By: Mala Mandal
GOBARdhan Scheme: केंद्र सरकार देश में कचरे को संसाधन में बदलने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए कई योजनाओं पर काम कर रही है। इसी दिशा में गोबरधन योजना को महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य पशुओं के गोबर और अन्य जैविक कचरे का बेहतर इस्तेमाल करके बायोगैस, बायो-सीएनजी और जैविक खाद जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार करना है।

सरकार की योजना के तहत गोबरधन से जुड़ी गतिविधियों को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने के लिए करीब ₹23,731 करोड़ के निवेश का प्रावधान बताया जा रहा है। इसका मकसद केवल गोबर से ऊर्जा तैयार करना नहीं है, बल्कि गांवों में रोजगार के अवसर पैदा करना, किसानों की आय के अतिरिक्त स्रोत विकसित करना, स्वच्छता को बढ़ावा देना और देश में एक मजबूत चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था तैयार करना भी है।
सरकार का फोकस घरेलू कंप्रेस्ड बायोगैस के उत्पादन को लगभग 10 गुना तक बढ़ाने, निजी क्षेत्र से बड़े पैमाने पर निवेश आकर्षित करने और जैविक कचरे को आर्थिक गतिविधि से जोड़ने पर है। अगर इन योजनाओं का प्रभावी तरीके से क्रियान्वयन होता है तो ग्रामीण क्षेत्रों में गोबर और कृषि अवशेष जैसी चीजें केवल कचरा नहीं रहेंगी, बल्कि आमदनी का जरिया बन सकती हैं।

क्या है गोबरधन योजना?
गोबरधन का पूरा नाम Galvanizing Organic Bio-Agro Resources Dhan है। इसका उद्देश्य गांवों में उपलब्ध गोबर और जैविक कचरे का वैज्ञानिक एवं व्यावसायिक इस्तेमाल करना है। इसके तहत जैविक कचरे से बायोगैस, बायो-सीएनजी और जैविक खाद तैयार करने जैसी गतिविधियों को बढ़ावा दिया जाता है। इस पहल का एक बड़ा उद्देश्य गांवों में स्वच्छता बनाए रखने के साथ-साथ कचरे से ऊर्जा और उपयोगी उत्पाद तैयार करना है। इससे जैविक कचरे का बेहतर प्रबंधन हो सकता है और खुले में कचरा जमा होने की समस्या को कम करने में मदद मिल सकती है।

किसानों को कैसे मिलेगा फायदा?
गोबरधन योजना का सबसे बड़ा संभावित लाभ ग्रामीण क्षेत्रों और पशुपालकों को मिल सकता है। गांवों में बड़ी मात्रा में पशुओं का गोबर उपलब्ध होता है, जिसका इस्तेमाल बायोगैस और जैविक खाद तैयार करने में किया जा सकता है। यदि गोबर को व्यवस्थित तरीके से एकत्र करके बायोगैस संयंत्रों तक पहुंचाया जाता है, तो इससे किसानों और पशुपालकों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत विकसित हो सकता है। वहीं बायोगैस प्लांट से निकलने वाले जैविक अवशेष का इस्तेमाल खाद के रूप में किया जा सकता है।

खेतों के लिए भी उपयोगी हो सकती है जैविक खाद
गोबरधन योजना के तहत जैविक कचरे से तैयार होने वाली खाद को खेती में इस्तेमाल किया जा सकता है। रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने के लिए जैविक खाद का इस्तेमाल किसानों के लिए एक विकल्प बन सकता है। जैविक खाद का उपयोग मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने और कृषि उत्पादन की लागत को संतुलित करने में मदद कर सकता है। हालांकि इसका लाभ मिट्टी, फसल और स्थानीय परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

गांवों में रोजगार के नए अवसर
गोबरधन योजना का एक महत्वपूर्ण उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देना भी है। बायोगैस प्लांट स्थापित होने पर गोबर और जैविक कचरे के संग्रह, परिवहन, प्रसंस्करण और संयंत्र के संचालन से जुड़े काम पैदा हो सकते हैं। इससे गांवों में रहने वाले लोगों के लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। साथ ही स्वयं सहायता समूह, किसान समूह और स्थानीय संस्थाएं भी ऐसी गतिविधियों से जुड़ सकती हैं।

बायोगैस से स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा
गोबर और जैविक कचरे से तैयार बायोगैस का इस्तेमाल ऊर्जा के स्रोत के रूप में किया जा सकता है। इससे खाना पकाने और अन्य जरूरतों के लिए पारंपरिक ईंधन पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। वहीं बायोगैस को आगे शुद्ध करके कंप्रेस्ड बायोगैस यानी CBG के रूप में भी इस्तेमाल किया जा सकता है। CBG को प्राकृतिक गैस के वैकल्पिक ईंधन के तौर पर देखा जाता है।

