By: Mala Mandal
देवघर, अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी प्रकरण को लेकर देवघर में बुधवार को ऋषि ब्रह्मर्षि सांस्कृतिक मंच की ओर से विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर स्थित श्रीराम मंदिर में “क्षमा याचना हवन” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान मंच के महासचिव मणिशंकर ने प्रधानमंत्री से अयोध्या जाकर भगवान श्रीराम के समक्ष क्षमा याचना करने की मांग करते हुए मंदिर व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की आवश्यकता पर जोर दिया।

मणिशंकर ने कहा कि 22 जनवरी 2024 को प्रधानमंत्री द्वारा भगवान श्रीराम की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न कराई गई थी और देश-विदेश के करोड़ों श्रद्धालुओं ने राम मंदिर निर्माण के लिए श्रद्धापूर्वक दान दिया था। उन्होंने दावा किया कि चढ़ावा चोरी की घटनाओं से करोड़ों सनातनियों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और उनकी आस्था को ठेस पहुंची है। उन्होंने कहा कि यदि मंदिर व्यवस्था में किसी प्रकार की त्रुटि या कमी हुई है तो उसे स्वीकार करते हुए संबंधित पक्षों को भगवान श्रीराम के समक्ष क्षमा याचना करनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि सनातन धर्म की परंपरा के अनुसार किसी भी धार्मिक अनुष्ठान या कार्य में यदि कोई त्रुटि, बाधा या कमी रह जाती है तो उसके अंत में क्षमा याचना की जाती है। यही कारण है कि देवघर के श्रीराम मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ क्षमा याचना हवन आयोजित किया गया, ताकि भगवान श्रीराम से सामूहिक रूप से क्षमा मांगी जा सके।

मणिशंकर ने कहा कि भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं और उनके नाम पर बने मंदिर की व्यवस्था पर यदि किसी प्रकार का प्रश्न उठता है तो यह प्रत्येक सनातनी के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि यदि मंदिर के कोष से करोड़ों रुपये की कथित अनियमितता या चोरी हुई है तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन 5 फरवरी 2020 को किया गया था और इसमें 15 सदस्यों की नियुक्ति प्रधानमंत्री कार्यालय के माध्यम से हुई थी। उनका कहना था कि मंदिर परिसर में व्यापक सुरक्षा व्यवस्था और सीसीटीवी कैमरे लगे होने के बावजूद यदि चोरी की घटना सामने आई है तो इसकी गहन जांच आवश्यक है। उन्होंने मांग की कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच उच्चतम न्यायालय की निगरानी में कराई जाए, ताकि देश के श्रद्धालुओं का विश्वास बना रहे।

कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने कहा कि धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं द्वारा मंदिरों में श्रद्धा और विश्वास के साथ चढ़ावा अर्पित किया जाता है, इसलिए उसकी सुरक्षा और सही उपयोग सुनिश्चित करना संबंधित प्रबंधन की जिम्मेदारी है।
क्षमा याचना हवन का आयोजन वैदिक विधि-विधान के साथ किया गया। आचार्य लंबोदर परिहस्त एवं देवनारायण फलाहारी ने वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन संपन्न कराया। कार्यक्रम में पंडा धर्मरक्षणी की ओर से भी सहयोग प्रदान किया गया।

आयोजकों ने बताया कि इस हवन में समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने भाग लिया। दलित, पिछड़ा वर्ग, आदिवासी, सामान्य वर्ग सहित विभिन्न समुदायों के लोगों ने एक साथ बैठकर भगवान श्रीराम से क्षमा याचना की और धार्मिक व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने की प्रार्थना की।

कार्यक्रम में प्रमुख रूप से मणिशंकर, राजेंद्र दास, प्रोफेसर उदय प्रकाश, बृजभूषण राम, अनुराग आनंद, कुमार बाबा, पंकज भारती, अनिल चंद्रवंशी, सुबोध दास, अमरिंदर भोपाल, निर्णय कुमार, मणिकांत कुमार सहित कई श्रद्धालु एवं सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

गौरतलब है कि यह आयोजन आयोजकों द्वारा अयोध्या राम मंदिर से जुड़े कथित चढ़ावा चोरी मामले पर अपनी प्रतिक्रिया के रूप में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान वक्ताओं ने धार्मिक संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और श्रद्धालुओं के विश्वास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की आवश्यकता पर बल दिया।

