By: Mala Mandal
असम और अरुणाचल प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। पूर्वोत्तर भारत के कई जिलों में बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं ने भारी तबाही मचाई है। असम में तेज बहाव के कारण लगभग 300 मीटर लंबा लोहे का पुल नदी में बह गया, जबकि एक महत्वपूर्ण रेलवे पुल भी क्षतिग्रस्त हो गया। दूसरी ओर अरुणाचल प्रदेश में बाढ़ और भूस्खलन की अलग-अलग घटनाओं में तीन लोगों की मौत हो गई है। प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य तेज कर दिए हैं और प्रभावित इलाकों में हाई अलर्ट जारी कर दिया गया है।

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे आसपास के गांवों में पानी भर गया है। हजारों लोग अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हुए हैं। राज्य सरकारों ने राहत शिविर स्थापित किए हैं, जहां प्रभावित परिवारों को भोजन, पीने का पानी और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं।

असम में जिस लोहे के पुल के बहने की घटना सामने आई है, वह स्थानीय लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग था। पुल बह जाने से कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़क से पूरी तरह टूट गया है। प्रशासन ने लोगों से क्षतिग्रस्त पुल के आसपास जाने से बचने की अपील की है। वहीं रेलवे पुल को हुए नुकसान के कारण कई ट्रेनों के संचालन पर भी असर पड़ा है। रेलवे विभाग ने तकनीकी टीमों को मौके पर भेज दिया है और मरम्मत का कार्य शुरू कर दिया गया है।

अरुणाचल प्रदेश में भारी बारिश के कारण कई स्थानों पर भूस्खलन हुआ है। पहाड़ी इलाकों में सड़कें बंद हो गई हैं, जिससे यातायात बाधित हो गया है। कई गांवों तक राहत सामग्री पहुंचाने में कठिनाई हो रही है। अधिकारियों के अनुसार बाढ़ और भूस्खलन से तीन लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि कुछ लोगों के लापता होने की भी सूचना है। बचाव दल लगातार खोज अभियान चला रहे हैं।

मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों तक पूर्वोत्तर भारत में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई है। इसके मद्देनजर असम, अरुणाचल प्रदेश और आसपास के राज्यों में ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया गया है। लोगों को नदी किनारे जाने से बचने, अनावश्यक यात्रा न करने और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की सलाह दी गई है।

राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) और स्थानीय प्रशासन संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव कार्यों में जुटे हुए हैं। नावों की मदद से फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। मेडिकल टीमों को भी प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया है ताकि किसी भी स्वास्थ्य संबंधी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्वोत्तर भारत में मानसून के दौरान अत्यधिक वर्षा सामान्य बात है, लेकिन इस बार लगातार हो रही तेज बारिश और नदियों में अचानक बढ़े जलस्तर ने हालात को गंभीर बना दिया है। जलवायु परिवर्तन के प्रभाव के कारण ऐसी चरम मौसम घटनाओं की आवृत्ति और तीव्रता बढ़ने की आशंका भी विशेषज्ञ जता रहे हैं।
स्थानीय प्रशासन ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान न देने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। साथ ही प्रभावित इलाकों में स्कूलों को अस्थायी रूप से बंद किया गया है और कई स्थानों पर बिजली आपूर्ति भी सुरक्षा कारणों से रोक दी गई है।

केंद्र सरकार ने भी स्थिति पर नजर बनाए रखी है और जरूरत पड़ने पर हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। राहत सामग्री, दवाइयां और आवश्यक संसाधन प्रभावित क्षेत्रों में भेजे जा रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि प्राथमिकता लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और जल्द से जल्द सामान्य स्थिति बहाल करना है।

फिलहाल पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में बारिश का सिलसिला जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है। प्रशासन लगातार हालात की निगरानी कर रहा है और लोगों से सतर्क रहने की अपील कर रहा है। मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने और किसी भी आपात स्थिति में स्थानीय प्रशासन से तुरंत संपर्क करने की सलाह दी गई है।