देश में CBG उत्पादन बढ़ाने पर जोर
सरकार का लक्ष्य घरेलू कंप्रेस्ड बायोगैस के उत्पादन को कई गुना बढ़ाना है। इसके लिए जैविक कचरे, कृषि अवशेष और पशुओं के गोबर को ऊर्जा उत्पादन से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है। CBG के उत्पादन को बढ़ावा मिलने से आयातित जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने और देश के ऊर्जा मिश्रण में घरेलू स्रोतों की हिस्सेदारी बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
निजी निवेश को मिलेगा बढ़ावा
गोबरधन से जुड़ी परियोजनाओं में निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। बड़े पैमाने पर निवेश आने से बायोगैस और CBG संयंत्रों की संख्या बढ़ सकती है। निजी कंपनियों के साथ-साथ स्थानीय निकायों, किसान समूहों और अन्य संस्थाओं की भागीदारी से जैविक कचरे के संग्रह और प्रसंस्करण का नेटवर्क मजबूत हो सकता है।

आम लोगों को क्या फायदा होगा?
गोबरधन योजना का फायदा केवल किसानों तक सीमित नहीं है। आम लोगों को भी अप्रत्यक्ष रूप से इसका लाभ मिल सकता है। गांवों में स्वच्छता बेहतर होने, जैविक कचरे का उचित प्रबंधन होने और वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत बढ़ने से स्थानीय पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इसके अलावा जैविक कचरे से तैयार गैस और खाद का उत्पादन बढ़ने से स्थानीय स्तर पर ऊर्जा और कृषि से जुड़ी अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सकती है।
कचरे से कमाई का मॉडल
गोबरधन योजना का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि इसमें कचरे को बोझ के बजाय संसाधन के रूप में देखा जाता है। पशुओं का गोबर, कृषि अवशेष और अन्य जैविक कचरा अगर सही तरीके से एकत्र और प्रसंस्कृत किया जाए तो उससे ऊर्जा और खाद जैसे उपयोगी उत्पाद तैयार किए जा सकते हैं। इस मॉडल से एक ऐसी अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने की कोशिश है जिसमें कचरे का दोबारा उपयोग हो और संसाधनों की बर्बादी कम हो।

चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था बनाने की कोशिश
सरकार गोबरधन योजना के जरिए देश में एक जीवंत चक्रीय जैव-अर्थव्यवस्था विकसित करना चाहती है। इसका मतलब है कि जैविक कचरे को फेंकने के बजाय उसे दोबारा उपयोग में लाकर ऊर्जा, खाद और अन्य उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएं।एक तरफ कचरे का बेहतर प्रबंधन होगा, वहीं दूसरी तरफ ग्रामीण अर्थव्यवस्था में नए अवसर पैदा हो सकते हैं।
योजना से पर्यावरण को भी फायदा
पशुओं के गोबर और जैविक कचरे का खुले में पड़ा रहना कई तरह की पर्यावरणीय समस्याओं को बढ़ा सकता है। वैज्ञानिक तरीके से इसके प्रबंधन से स्वच्छता में सुधार और कचरे के बेहतर उपयोग में मदद मिल सकती है।बायोगैस और CBG जैसे वैकल्पिक ईंधन स्रोतों को बढ़ावा मिलने से पारंपरिक जीवाश्म ईंधनों पर निर्भरता घटाने की दिशा में भी मदद मिल सकती है।
आने वाले समय में क्या बदल सकता है?
गोबरधन योजना के विस्तार के साथ अगर पर्याप्त संख्या में बायोगैस और CBG संयंत्र स्थापित होते हैं, तो ग्रामीण क्षेत्रों में जैविक कचरे के प्रबंधन का एक नया मॉडल विकसित हो सकता है। इससे किसानों, पशुपालकों, स्थानीय संस्थाओं और निजी कंपनियों के बीच नई आर्थिक गतिविधियां पैदा होने की संभावना है। हालांकि योजना का वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग राज्यों और जिलों में इसका क्रियान्वयन किस तरह होता है और किसानों व स्थानीय समुदायों की भागीदारी कितनी प्रभावी रहती है।
गोबरधन योजना क्यों है महत्वपूर्ण?
गोबरधन योजना को केवल गोबर से गैस बनाने वाली योजना के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए। इसके पीछे ग्रामीण स्वच्छता, वैकल्पिक ऊर्जा, जैविक खाद, रोजगार, निजी निवेश और टिकाऊ अर्थव्यवस्था जैसे कई उद्देश्य जुड़े हुए हैं।
अगर इन सभी पहलुओं को प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो आने वाले समय में गांवों में उपलब्ध जैविक संसाधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण आर्थिक संसाधन बन सकते हैं।
इस लेख में गोबरधन योजना से जुड़े संभावित लाभ और सरकार की प्राथमिकताओं की जानकारी सामान्य सार्वजनिक जानकारी के आधार पर दी गई है। योजना के तहत पात्रता, वित्तीय सहायता, निवेश, सब्सिडी और लाभ राज्य, परियोजना तथा संबंधित सरकारी दिशा-निर्देशों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। किसी भी आर्थिक या निवेश संबंधी निर्णय से पहले संबंधित सरकारी विभाग की आधिकारिक जानकारी अवश्य जांचें। Newsbag किसी योजना के तहत किसी निश्चित लाभ या राशि की गारंटी नहीं देता।
