By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
नई दिल्ली। राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने NEET UG 2026 री-एग्जाम को पूरी तरह निष्पक्ष, पारदर्शी और नकलमुक्त बनाने के लिए अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था लागू करने का दावा किया है। पिछले वर्षों में पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठे सवालों के बाद इस बार एजेंसी ने तकनीक का व्यापक उपयोग करते हुए हाई-टेक निगरानी तंत्र तैयार किया है।

देशभर के लगभग 5,440 परीक्षा केंद्रों पर 1.38 लाख से अधिक CCTV कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा 51 हजार से ज्यादा जैमर तैनात किए गए हैं ताकि परीक्षा के दौरान किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक संचार को रोका जा सके। NTA का कहना है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित मॉनिटरिंग सिस्टम भी इस बार सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा होगा।
परीक्षा केंद्रों पर चौबीसों घंटे निगरानी
NTA के अनुसार परीक्षा केंद्रों पर लगाए गए CCTV कैमरे केवल रिकॉर्डिंग के लिए नहीं बल्कि रियल-टाइम मॉनिटरिंग के लिए भी उपयोग किए जाएंगे। कंट्रोल रूम से परीक्षा गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की पहचान होते ही तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी। परीक्षा केंद्रों के प्रवेश द्वार, परीक्षा कक्ष, गलियारे और संवेदनशील क्षेत्रों को कैमरों की निगरानी में रखा जाएगा। इससे परीक्षा प्रक्रिया की पारदर्शिता बढ़ेगी और बाद में किसी विवाद की स्थिति में रिकॉर्डिंग महत्वपूर्ण साक्ष्य का काम करेगी।

AI आधारित निगरानी क्या है?
इस बार NTA ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। AI आधारित सिस्टम परीक्षा केंद्रों से प्राप्त वीडियो फुटेज का विश्लेषण करेगा और असामान्य गतिविधियों की पहचान करेगा।

यदि किसी केंद्र पर अभ्यर्थियों या कर्मियों का व्यवहार संदिग्ध दिखाई देता है, बार-बार किसी विशेष स्थान पर गतिविधियां होती हैं या नकल की संभावना वाले पैटर्न सामने आते हैं तो सिस्टम स्वतः अलर्ट जारी कर सकता है। इससे मानवीय निगरानी की सीमाएं काफी हद तक कम हो जाएंगी। विशेषज्ञों का मानना है कि AI आधारित मॉनिटरिंग परीक्षा सुरक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम है, क्योंकि यह बड़ी मात्रा में डेटा का तेजी से विश्लेषण कर सकता है।
51 हजार से अधिक जैमर की भूमिका
परीक्षा के दौरान मोबाइल फोन, ब्लूटूथ डिवाइस, स्मार्ट वॉच और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के जरिए नकल की घटनाओं को रोकने के लिए हजारों जैमर लगाए गए हैं। जैमर मोबाइल नेटवर्क और वायरलेस संचार को बाधित करते हैं, जिससे परीक्षा केंद्रों के भीतर किसी भी प्रकार की बाहरी संपर्क व्यवस्था प्रभावित होती है। इससे प्रश्नपत्र लीक करने या उत्तर प्राप्त करने जैसी गतिविधियों पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। पिछले कुछ वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के माध्यम से परीक्षा में गड़बड़ी की घटनाएं सामने आई थीं। ऐसे में जैमर का व्यापक उपयोग सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

उम्मीदवारों की जांच होगी और सख्त
NTA ने परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों की जांच प्रक्रिया को भी पहले से अधिक सख्त बनाया है। प्रवेश से पहले पहचान पत्रों का सत्यापन, बायोमेट्रिक जांच और सुरक्षा जांच की जाएगी। अभ्यर्थियों को परीक्षा नियमों का पालन करना होगा और प्रतिबंधित वस्तुएं साथ लाने पर कार्रवाई की जा सकती है। एजेंसी ने छात्रों से समय से पहले केंद्र पहुंचने और दिशा-निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

क्या छात्रों पर बढ़ेगा मानसिक दबाव?
हालांकि सुरक्षा व्यवस्था को लेकर अधिकांश छात्र और अभिभावक संतुष्ट नजर आ रहे हैं, लेकिन कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि अत्यधिक निगरानी का छात्रों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव भी पड़ सकता है। परीक्षा केंद्रों पर कैमरों, जैमर और AI निगरानी की मौजूदगी कुछ छात्रों में अतिरिक्त तनाव पैदा कर सकती है। हालांकि शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था का उद्देश्य स्पष्ट रूप से बताया जाए और छात्रों को पहले से जागरूक किया जाए तो यह तनाव कम किया जा सकता है। उनका मानना है कि ईमानदार छात्रों को ऐसी व्यवस्था से डरने की आवश्यकता नहीं है क्योंकि इसका लक्ष्य केवल अनुचित साधनों को रोकना है।

निष्पक्ष परीक्षा की दिशा में बड़ा कदम
शिक्षा जगत के कई विशेषज्ञ NTA की इस पहल को सकारात्मक कदम मान रहे हैं। उनका कहना है कि देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा की विश्वसनीयता बनाए रखना बेहद आवश्यक है। यदि AI, CCTV और जैमर जैसी तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया जाता है तो इससे परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ेगी और छात्रों का भरोसा मजबूत होगा। साथ ही भविष्य में अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं में भी इसी तरह की तकनीकों का उपयोग बढ़ सकता है।

क्या पूरी तरह रुक जाएगी नकल?
विशेषज्ञों का मानना है कि कोई भी सुरक्षा व्यवस्था 100 प्रतिशत त्रुटिरहित नहीं हो सकती, लेकिन तकनीक आधारित निगरानी से नकल और पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना काफी हद तक कम की जा सकती है। AI विश्लेषण, CCTV रिकॉर्डिंग, जैमर, बायोमेट्रिक सत्यापन और प्रशासनिक सतर्कता को मिलाकर एक बहुस्तरीय सुरक्षा ढांचा तैयार किया गया है। इससे परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

NEET UG 2026 री-एग्जाम के लिए NTA द्वारा लागू की गई हाई-टेक सुरक्षा व्यवस्था देश की परीक्षा प्रणाली में एक बड़े बदलाव का संकेत देती है। 1.38 लाख CCTV कैमरे, 51 हजार से अधिक जैमर और AI आधारित निगरानी व्यवस्था परीक्षा को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाने का प्रयास है।
हालांकि इस व्यवस्था की वास्तविक सफलता परीक्षा के सफल संचालन और तकनीकी प्रणालियों की प्रभावशीलता पर निर्भर करेगी। यदि यह मॉडल सफल रहता है तो आने वाले समय में भारत की अन्य प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाओं में भी इसी तरह की उन्नत सुरक्षा व्यवस्था देखने को मिल सकती है।

