By: Mala Mandal
रांची। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद देश की राजनीति में नए समीकरण बनने शुरू हो गए हैं। इस घटनाक्रम के बीच झारखंड की राजनीति भी गरमा गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग तेज कर दी है। भाजपा नेताओं का कहना है कि यदि नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय मंत्री ने पद छोड़ा है तो झारखंड सरकार को भी विभिन्न मुद्दों पर जवाबदेही तय करनी चाहिए और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी नैतिक आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।

राज्य में भाजपा नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान कहा कि सरकार कई महत्वपूर्ण मामलों में जनता का विश्वास खो चुकी है। उनका आरोप है कि राज्य में कानून-व्यवस्था, भर्ती परीक्षाओं, प्रशासनिक पारदर्शिता और विकास कार्यों को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में मुख्यमंत्री को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा देना चाहिए।

भाजपा नेताओं ने कहा कि लोकतंत्र में जवाबदेही सर्वोपरि होती है। यदि किसी मामले में मंत्री या सरकार की भूमिका पर सवाल उठते हैं तो नैतिकता के आधार पर पद छोड़ना लोकतांत्रिक परंपरा का हिस्सा माना जाता है। इसी आधार पर उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से भी इस्तीफा देने की मांग की।

दूसरी ओर झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) और सत्तारूढ़ गठबंधन ने भाजपा के आरोपों को राजनीतिक बताया है। गठबंधन नेताओं का कहना है कि भाजपा केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए इस मुद्दे को उछाल रही है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन जनता के जनादेश से चुने गए हैं और सरकार पूरी मजबूती के साथ अपना कार्यकाल पूरा करेगी।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद विपक्ष इस मुद्दे को विभिन्न राज्यों में राजनीतिक हथियार के रूप में इस्तेमाल करने की कोशिश करेगा। झारखंड में विधानसभा चुनावों और आगामी राजनीतिक गतिविधियों को देखते हुए भाजपा इस मुद्दे को जनता के बीच प्रमुखता से उठाने की तैयारी में है।

इधर भाजपा कार्यकर्ताओं ने कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन भी किए और मुख्यमंत्री से इस्तीफे की मांग दोहराई। पार्टी का कहना है कि राज्य सरकार को जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए। वहीं सत्तापक्ष का कहना है कि भाजपा के पास जनहित के मुद्दे नहीं हैं, इसलिए वह केवल राजनीतिक बयानबाजी कर रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार आने वाले दिनों में यह मुद्दा और अधिक गरमा सकता है। यदि भाजपा राज्यव्यापी आंदोलन चलाती है तो झारखंड की राजनीति में इसका असर देखने को मिल सकता है। वहीं सत्तारूढ़ गठबंधन भी भाजपा के आरोपों का जवाब देने के लिए रणनीति तैयार कर रहा है।

फिलहाल भाजपा की ओर से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के इस्तीफे की मांग ने राज्य की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर इस बात पर रहेगी कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर दोनों पक्ष किस तरह की राजनीतिक रणनीति अपनाते हैं और इसका राज्य की राजनीति पर क्या प्रभाव पड़ता है।

हालांकि, यह ध्यान देने योग्य है कि किसी भी इस्तीफे की मांग एक राजनीतिक मांग होती है। मुख्यमंत्री पद पर बने रहने या इस्तीफा देने का निर्णय संवैधानिक और राजनीतिक परिस्थितियों के आधार पर तय होता है। फिलहाल भाजपा की मांग और सत्तापक्ष की प्रतिक्रिया के बीच झारखंड की सियासत पूरी तरह गर्म हो चुकी है।

