By: Mala Mandal
रांची/नई दिल्ली। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने मणिपुर और नागालैंड से जुड़े अशांति और राजनीतिक हालात को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्वोत्तर के कई राज्यों में लंबे समय से चले आ रहे विवादों और अस्थिरता के लिए कांग्रेस की नीतियां जिम्मेदार रही हैं। निशिकांत दुबे ने झारखंड सरकार को भी निशाने पर लेते हुए कहा कि राज्य में छात्र लगातार विभिन्न मुद्दों को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी समस्याओं और मांगों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रही है।

निशिकांत दुबे का यह बयान ऐसे समय आया है, जब झारखंड में JPSC, JSSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्र और अभ्यर्थी लगातार अपनी मांगों के समर्थन में आंदोलन कर रहे हैं। परीक्षा प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं, भर्ती व्यवस्था और परिणामों से जुड़े सवालों को लेकर छात्रों की नाराजगी बीते दिनों खुलकर सामने आई है। भाजपा सांसद ने इन मुद्दों को लेकर राज्य सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि युवाओं की समस्याओं को गंभीरता से सुनना और उनका समयबद्ध समाधान करना सरकार की जिम्मेदारी है।
Manipur-Nagaland की अशांति पर कांग्रेस को घेरा
निशिकांत दुबे ने मणिपुर और नागालैंड के संदर्भ में कांग्रेस की पूर्ववर्ती नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूर्वोत्तर की कई जटिल समस्याओं की जड़ें लंबे समय तक अपनाई गई राजनीतिक और प्रशासनिक नीतियों से जुड़ी रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस ने कई संवेदनशील मुद्दों का स्थायी समाधान निकालने के बजाय उन्हें लंबे समय तक राजनीतिक दृष्टिकोण से देखा। भाजपा सांसद ने कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों, जातीय पहचान, क्षेत्रीय अस्मिता और सामाजिक तनाव जैसे मुद्दों पर गंभीर और दूरदर्शी नीति की जरूरत होती है। उनके अनुसार, दशकों से चले आ रहे विवादों को केवल राजनीतिक बयानबाजी से समाप्त नहीं किया जा सकता।

हालांकि, मणिपुर और नागालैंड की स्थिति को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों के अपने-अपने तर्क हैं। विपक्ष लगातार केंद्र सरकार की नीतियों और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल उठाता रहा है, जबकि भाजपा का कहना है कि उसकी सरकार पूर्वोत्तर में शांति, विकास और संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है।
Jharkhand में छात्र आंदोलन का मुद्दा भी उठाया
निशिकांत दुबे ने झारखंड में भर्ती परीक्षाओं और छात्र आंदोलनों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य के युवाओं की चिंता केवल परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि उनका भविष्य, रोजगार और भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता भी बड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा कि यदि छात्र बार-बार सड़कों पर उतरने को मजबूर हो रहे हैं तो सरकार को उनकी समस्याओं को गंभीरता से समझना चाहिए। झारखंड में हाल के दिनों में JPSC और JSSC से जुड़े मामलों को लेकर अभ्यर्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया है। छात्रों की मांग रही है कि परीक्षा और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित की जाए तथा जिन मामलों में अनियमितताओं के आरोप लगे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच हो।

राज्य सरकार ने भी कई मौकों पर छात्रों और युवाओं से संवाद की बात कही है। सरकार की ओर से परीक्षा व्यवस्था में सुधार और युवाओं से सुझाव लेने के लिए पहल किए जाने की बात सामने आई है। इसके बावजूद विपक्ष लगातार सरकार पर युवाओं की समस्याओं को लेकर गंभीर नहीं होने का आरोप लगा रहा है।
सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ी राजनीतिक बयानबाजी
निशिकांत दुबे के बयान के बाद झारखंड की राजनीति में एक बार फिर युवाओं और छात्र आंदोलनों का मुद्दा चर्चा में आ गया है। भाजपा लगातार राज्य सरकार को रोजगार, भर्ती और परीक्षा व्यवस्था के मुद्दे पर घेर रही है। दूसरी ओर, सत्तारूढ़ दल और सरकार का कहना है कि युवाओं के हित में आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं और परीक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए सुधार किए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि झारखंड में युवाओं और रोजगार का मुद्दा आने वाले समय में और अधिक महत्वपूर्ण हो सकता है। बड़ी संख्या में युवा सरकारी नौकरियों की तैयारी कर रहे हैं और भर्ती परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की देरी, विवाद या कथित अनियमितता का सीधा असर उन पर पड़ता है।

Nishikant Dubey ने सरकार से मांगा जवाब
निशिकांत दुबे ने कहा कि सरकार को आंदोलन और विरोध को केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं मानना चाहिए। छात्रों के मुद्दों को समझने के लिए संवाद और ठोस समाधान जरूरी है। उन्होंने झारखंड सरकार से सवाल किया कि आखिर लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आवाज उठा रहे छात्रों की समस्याओं का स्थायी समाधान कब किया जाएगा। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि यदि सरकार समय रहते छात्रों की चिंताओं को दूर नहीं करती है तो असंतोष और बढ़ सकता है। भाजपा सांसद के इस बयान से यह साफ है कि विपक्ष आने वाले दिनों में JPSC-JSSC और छात्र आंदोलनों के मुद्दे को और मजबूती से राजनीतिक बहस के केंद्र में ला सकता है।

पूर्वोत्तर और Jharkhand के मुद्दों को जोड़कर बड़ा राजनीतिक संदेश
मणिपुर और नागालैंड की अशांति के लिए कांग्रेस को जिम्मेदार ठहराने के साथ-साथ झारखंड सरकार पर छात्रों की अनदेखी का आरोप लगाकर निशिकांत दुबे ने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय दोनों मुद्दों पर एक साथ राजनीतिक हमला किया है।
उनका कहना है कि किसी भी सरकार की सफलता इस बात से तय होती है कि वह संवेदनशील और जटिल समस्याओं का समाधान किस तरह करती है। पूर्वोत्तर में शांति का मुद्दा हो या झारखंड में छात्रों और युवाओं का भविष्य, दोनों ही मामलों में सरकारों को जवाबदेही और गंभीरता के साथ काम करना चाहिए।

अब देखना होगा कि निशिकांत दुबे के इस बयान पर कांग्रेस और झारखंड सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। फिलहाल, मणिपुर-नागालैंड की स्थिति और झारखंड में छात्रों के आंदोलन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज होती नजर आ रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा झारखंड की राजनीति में भी अहम स्थान बनाए रख सकता है।




