By: Mala Mandal
देवघर सदर अस्पताल में वेतन एवं अन्य देय लाभों के भुगतान में लगातार हो रही देरी को लेकर बुधवार को एक अनोखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। अस्पताल में कार्यरत फार्मासिस्ट संजीव कुमार ने पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत सरकारी कार्य समाप्त होने के बाद अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ धरना शुरू कर दिया। अपराह्न करीब तीन बजे वह उपाधीक्षक (डीएस) डॉ. सुषमा वर्मा के चेंबर के सामने बैठ गए और अपनी लंबित मांगों के समाधान तक आंदोलन जारी रखने की घोषणा कर दी। धरने की सूचना मिलते ही अस्पताल परिसर में स्वास्थ्यकर्मियों और कर्मचारियों की भीड़ जुट गई, जिससे कुछ समय के लिए माहौल तनावपूर्ण हो गया।

फार्मासिस्ट संजीव कुमार ने आरोप लगाया कि लंबे समय से उनके वेतन, 4200 ग्रेड पे के आधार पर संशोधित वेतनमान और अन्य वित्तीय लाभों का भुगतान लंबित है। उन्होंने कहा कि विभागीय स्तर पर आवश्यक आदेश और आवंटन उपलब्ध होने के बावजूद भुगतान की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ाई जा रही है। इस कारण उन्हें आर्थिक और मानसिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

संजीव कुमार ने बताया कि उन्होंने कई बार अस्पताल प्रशासन को लिखित आवेदन देकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया, लेकिन हर बार केवल आश्वासन मिला। समस्या का समाधान नहीं होने के कारण आखिरकार उन्हें लोकतांत्रिक तरीके से धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों को समय पर वेतन और अन्य वैधानिक लाभ मिलना उनका अधिकार है, जिसे अनावश्यक रूप से रोका नहीं जाना चाहिए।

धरने की जानकारी मिलते ही उपाधीक्षक डॉ. सुषमा वर्मा अपने चेंबर से बाहर आईं और संजीव कुमार से बातचीत की। उन्होंने पहले धरना समाप्त करने का अनुरोध किया, लेकिन फार्मासिस्ट अपनी मांगों पर अड़े रहे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच विस्तार से बातचीत हुई, जिसमें लंबित भुगतान और प्रशासनिक प्रक्रिया पर चर्चा की गई।
वार्ता के दौरान उपाधीक्षक ने भरोसा दिलाया कि मामले को गंभीरता से लेते हुए सिविल सर्जन से आवश्यक आदेश प्राप्त किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि दो दिनों के भीतर लंबित मामलों के निष्पादन की प्रक्रिया पूरी कराने का हर संभव प्रयास किया जाएगा। साथ ही भुगतान संबंधी प्रक्रिया में तेजी लाकर कर्मचारियों की समस्याओं का समाधान किया जाएगा।

डीएस की ओर से मिले लिखित एवं मौखिक आश्वासन के बाद करीब एक घंटे तक चला धरना स्थगित कर दिया गया। संजीव कुमार ने कहा कि फिलहाल अस्पताल प्रशासन को दो दिनों का समय दिया जा रहा है। यदि तय समय सीमा के भीतर उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती है तो वे दोबारा आंदोलन शुरू करेंगे और इस बार आंदोलन का स्वरूप और व्यापक हो सकता है।
फार्मासिस्ट ने बताया कि उन्होंने धरने से पहले उपाधीक्षक को लिखित आवेदन देकर एक सप्ताह के भीतर बकाया वेतन और अन्य देय लाभों के भुगतान की मांग की थी। इस आवेदन की प्रतिलिपि सिविल सर्जन, उपायुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा नगर थाना प्रभारी को भी भेजी गई थी ताकि संबंधित अधिकारी मामले से अवगत रहें और समय पर कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

इस पूरे मामले में झारखंड चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य कर्मचारी संघ भी सक्रिय नजर आया। संघ के जिलाध्यक्ष मनोज कुमार मिश्र ने कहा कि कर्मचारियों की जायज मांगों की अनदेखी नहीं होनी चाहिए। यदि निर्धारित समय के भीतर भुगतान नहीं किया जाता है और फार्मासिस्ट को दोबारा आंदोलन करना पड़ता है, तो कर्मचारी संघ उनके समर्थन में पूरी मजबूती के साथ खड़ा रहेगा। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठन हर स्तर पर संघर्ष करेगा।

धरने के दौरान अस्पताल में मौजूद कई कर्मचारियों ने भी समय पर वेतन भुगतान की आवश्यकता पर जोर दिया। उनका कहना था कि नियमित वेतन और देय लाभ कर्मचारियों का कानूनी अधिकार है। भुगतान में लगातार देरी होने से कर्मचारियों की पारिवारिक और आर्थिक स्थिति प्रभावित होती है, जिसका असर उनके कार्य निष्पादन पर भी पड़ सकता है।

हालांकि अस्पताल प्रशासन का कहना है कि मामले के समाधान की दिशा में सकारात्मक पहल शुरू कर दी गई है। प्रशासन ने कर्मचारियों से संयम बनाए रखने की अपील करते हुए आश्वासन दिया है कि नियमानुसार सभी लंबित मामलों का निष्पादन किया जाएगा। अब सभी की निगाहें अगले दो दिनों पर टिकी हैं। यदि प्रशासन अपने आश्वासन के अनुरूप कार्रवाई करता है तो विवाद समाप्त हो सकता है, अन्यथा सदर अस्पताल में एक बार फिर आंदोलन की स्थिति बनने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

यह घटनाक्रम सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में कर्मचारियों के लंबित वित्तीय मामलों को समय पर निपटाने की आवश्यकता को भी उजागर करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि कर्मचारियों की समस्याओं का समय पर समाधान होने से न केवल कार्य संस्कृति बेहतर होती है, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। फिलहाल प्रशासन और कर्मचारी दोनों की ओर से समाधान की उम्मीद जताई जा रही है।

