By: Vikash Kumar (Vicky)
किडनी में पथरी होने के बाद कई लोग यह सोचकर परेशान हो जाते हैं कि अब इसका सही इलाज क्या होगा और क्या पथरी अपने आप निकल सकती है। जांच में किडनी स्टोन सामने आने के बाद घबराने के बजाय सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि पथरी का आकार कितना है, वह किडनी में किस जगह मौजूद है और पेशाब की नली में किसी तरह की रुकावट तो नहीं है। किडनी की पथरी को मेडिकल भाषा में रीनल स्टोन या नेफ्रोलिथियासिस कहा जाता है। यह पेशाब में मौजूद कुछ खनिज और लवण के क्रिस्टल जमा होने से बन सकती है। छोटी पथरी कई बार पर्याप्त पानी और डॉक्टर की सलाह से अपने आप पेशाब के रास्ते बाहर निकल सकती है, जबकि बड़ी या फंसी हुई पथरी के लिए अलग उपचार की जरूरत पड़ सकती है।

किडनी की पथरी का पता चलने के बाद सबसे पहले क्या करें?
अगर अल्ट्रासाउंड, CT स्कैन या किसी अन्य जांच में किडनी स्टोन मिला है, तो रिपोर्ट लेकर डॉक्टर से सलाह लें। केवल रिपोर्ट में ‘स्टोन’ लिखा देखकर खुद से दवा शुरू करना सही नहीं है।डॉक्टर आमतौर पर पथरी का आकार, उसकी जगह, पेशाब के रास्ते में रुकावट, किडनी की कार्यक्षमता और मरीज के लक्षणों को देखकर उपचार तय करते हैं। कुछ मामलों में ब्लड और यूरिन टेस्ट भी कराए जा सकते हैं।
क्या हर किडनी स्टोन के लिए ऑपरेशन जरूरी होता है?
नहीं। हर पथरी के लिए सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। छोटी पथरी, जो पेशाब की नली में आगे बढ़ने की स्थिति में हो और किसी गंभीर रुकावट या संक्रमण का कारण न बन रही हो, वह कई मामलों में अपने आप निकल सकती है। ऐसी स्थिति में डॉक्टर दर्द को नियंत्रित करने वाली दवाएं और जरूरत के अनुसार ऐसी दवा दे सकते हैं जो पथरी के निकलने में मदद करे। मरीज को पर्याप्त मात्रा में तरल लेने की सलाह भी दी जा सकती है, लेकिन कितना पानी पीना है यह व्यक्ति की स्थिति के अनुसार डॉक्टर से पूछना बेहतर है।

पथरी का आकार क्यों महत्वपूर्ण है?
किडनी स्टोन के इलाज में उसका आकार महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। बहुत छोटी पथरी के अपने आप निकलने की संभावना अपेक्षाकृत अधिक हो सकती है, जबकि आकार बढ़ने के साथ उसके स्वतः बाहर निकलने की संभावना कम हो सकती है। लेकिन केवल आकार देखकर इलाज तय नहीं किया जाता। पथरी किडनी में कहां है, पेशाब की नली में कहां फंसी है और क्या वह पेशाब के प्रवाह को रोक रही है, ये बातें भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।

अगर पथरी पेशाब की नली में फंस जाए तो?
किडनी से ब्लैडर तक पेशाब पहुंचाने वाली नली को यूरेटर कहा जाता है। अगर पथरी यूरेटर में फंस जाती है तो तेज दर्द, कमर या पेट के निचले हिस्से में दर्द और पेशाब से जुड़ी परेशानियां हो सकती हैं। कुछ छोटी पथरियां दवा और निगरानी के साथ बाहर निकल सकती हैं। लेकिन अगर पथरी लंबे समय तक फंसी रहे, पेशाब के प्रवाह में रुकावट पैदा करे या किडनी पर असर डाल रही हो, तो यूरोलॉजिस्ट आगे की प्रक्रिया की सलाह दे सकते हैं।
ESWL से भी निकल सकती है पथरी
कुछ मरीजों में ESWL यानी Extracorporeal Shock Wave Lithotripsy का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें शरीर के बाहर से शॉक वेव्स की मदद से पथरी को छोटे टुकड़ों में तोड़ने की कोशिश की जाती है, ताकि वे पेशाब के रास्ते बाहर निकल सकें। यह तरीका हर तरह की पथरी के लिए उपयुक्त नहीं होता। पथरी का आकार, स्थान और मरीज की स्थिति देखकर डॉक्टर तय करते हैं कि ESWL उपयोगी रहेगा या नहीं।

Ureteroscopy क्या होती है?
अगर पथरी यूरेटर या किडनी के ऐसे हिस्से में है जहां सामान्य तरीके से उसके निकलने की संभावना कम है, तो डॉक्टर यूरेटेरोस्कोपी की सलाह दे सकते हैं। इस प्रक्रिया में एक पतला उपकरण पेशाब के रास्ते से अंदर ले जाकर पथरी तक पहुंचा जाता है। जरूरत पड़ने पर लेजर की मदद से पथरी को छोटे टुकड़ों में तोड़ा या बाहर निकाला जा सकता है।
बड़ी पथरी में PCNL की जरूरत पड़ सकती है
बड़ी किडनी स्टोन या ऐसी पथरी जिसे सामान्य तरीकों से निकालना मुश्किल हो, उसमें PCNL यानी Percutaneous Nephrolithotomy एक विकल्प हो सकता है। इस प्रक्रिया में त्वचा के जरिए किडनी तक पहुंचकर पथरी को निकाला या तोड़ा जाता है। किस मरीज में यह प्रक्रिया करनी है, इसका निर्णय यूरोलॉजिस्ट पथरी के आकार, स्थान और मरीज की स्थिति के आधार पर करते हैं।

