By: Mala Mandal
देवघर। विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ मंदिर में श्रद्धालुओं की अटूट आस्था एक बार फिर देखने को मिली। शुक्रवार को बाबा मंदिर प्रशासन द्वारा मंदिर परिसर में स्थापित विकास कोष (दान पेटियों) को खोला गया। करीब दो महीने बाद खोले गए इन विकास कोषों से कुल 17 लाख 67 हजार 86 रुपये की राशि प्राप्त हुई। इसके अलावा दान पात्र से विदेशी मुद्रा भी मिली, जो देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमाण है।
शुक्रवार को यह पूरी प्रक्रिया बाबा मंदिर प्रभारी सह अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) रवि कुमार के निर्देश पर संपन्न हुई। बाबा मंदिर मजिस्ट्रेट राहुल कुमार की देखरेख में मंदिर परिसर में लगे सभी 18 विकास कोष खोले गए। विकास कोष खोलने के बाद उसमें जमा नोट और सिक्कों को बाहर निकाला गया। बड़ी मात्रा में नकदी मिलने के कारण राशि की गिनती में कई घंटे का समय लगा।

सुबह लगभग 10 बजे से शुरू हुई गिनती का कार्य शाम 5:30 बजे तक लगातार चलता रहा। मंदिर प्रशासन ने इस कार्य में कई मंदिर कर्मियों को लगाया, ताकि राशि की गिनती पूरी पारदर्शिता और सावधानी के साथ की जा सके। नोटों के साथ बड़ी संख्या में सिक्के भी विकास कोष में मिले, जिसके कारण गिनती की प्रक्रिया अपेक्षाकृत लंबी चली।

गणना पूरी होने के बाद मंदिर प्रशासन ने बताया कि 18 विकास कोषों से कुल 17 लाख 67 हजार 86 रुपये की आमदनी हुई है। यह राशि बाबा मंदिर के विकास कार्यों, श्रद्धालुओं की सुविधाओं और मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने में उपयोग की जाएगी। बाबा मंदिर विकास कोष में श्रद्धालुओं द्वारा स्वेच्छा से किया गया दान मंदिर प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण आय का स्रोत माना जाता है।

इस दौरान दान पात्र से भारतीय मुद्रा के अलावा विदेशी मुद्रा भी प्राप्त हुई। प्रशासन के अनुसार दान पात्र से 21 अमेरिकी डॉलर, 17 ब्राजीलियन रियल तथा 1630 नेपाली रुपये मिले। विदेशी मुद्रा का मिलना इस बात का संकेत है कि बाबा बैद्यनाथ धाम में देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं।

बाबा बैद्यनाथ धाम देश के प्रमुख बारह ज्योतिर्लिंगों में शामिल है। यहां वर्षभर लाखों श्रद्धालु भगवान भोलेनाथ के दर्शन के लिए आते हैं, जबकि श्रावणी मेला, शिवरात्रि, सावन और अन्य धार्मिक अवसरों पर श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और आस्था के अनुसार विकास कोष और दान पात्र में आर्थिक सहयोग करते हैं। यही दान मंदिर की विभिन्न व्यवस्थाओं और विकास कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मंदिर प्रशासन समय-समय पर विकास कोषों को खोलकर उसमें जमा राशि की गिनती करता है। पूरी प्रक्रिया प्रशासनिक अधिकारियों की निगरानी में संपन्न कराई जाती है, जिससे पारदर्शिता बनी रहे और प्रत्येक राशि का सही हिसाब रखा जा सके। इस बार भी गिनती के दौरान सभी आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रियाओं का पालन किया गया।

मंदिर प्रशासन का कहना है कि विकास कोष में जमा होने वाली राशि का उपयोग श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने, मंदिर परिसर की साफ-सफाई, रखरखाव, सुरक्षा व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक विकास कार्यों में किया जाता है। इसके अलावा धार्मिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर भी इन निधियों का उपयोग मंदिर की व्यवस्थाओं को सुदृढ़ बनाने में किया जाता है।

गिनती के दौरान मंदिर प्रशासन के कई अधिकारी और कर्मी मौजूद रहे। इस मौके पर राज नारायण श्रृंगारी, शशि मिश्र, रमेश कुमार मिश्र, प्रदीप झा, संजय मिश्र, संबोध कुमार, संतोष पांडेय, उपेंद्र तथा भोला भंडारी सहित अन्य मंदिर कर्मियों ने पूरी प्रक्रिया में सहयोग किया।

बाबा बैद्यनाथ धाम में हर वर्ष करोड़ों रुपये का दान प्राप्त होता है। यह दान केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि भगवान भोलेनाथ के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और विश्वास का प्रतीक माना जाता है। शुक्रवार को विकास कोष से प्राप्त 17.67 लाख रुपये की राशि भी इसी आस्था का प्रमाण है। मंदिर प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया को शांतिपूर्ण, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराया तथा प्राप्त राशि को नियमानुसार मंदिर कोष में जमा करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।यह स्क्रिप्ट प्रिंट मीडिया और न्यूज़ वेबसाइट दोनों के लिए SEO-अनुकूल है तथा इसमें “बाबा बैद्यनाथ मंदिर”, “देवघर”, “विकास कोष”, “दान”, “विदेशी मुद्रा” जैसे प्रमुख कीवर्ड स्वाभाविक रूप से शामिल किए गए हैं।

