By: Mala Mandal
बारिश का मौसम गर्मी से राहत जरूर देता है, लेकिन इस मौसम में त्वचा से जुड़ी कई परेशानियां भी बढ़ सकती हैं। लगातार बारिश के कारण वातावरण में नमी बढ़ जाती है और उमस की वजह से शरीर पर पसीना ज्यादा आता है। पसीना और नमी लंबे समय तक त्वचा पर बने रहने से खुजली, लाल चकत्ते, जलन, छोटे-छोटे दाने और फंगल इंफेक्शन जैसी समस्याएं परेशान कर सकती हैं। खासकर जिन लोगों की त्वचा संवेदनशील है या जिन्हें पहले से एलर्जी और फंगल इंफेक्शन की समस्या होती है, उन्हें मानसून के दौरान अपनी स्किन की देखभाल को लेकर ज्यादा सावधान रहने की जरूरत होती है।

बारिश के मौसम में खुजली बढ़ने की सबसे बड़ी वजह क्या है?
मानसून के दौरान हवा में नमी काफी बढ़ जाती है। इससे त्वचा लंबे समय तक नम रह सकती है। जब पसीना भी इसके साथ मिल जाता है, तो त्वचा पर बैक्टीरिया और फंगस के बढ़ने के लिए अनुकूल वातावरण बन सकता है। शरीर के जिन हिस्सों में ज्यादा पसीना आता है, जैसे गर्दन, बगल, जांघों के बीच, कमर और पैरों के आसपास, वहां खुजली और लालिमा की समस्या ज्यादा देखने को मिल सकती है। इसके अलावा गीले कपड़े लंबे समय तक पहनना, बारिश में भीगने के बाद शरीर को ठीक से न सुखाना और बहुत ज्यादा पसीना आने के बावजूद कपड़े न बदलना भी त्वचा की परेशानी बढ़ा सकता है।

गीले कपड़े पहनकर ज्यादा देर रहना पड़ सकता है भारी
बारिश में अक्सर कपड़े भीग जाते हैं और कई लोग उन्हें लंबे समय तक बदलते नहीं हैं। गीले कपड़े त्वचा से चिपके रहते हैं और लगातार नमी बनी रहती है। इससे त्वचा में जलन और खुजली हो सकती है तथा कुछ मामलों में फंगल इंफेक्शन का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए बारिश में भीगने के बाद जितनी जल्दी संभव हो, गीले कपड़े बदलें और शरीर को अच्छी तरह सुखाएं।

पसीने को नजरअंदाज करना भी हो सकता है नुकसानदायक
मानसून में तापमान थोड़ा कम होने के बावजूद उमस के कारण पसीना काफी आ सकता है। पसीना त्वचा पर लंबे समय तक जमा रहने से जलन और खुजली हो सकती है। अगर आप लंबे समय तक बाहर रहते हैं या शारीरिक मेहनत करते हैं, तो साफ पानी से शरीर को धोकर अच्छी तरह सुखाना और साफ कपड़े पहनना फायदेमंद हो सकता है।

बहुत गर्म पानी से न नहाएं
खुजली होने पर कुछ लोगों को लगता है कि गर्म पानी से नहाने से राहत मिलेगी। लेकिन बहुत गर्म पानी त्वचा की प्राकृतिक नमी और सुरक्षा परत को नुकसान पहुंचा सकता है, जिससे त्वचा और ज्यादा सूखी तथा संवेदनशील हो सकती है। नहाने के लिए सामान्य या हल्के गुनगुने पानी का इस्तेमाल करें और बहुत देर तक पानी में रहने से बचें।

जरूरत से ज्यादा साबुन इस्तेमाल न करें
बार-बार साबुन लगाने या बहुत ज्यादा स्ट्रॉन्ग साबुन का इस्तेमाल करने से त्वचा रूखी हो सकती है। इससे खुजली और जलन बढ़ सकती है। त्वचा की जरूरत के अनुसार हल्का क्लींजर या साबुन इस्तेमाल करना बेहतर हो सकता है। खासकर संवेदनशील त्वचा वाले लोगों को नए प्रोडक्ट का इस्तेमाल सोच-समझकर करना चाहिए।