दर्द होने पर क्या करें?
किडनी स्टोन में दर्द अचानक और काफी तेज हो सकता है। कुछ लोगों को कमर के एक तरफ से शुरू होकर पेट या जांघ की तरफ जाने वाला दर्द महसूस हो सकता है। दर्द होने पर खुद से बार-बार painkiller लेने के बजाय डॉक्टर की सलाह लेना बेहतर है। कुछ दर्द निवारक दवाएं किडनी की स्थिति, दूसरी बीमारियों या पहले से चल रही दवाओं के आधार पर सभी लोगों के लिए सुरक्षित नहीं होतीं।
क्या ज्यादा पानी पीने से पथरी निकल जाएगी?
पानी पीना किडनी स्टोन की रोकथाम और कुछ छोटी पथरियों के मामले में मददगार हो सकता है, लेकिन केवल पानी पीने से हर प्रकार की पथरी निकल जाएगी, ऐसा मानना सही नहीं है। अगर पेशाब का रास्ता पथरी के कारण पूरी तरह या गंभीर रूप से बाधित है, तो जबरदस्ती बहुत ज्यादा पानी पीना समस्या का समाधान नहीं है। ऐसे मामलों में डॉक्टर की जांच और उचित उपचार जरूरी हो सकता है।

नींबू पानी या घरेलू नुस्खे कितने कारगर हैं?
नींबू और अन्य खट्टे फलों में साइट्रेट पाया जाता है, जो कुछ प्रकार की किडनी स्टोन बनने की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। लेकिन पहले से मौजूद बड़ी पथरी को केवल नींबू पानी या किसी घरेलू नुस्खे से घोलकर निकाल देना संभव नहीं माना जाना चाहिए। इसी तरह किसी भी हर्बल या घरेलू उपाय को डॉक्टर द्वारा बताए गए उपचार का विकल्प नहीं बनाना चाहिए।
किडनी स्टोन के मरीज खानपान में क्या ध्यान रखें?
किडनी स्टोन की रोकथाम में पर्याप्त तरल लेना महत्वपूर्ण माना जाता है। लेकिन खानपान की सलाह इस बात पर भी निर्भर करती है कि पथरी किस प्रकार की है। कुछ मरीजों में नमक का अधिक सेवन कम करने की सलाह दी जाती है। वहीं, बार-बार पथरी बनने वाले मरीजों में डॉक्टर पथरी की जांच या अन्य परीक्षण के आधार पर विशेष डाइट की सलाह दे सकते हैं।बिना जांच यह मान लेना कि हर मरीज को एक ही तरह की डाइट लेनी चाहिए, सही नहीं है।

इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
अगर किडनी स्टोन के साथ तेज दर्द और बुखार या ठंड लगना हो, पेशाब करने में परेशानी हो, पेशाब बहुत कम आए या बिल्कुल न आए, पेशाब में खून दिखाई दे, लगातार उल्टी हो या मरीज की हालत तेजी से बिगड़ रही हो, तो तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेना जरूरी है। खास तौर पर पथरी के साथ संक्रमण और पेशाब के रास्ते में रुकावट का संयोजन गंभीर स्थिति बन सकता है। ऐसे लक्षणों में घर पर इलाज करने में समय बर्बाद नहीं करना चाहिए।
पथरी दोबारा न बने, इसके लिए क्या करें?
एक बार किडनी स्टोन होने के बाद कुछ लोगों में भविष्य में दोबारा पथरी बनने का खतरा रहता है। इसलिए पथरी निकल जाने के बाद भी सावधानी जरूरी है। पर्याप्त तरल लेना, भोजन में अत्यधिक नमक से बचना और डॉक्टर द्वारा बताई गई डाइट का पालन करना मददगार हो सकता है। जिन लोगों को बार-बार पथरी होती है, उनके लिए डॉक्टर आगे की जांच करके पथरी बनने के कारण का पता लगाने की कोशिश कर सकते हैं।

टेस्ट में किडनी की पथरी मिलने का मतलब यह नहीं है कि हर मरीज को तुरंत ऑपरेशन करवाना पड़ेगा। पथरी का आकार, स्थान, पेशाब के रास्ते में रुकावट, संक्रमण और मरीज के लक्षणों के आधार पर इलाज तय किया जाता है। छोटी पथरी कई बार निगरानी और दवा के साथ अपने आप निकल सकती है, जबकि बड़ी या जटिल पथरी के लिए ESWL, यूरेटेरोस्कोपी या PCNL जैसी प्रक्रियाओं की जरूरत पड़ सकती है।
इसलिए रिपोर्ट आने के बाद खुद से दवा या घरेलू उपचार शुरू करने के बजाय यूरोलॉजिस्ट से सलाह लेना सबसे महत्वपूर्ण कदम है।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है और इसे डॉक्टर की व्यक्तिगत सलाह का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। किडनी स्टोन का उपचार उसकी स्थिति, आकार, प्रकार और मरीज की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है। तेज दर्द, बुखार, पेशाब रुकना, लगातार उल्टी या पेशाब में खून जैसे लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें। किसी भी दवा या उपचार को डॉक्टर की सलाह के बिना शुरू या बंद न करें।

