By: Mala Mandal
देवघर: श्रावणी मेला शुरू होने में अब लगभग एक माह का समय शेष है, लेकिन उससे पहले बाबा बैद्यनाथ मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर विवाद गहराता नजर आ रहा है। रविवार को बाबा मंदिर के सिंह द्वार स्थित पंडा धर्म रक्षिणी सभा के मुख्य कार्यालय सभागार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सभा के पदाधिकारियों ने जिला प्रशासन और मंदिर प्रशासन की कार्यशैली पर कई गंभीर सवाल उठाए।

प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए सभा के अध्यक्ष डॉ. सुरेश भारद्वाज, महामंत्री निर्मल कुमार झा तथा पूजा पद्धति के विद्वान पंडित चिंतामणि कर्म्हे ने संयुक्त रूप से मंदिर संचालन, पूजा व्यवस्था, कूपन प्रणाली, कथित वीआईपी प्रवेश, निकास द्वार चौड़ीकरण और श्राइन बोर्ड की कार्यप्रणाली पर अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं।

सभा अध्यक्ष डॉ. सुरेश भारद्वाज ने कहा कि हाल ही में आयोजित सभा की बैठक में यह निष्कर्ष निकला कि बीते दो से तीन महीनों में जिला प्रशासन और मंदिर प्रशासन मंदिर व्यवस्था को सुचारू रूप से संचालित करने में सफल नहीं रहा है। उन्होंने दावा किया कि शनिवार को कूपनधारियों की कतार आजाद चौक से आगे शीतला मंदिर तक पहुंच गई थी, जिससे श्रद्धालुओं को काफी परेशानी उठानी पड़ी।

उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर प्रशासनिक भवन के ऊपरी तल से कुछ कर्मचारियों द्वारा पैसे लेकर हजारों श्रद्धालुओं को मंदिर में प्रवेश कराया गया। उनके अनुसार इस व्यवस्था के कारण सामान्य श्रद्धालुओं को लंबे समय तक प्रतीक्षा करनी पड़ी और दर्शन व्यवस्था प्रभावित हुई। हालांकि इन आरोपों पर प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

डॉ. भारद्वाज ने बिना नाम लिए नवपदस्थापित उपायुक्त पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि नए प्रशासनिक अधिकारियों को मंदिर की परंपराओं और व्यवस्थाओं की गहराई से जानकारी होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पुरोहित समाज वर्षों से मंदिर की पूजा पद्धति और धार्मिक प्रक्रियाओं को संचालित करता आया है, लेकिन प्रशासन ने अब तक सभा के साथ अपेक्षित संवाद स्थापित नहीं किया।

उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग करते हुए कहा कि श्रावणी मेले से पहले जल्द से जल्द श्राइन बोर्ड की बैठक बुलाई जानी चाहिए ताकि व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा सके। साथ ही उन्होंने हर दो माह पर नियमित रूप से बोर्ड बैठक आयोजित करने की मांग की। उनका कहना था कि मंदिर से जुड़े बड़े निर्णय सामूहिक चर्चा और नीति निर्धारण के आधार पर लिए जाने चाहिए।

सभा अध्यक्ष ने यह भी कहा कि पूर्व में जिन उपायुक्तों और पुलिस अधीक्षकों ने पंडा धर्म रक्षिणी सभा के साथ समन्वय बनाकर मेले का संचालन किया, वहां व्यवस्थाएं बेहतर रही थीं। उन्होंने कहा कि पुरोहित समाज को नजरअंदाज कर मंदिर संचालन प्रभावी तरीके से नहीं किया जा सकता।
निकास द्वार के चौड़ीकरण के मुद्दे पर भी सभा ने कड़ा विरोध जताया। डॉ. सुरेश भारद्वाज ने कहा कि निकास द्वार के समीप नंदी विराजमान हैं और बाबा मंदिर की पूजा पद्धति तांत्रिक परंपरा पर आधारित है। ऐसे में किसी भी प्रकार का संरचनात्मक परिवर्तन धार्मिक परंपराओं और पूजा विधान को प्रभावित कर सकता है।

उन्होंने आरोप लगाया कि मंदिर से जुड़े कई कार्य बिना सभा की सहमति के किए गए हैं, जबकि ऐसे विषयों पर अंतिम निर्णय श्राइन बोर्ड की बैठक में होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि बोर्ड का कार्य नीति निर्धारण करना है और प्रशासन का दायित्व उन निर्णयों को लागू करना है।

वहीं पूजा पद्धति के विद्वान पंडित चिंतामणि कर्म्हे ने भी निकास द्वार चौड़ीकरण का विरोध करते हुए कहा कि प्रस्तावित बदलाव से हवन स्थल प्रभावित हो सकता है। उनके अनुसार यह कदम बाबा मंदिर की प्राचीन धार्मिक परंपराओं और पूजा-विधान के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था और परंपरा से जुड़े किसी भी निर्णय से पहले पुरोहित समाज की राय लेना आवश्यक होना चाहिए।
प्रेस वार्ता में सभा के वरीय उपाध्यक्ष चंद्रशेखर खवाड़े, संजय मिश्रा समेत कई सदस्य उपस्थित रहे। अब देखना होगा कि श्रावणी मेले से पहले प्रशासन और पंडा समाज के बीच समन्वय स्थापित होता है या यह विवाद आगे और बढ़ता है।