खुजली वाली जगह को बार-बार न खुजलाएं
खुजली होने पर बार-बार त्वचा खुजलाने से थोड़ी देर के लिए राहत मिल सकती है, लेकिन इससे त्वचा पर खरोंच पड़ सकती है। ज्यादा खुजलाने से त्वचा में घाव बनने और संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है। अगर खुजली लगातार बनी हुई है तो केवल खुजलाने के बजाय उसकी वजह जानना ज्यादा जरूरी है।

तौलिया और कपड़े साफ रखें
मानसून में तौलिया, कपड़े और बिस्तर की नमी पर विशेष ध्यान देना चाहिए। गीले तौलिये को लंबे समय तक इस्तेमाल करने से बचें और उसे अच्छी तरह सुखाकर ही दोबारा इस्तेमाल करें। कपड़े धोने के बाद उन्हें पूरी तरह सुखाना भी जरूरी है। नमी वाले कपड़ों और तौलियों को लंबे समय तक बंद जगह में रखने से बचें।
जूते और मोजे भी बन सकते हैं खुजली की वजह
बारिश में पैरों का लंबे समय तक गीला रहना भी त्वचा के लिए परेशानी पैदा कर सकता है। गीले मोजे पहनकर घंटों रहने से पैरों में नमी बनी रहती है, जिससे फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। बारिश में पैरों के गीले होने पर मोजे बदलें और पैरों को अच्छी तरह सुखाएं। जूतों को भी पूरी तरह सूखने दें।

मॉइस्चराइजर लगाना न भूलें
बारिश के मौसम में भी त्वचा को मॉइस्चराइजर की जरूरत हो सकती है। खासकर नहाने के बाद त्वचा को हल्के हाथ से सुखाकर उपयुक्त मॉइस्चराइजर लगाया जा सकता है। अगर आपकी त्वचा बहुत ऑयली या मुंहासे वाली है, तो हल्का और नॉन-कॉमेडोजेनिक मॉइस्चराइजर चुनना बेहतर हो सकता है।
कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?
अगर खुजली कुछ दिनों में ठीक नहीं होती, तेजी से बढ़ रही है या उसके साथ लाल चकत्ते, घाव, पानी वाले दाने, सूजन या त्वचा पर फैलता हुआ संक्रमण दिखाई दे रहा है, तो त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लेना बेहतर है।
विशेष रूप से अगर घर के अन्य लोगों को भी इसी तरह खुजली हो रही है या रात में खुजली बहुत ज्यादा बढ़ती है, तो इसका कारण अलग हो सकता है और उचित जांच की जरूरत पड़ सकती है।

मानसून में स्किन को हेल्दी रखने के आसान तरीके
बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़े तुरंत बदलें।
त्वचा को साफ रखने के साथ उसे अच्छी तरह सुखाएं।
पसीना आने पर कपड़े बदलें और त्वचा को सूखा रखें।
तौलिया और कपड़े किसी के साथ साझा न करें।
गीले मोजे और जूते लंबे समय तक न पहनें।
बहुत गर्म पानी से न नहाएं।
त्वचा पर जरूरत से ज्यादा साबुन या स्क्रब का इस्तेमाल न करें।
खुजली वाली जगह को बार-बार खुजलाने से बचें।
त्वचा की जरूरत के अनुसार मॉइस्चराइजर का इस्तेमाल करें।

बारिश में खुजली को हल्के में न लें
मानसून में खुजली होना हमेशा सिर्फ मौसम की वजह से नहीं होता। नमी और पसीने के अलावा एलर्जी, फंगल इंफेक्शन, एक्जिमा, कीड़े के काटने या त्वचा की दूसरी समस्याएं भी इसका कारण हो सकती हैं। इसलिए अगर खुजली लगातार बनी हुई है या त्वचा पर असामान्य बदलाव नजर आ रहे हैं, तो खुद से कोई तेज दवा या स्टेरॉयड क्रीम लगाने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य और त्वचा देखभाल संबंधी जानकारी के उद्देश्य से है। खुजली के कई अलग-अलग कारण हो सकते हैं और केवल लक्षणों के आधार पर किसी बीमारी का निश्चित निदान नहीं किया जा सकता। लगातार या गंभीर खुजली, चकत्ते, सूजन, घाव या संक्रमण के लक्षण होने पर योग्य डॉक्टर या त्वचा रोग विशेषज्ञ से सलाह लें। किसी भी दवा या क्रीम का इस्तेमाल चिकित्सकीय सलाह के बिना न करें।

