By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
भारत में बदलती जीवनशैली के साथ हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी गैर-संचारी बीमारियों का खतरा लगातार चर्चा में है। चिंता की बात यह है कि इन बीमारियों की शुरुआत कई बार बिना किसी स्पष्ट लक्षण के हो सकती है। यही वजह है कि लोग लंबे समय तक सामान्य जीवन जीते रहते हैं और उन्हें पता ही नहीं चलता कि उनका ब्लड प्रेशर या ब्लड शुगर सामान्य सीमा से ऊपर जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक आज के समय में केवल उम्रदराज लोगों को ही इन बीमारियों का जोखिम नहीं है। कम उम्र के लोगों में भी खराब खानपान, शारीरिक गतिविधि की कमी, बढ़ता वजन, तनाव, नींद की कमी और लंबे समय तक बैठकर काम करने जैसी आदतों के कारण मेटाबॉलिक बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।

हाई ब्लड प्रेशर को क्यों कहा जाता है साइलेंट किलर?
हाई ब्लड प्रेशर यानी उच्च रक्तचाप को अक्सर साइलेंट किलर कहा जाता है, क्योंकि कई लोगों में इसका कोई स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाई देता। कुछ लोगों को सिरदर्द, चक्कर, थकान या बेचैनी जैसी शिकायत हो सकती है, लेकिन इन लक्षणों के आधार पर केवल ब्लड प्रेशर की पहचान नहीं की जा सकती। अगर ब्लड प्रेशर लंबे समय तक बढ़ा हुआ रहे और इसका इलाज या नियंत्रण न किया जाए तो हृदय, मस्तिष्क, आंखों और किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंग प्रभावित हो सकते हैं। इसलिए केवल लक्षणों का इंतजार करने के बजाय समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच कराना महत्वपूर्ण है।

डायबिटीज की शुरुआत भी हो सकती है बिना किसी खास संकेत के
टाइप-2 डायबिटीज भी कई लोगों में धीरे-धीरे विकसित होती है। शुरुआत में व्यक्ति को कोई खास परेशानी महसूस नहीं होती। जब ब्लड शुगर काफी बढ़ जाता है, तब बार-बार पेशाब आना, अधिक प्यास लगना, ज्यादा भूख लगना, थकान, धुंधला दिखाई देना या घाव देर से भरना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। हालांकि हर व्यक्ति में ये लक्षण मौजूद हों, यह जरूरी नहीं है। यही कारण है कि केवल शरीर में लक्षण दिखाई देने के आधार पर डायबिटीज को पहचानना मुश्किल हो सकता है। ब्लड ग्लूकोज और HbA1c जैसी जांच डॉक्टर की सलाह के अनुसार कराना स्थिति को समझने में मदद कर सकता है।

युवाओं में क्यों बढ़ रहा है खतरा?
आज की आधुनिक जीवनशैली ने युवाओं की दिनचर्या को काफी बदल दिया है। लंबे समय तक मोबाइल और कंप्यूटर पर बैठे रहना, नियमित व्यायाम न करना, बाहर का ज्यादा खाना, मीठे पेय पदार्थों का सेवन, अनियमित नींद और लगातार मानसिक तनाव जैसी आदतें स्वास्थ्य पर असर डाल सकती हैं। इसके अलावा वजन बढ़ना और पेट के आसपास अधिक चर्बी जमा होना भी मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय हो सकता है। परिवार में डायबिटीज या हाई BP का इतिहास होने पर जोखिम और बढ़ सकता है।

डॉक्टर ने क्या चेतावनी दी?
डॉक्टर योगेश छाबड़ा, नेफ्रोलॉजी यूनिट के प्रमुख और निदेशक, फोर्टिस अस्पताल, शालीमार बाग के अनुसार भारत में उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और प्रीडायबिटीज जैसी स्थितियां बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित कर रही हैं और कई लोग अपनी स्थिति से अनजान रहते हैं। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य जांच को केवल तब तक टालना सही नहीं है जब तक कोई परेशानी महसूस न हो। खासकर जिन लोगों में जोखिम कारक मौजूद हैं, उन्हें डॉक्टर से सलाह लेकर नियमित स्वास्थ्य जांच पर ध्यान देना चाहिए।

