By: Mala Mandal
Somvati Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन जब अमावस्या सोमवार के दिन पड़ती है तो उसे सोमवती अमावस्या कहा जाता है। वर्ष 2026 में सोमवती अमावस्या 15 जून, सोमवार को मनाई जाएगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार यह दिन स्नान, दान, पितृ तर्पण और भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस बार अधिक मास के दौरान पड़ रही सोमवती अमावस्या का महत्व और भी बढ़ गया है, जिसके कारण श्रद्धालुओं के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना जा रहा है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का फल कई गुना अधिक प्राप्त हो सकता है। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या पर पवित्र नदी में स्नान, गरीबों को दान और पितरों का तर्पण करने से जीवन में सुख-समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का आगमन होता है।
सोमवती अमावस्या 2026 की तिथि और शुभ समय
पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि 14 जून की रात से प्रारंभ होकर 15 जून को दिनभर प्रभावी रहेगी। सोमवार के दिन अमावस्या पड़ने के कारण यह सोमवती अमावस्या कहलाएगी। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त से लेकर सूर्योदय के बाद तक स्नान और पूजा का विशेष महत्व माना गया है।

क्यों खास होती है सोमवती अमावस्या?
धार्मिक ग्रंथों में सोमवती अमावस्या को अत्यंत पुण्यदायी तिथि बताया गया है। सोमवार भगवान शिव को समर्पित माना जाता है और अमावस्या तिथि पितरों की शांति के लिए श्रेष्ठ मानी जाती है। जब ये दोनों संयोग एक साथ आते हैं तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करने से वैवाहिक जीवन में सुख-शांति बनी रहती है। वहीं पितरों के निमित्त किए गए तर्पण और दान-पुण्य से पितृ दोष कम होने की मान्यता भी है।
सोमवती अमावस्या पर स्नान-दान का महत्व
सनातन परंपरा में अमावस्या पर पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। यदि किसी तीर्थस्थल पर जाना संभव न हो तो घर में गंगाजल मिलाकर स्नान करना भी शुभ माना जाता है।

इस दिन निम्न वस्तुओं का दान विशेष फलदायी माना जाता है:
– अन्न और भोजन सामग्री
– वस्त्र
– तिल
– गुड़
– फल
– दक्षिणा
– जल से भरे पात्र
– जरूरतमंदों को भोजन
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार श्रद्धा भाव से किया गया दान व्यक्ति के जीवन में सुख और समृद्धि लाने वाला माना जाता है।

पितृ तर्पण का विशेष महत्व
सोमवती अमावस्या को पितरों की शांति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन पितरों के नाम से जल अर्पित करना, तिल तर्पण करना और ब्राह्मणों या जरूरतमंदों को भोजन कराना शुभ माना जाता है।
मान्यता है कि इससे पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में चल रही बाधाओं में कमी आ सकती है।
भगवान शिव की पूजा से मिलेगा विशेष लाभ
सोमवार भगवान शिव का प्रिय दिन माना जाता है। सोमवती अमावस्या के दिन शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा अर्पित करना शुभ माना जाता है। साथ ही महामृत्युंजय मंत्र और ॐ नमः शिवाय मंत्र का जाप करने से मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होने की मान्यता है।

सोमवती अमावस्या पर क्या करें?
– सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
– भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें।
– पितरों का तर्पण करें।
– जरूरतमंदों को दान दें।
– पीपल वृक्ष की पूजा करें।
– शिव मंत्रों का जाप करें।
– परिवार की सुख-समृद्धि के लिए प्रार्थना करें।

क्या न करें?
– किसी का अपमान न करें।
– झूठ और विवाद से बचें।
– तामसिक भोजन का सेवन न करें।
– नकारात्मक विचारों से दूर रहें।

धार्मिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण दिन
अधिक मास में पड़ रही सोमवती अमावस्या को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत शुभ माना जा रहा है। श्रद्धा और विश्वास के साथ किए गए स्नान, दान, तर्पण और पूजा-पाठ से आध्यात्मिक लाभ मिलने की मान्यता है। यही कारण है कि देशभर के मंदिरों और तीर्थस्थलों पर इस दिन श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखने को मिल सकती है।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पंचांग और ज्योतिषीय गणनाओं पर आधारित है। NewsBag किसी भी धार्मिक दावे की पूर्ण पुष्टि नहीं करता। किसी भी पूजा-पद्धति या धार्मिक अनुष्ठान के लिए योग्य विद्वान या विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।

