपचार किया गया। इस उपलब्धि ने न केवल झारखंड बल्कि पूरे पूर्वी भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र में नई उम्मीद जगाई है।

एम्स देवघर के विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने अत्याधुनिक इंटरवेंशनल कार्डियोलॉजी तकनीक का इस्तेमाल करते हुए मरीज का सफल इलाज किया। इस प्रक्रिया में मरीज का सीना चीरने या ओपन हार्ट सर्जरी करने की आवश्यकता नहीं पड़ी। केवल कैथेटर आधारित तकनीक के माध्यम से हृदय में मौजूद जन्मजात दोष को सफलतापूर्वक बंद किया गया।
क्या है PDA?
Patent Ductus Arteriosus (PDA) एक जन्मजात हृदय रोग है। गर्भ में शिशु के विकास के दौरान हृदय की दो प्रमुख रक्त वाहिकाओं के बीच एक विशेष नली होती है, जिसे जन्म के बाद स्वतः बंद हो जाना चाहिए। यदि यह नली खुली रह जाती है, तो इसे PDA कहा जाता है। इससे हृदय और फेफड़ों पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है और मरीज को सांस लेने में परेशानी, बार-बार संक्रमण, थकान और अन्य गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। यदि समय पर इसका उपचार नहीं कराया जाए तो भविष्य में हृदय की कार्यक्षमता प्रभावित होने के साथ कई जटिलताएं भी उत्पन्न हो सकती हैं।

बिना ऑपरेशन के हुआ सफल उपचार
एम्स देवघर के कार्डियोलॉजी विभाग ने आधुनिक कैथ लैब तकनीक का उपयोग करते हुए रक्त वाहिका के जरिए एक विशेष डिवाइस को हृदय तक पहुंचाया। इसके माध्यम से PDA को सफलतापूर्वक बंद किया गया। पूरी प्रक्रिया के दौरान मरीज को ओपन हार्ट सर्जरी की आवश्यकता नहीं पड़ी। इससे दर्द कम हुआ, संक्रमण का खतरा भी काफी कम रहा और मरीज की रिकवरी भी पहले की तुलना में काफी तेज रही।

मरीज की हालत पूरी तरह स्थिर
डॉक्टरों के अनुसार उपचार के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ है। उसकी स्थिति सामान्य है और कुछ दिनों की निगरानी के बाद उसे अस्पताल से छुट्टी देने की तैयारी की जा रही है। डॉक्टरों का कहना है कि आधुनिक तकनीक के कारण मरीज जल्द ही सामान्य जीवन जी सकेगा।

विशेषज्ञों ने जताई खुशी
एम्स देवघर के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने बताया कि यह संस्थान के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। पहली बार इस तरह की जटिल जन्मजात हृदय बीमारी का इलाज बिना किसी बड़े ऑपरेशन के सफलतापूर्वक किया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि अब झारखंड और आसपास के राज्यों के मरीजों को ऐसे उपचार के लिए दिल्ली, कोलकाता या अन्य बड़े शहरों का रुख नहीं करना पड़ेगा। उन्हें यह सुविधा अब देवघर में ही उपलब्ध होगी।

झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि
एम्स देवघर लगातार आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं का विस्तार कर रहा है। नई तकनीकों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता से अब राज्य के मरीजों को उच्चस्तरीय इलाज अपने ही प्रदेश में मिलने लगा है। इस उपलब्धि से यह स्पष्ट हो गया है कि एम्स देवघर अब जटिल हृदय रोगों के इलाज में भी तेजी से अपनी पहचान बना रहा है। आने वाले समय में यहां और भी अत्याधुनिक कार्डियक प्रक्रियाएं शुरू होने की संभावना है।

मरीजों को मिलेगा सीधा लाभ
विशेषज्ञों का मानना है कि कैथेटर आधारित उपचार से मरीजों को कई फायदे मिलते हैं। इसमें अस्पताल में कम समय तक भर्ती रहना पड़ता है, शरीर पर बड़ा चीरा नहीं लगाया जाता, संक्रमण का खतरा कम रहता है और मरीज जल्दी स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौट सकता है। इसके अलावा इलाज का मानसिक तनाव भी कम होता है क्योंकि बड़े ऑपरेशन की आवश्यकता नहीं पड़ती।

स्वास्थ्य सेवाओं में नई उम्मीद
एम्स देवघर की यह सफलता पूरे झारखंड के लिए गर्व की बात है। इससे राज्य में सुपर स्पेशियलिटी स्वास्थ्य सेवाओं को नई पहचान मिलेगी और गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए मरीजों का भरोसा भी बढ़ेगा।
विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर जांच और सही उपचार से जन्मजात हृदय रोगों का सफल इलाज संभव है। इसलिए बच्चों में यदि सांस लेने में परेशानी, बार-बार निमोनिया, वजन नहीं बढ़ना या अत्यधिक थकान जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

एम्स देवघर की इस ऐतिहासिक उपलब्धि ने साबित कर दिया है कि आधुनिक तकनीक, प्रशिक्षित विशेषज्ञों और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के दम पर अब झारखंड भी देश के अग्रणी चिकित्सा केंद्रों की श्रेणी में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