सिर्फ लक्षण नहीं, जांच भी जरूरी
किसी बीमारी के लक्षण दिखाई नहीं देने का मतलब यह नहीं है कि शरीर पूरी तरह स्वस्थ है। हाई BP की पहचान के लिए रक्तचाप की जांच और डायबिटीज या प्रीडायबिटीज की स्थिति जानने के लिए उचित रक्त जांच की आवश्यकता हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति का वजन अधिक है, परिवार में डायबिटीज या हाई BP का इतिहास है, शारीरिक गतिविधि कम है या खानपान असंतुलित है तो डॉक्टर से नियमित स्वास्थ्य जांच के बारे में बात करना उपयोगी हो सकता है।

ब्लड प्रेशर और डायबिटीज से बचाव के लिए क्या करें?
स्वस्थ जीवनशैली इन बीमारियों के जोखिम को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। रोजाना पर्याप्त शारीरिक गतिविधि करना, संतुलित आहार लेना, नमक और अतिरिक्त चीनी की मात्रा पर ध्यान देना, पर्याप्त नींद लेना और तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश करना फायदेमंद हो सकता है। फल, सब्जियां, साबुत अनाज और दालों जैसे पौष्टिक खाद्य पदार्थों को आहार का हिस्सा बनाना और अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन को सीमित करना भी स्वास्थ्य के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है। धूम्रपान से बचना और शराब का सेवन करते हैं तो उसे सीमित करना भी हृदय और मेटाबॉलिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

युवाओं को खास तौर पर किन बातों का ध्यान रखना चाहिए?
युवाओं को यह नहीं मानना चाहिए कि कम उम्र होने की वजह से हाई BP या डायबिटीज का खतरा बिल्कुल नहीं हो सकता। यदि वजन तेजी से बढ़ रहा है, परिवार में ऐसी बीमारियों का इतिहास है या जीवनशैली में शारीरिक गतिविधि बहुत कम है, तो डॉक्टर से उचित जांच के बारे में सलाह ली जा सकती है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि बिना डॉक्टर की सलाह के किसी दवा को शुरू या बंद न करें। अगर किसी जांच में ब्लड प्रेशर या ब्लड शुगर बढ़ा हुआ आता है तो उसकी सही व्याख्या और आगे की जांच के लिए चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

शरीर के संकेतों को नजरअंदाज न करें
बार-बार अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, असामान्य थकान, अचानक वजन में बदलाव, धुंधला दिखाई देना या घाव का देर से भरना जैसे लक्षणों को लगातार नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। हालांकि ये लक्षण केवल डायबिटीज के कारण ही हों, ऐसा जरूरी नहीं है। इसी तरह लगातार सिरदर्द, चक्कर या अन्य असामान्य लक्षण होने पर भी डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है। हाई BP कई बार बिना किसी लक्षण के भी मौजूद रह सकता है, इसलिए नियमित जांच का महत्व और बढ़ जाता है।
हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को केवल उम्रदराज लोगों की बीमारी समझना अब सही नहीं है। बदलती जीवनशैली के कारण युवाओं में भी इनसे जुड़े जोखिम कारकों पर ध्यान देना जरूरी हो गया है। इन बीमारियों की सबसे बड़ी चुनौती यही है कि शुरुआत में कई लोगों को इनके बारे में पता ही नहीं चलता।

इसलिए स्वस्थ खानपान, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और समय-समय पर स्वास्थ्य जांच को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाना समझदारी है। किसी भी रिपोर्ट में असामान्य परिणाम आने पर घबराने के बजाय डॉक्टर से उचित सलाह लेकर आगे की जांच और उपचार कराना चाहिए।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और विशेषज्ञों द्वारा बताए गए तथ्यों पर आधारित है। यह किसी व्यक्ति के लिए व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह, जांच या उपचार का विकल्प नहीं है। ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या को लेकर चिंता होने पर योग्य डॉक्टर से सलाह लें। दवाओं को डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद न करें।

