By: Mala Mandal
JPSC Exam Scam: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) परीक्षा गड़बड़ी मामले की जांच अब और तेज हो गई है। इस बहुचर्चित मामले में झारखंड पुलिस की अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते को समन जारी किया है। उन्हें 28 जुलाई को CID मुख्यालय में पूछताछ के लिए उपस्थित होने का निर्देश दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद पूरे मामले में नई हलचल शुरू हो गई है और अभ्यर्थियों के बीच भी जांच को लेकर उम्मीदें बढ़ गई हैं।

JPSC परीक्षा से जुड़े विवाद पिछले काफी समय से चर्चा में रहे हैं। विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता, चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और कथित गड़बड़ियों को लेकर अभ्यर्थियों ने लगातार विरोध प्रदर्शन किया था। विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी मामले की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई थी।

इसी क्रम में CID ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए अब आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. ख्यांगते को पूछताछ के लिए बुलाया है। जांच एजेंसी यह जानने का प्रयास करेगी कि परीक्षा प्रक्रिया, मूल्यांकन, चयन सूची और प्रशासनिक निर्णयों के दौरान किन परिस्थितियों में फैसले लिए गए तथा कहीं नियमों का उल्लंघन तो नहीं हुआ।

सूत्रों के अनुसार, CID के अधिकारी पूर्व अध्यक्ष से कई महत्वपूर्ण बिंदुओं पर सवाल पूछ सकते हैं। इनमें परीक्षा आयोजन की प्रक्रिया, अधिकारियों की भूमिका, चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता और कथित अनियमितताओं से जुड़े पहलुओं पर विस्तृत जानकारी ली जाएगी। यदि पूछताछ के दौरान नए तथ्य सामने आते हैं तो जांच का दायरा और भी बढ़ सकता है।
JPSC परीक्षा विवाद को लेकर लंबे समय से अभ्यर्थी न्याय की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनी रहे। अभ्यर्थियों का मानना है कि निष्पक्ष जांच से ही योग्य उम्मीदवारों को न्याय मिल सकेगा।

झारखंड सरकार पहले ही इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच का जिम्मा CID को सौंप चुकी है। जांच एजेंसी लगातार दस्तावेजों की जांच, संबंधित अधिकारियों से पूछताछ और अन्य तकनीकी पहलुओं की पड़ताल कर रही है। पूर्व अध्यक्ष को समन जारी होना इसी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता किसी भी राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण होती है। यदि परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं तो लाखों युवाओं का भरोसा प्रभावित होता है। इसलिए इस मामले की निष्पक्ष और समयबद्ध जांच आवश्यक है।

राजनीतिक स्तर पर भी यह मामला लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्ष सरकार पर पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने का दबाव बना रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि जांच एजेंसियां पूरी स्वतंत्रता के साथ अपना काम कर रही हैं और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

28 जुलाई को होने वाली पूछताछ को इस मामले का महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है। यदि CID को पूछताछ के दौरान महत्वपूर्ण जानकारी मिलती है तो आगे अन्य अधिकारियों या संबंधित व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा सकती है। जांच एजेंसी सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई करेगी।

फिलहाल पूरे राज्य की नजर 28 जुलाई को होने वाली पूछताछ पर टिकी है। प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे लाखों अभ्यर्थी भी इस जांच के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। उनका मानना है कि यदि दोषियों पर कार्रवाई होती है तो भविष्य में भर्ती प्रक्रियाएं अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष बन सकेंगी।

CID की इस कार्रवाई ने यह संकेत दिया है कि जांच एजेंसी मामले के हर पहलू की गहराई से पड़ताल कर रही है। आने वाले दिनों में जांच से जुड़े नए तथ्य सामने आ सकते हैं, जिनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी।

