By: Mala Mandal
रांची: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर चल रहा छात्र आंदोलन अब और तेज होता नजर आ रहा है। आंदोलनरत छात्रों के बीच पहुंचे झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य सरकार से छात्रों की मांगों पर एक सप्ताह के भीतर सकारात्मक और ठोस निर्णय लेने की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार ने सात दिनों के भीतर छात्रों की मांगों पर कार्रवाई नहीं की, तो वह खुद आंदोलन में शामिल होकर अनशन पर बैठेंगे।

रघुवर दास बुधवार को रांची में आंदोलन कर रहे छात्रों से मिलने पहुंचे। इस दौरान उन्होंने छात्रों की समस्याएं सुनीं और उनके आंदोलन को अपना समर्थन दिया। उन्होंने कहा कि छात्र पिछले कई दिनों से अपने भविष्य और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। उनका कहना था कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों को सरकार को गंभीरता से लेना चाहिए और आंदोलन को प्रतिष्ठा का विषय बनाने के बजाय बातचीत के माध्यम से समाधान निकालना चाहिए।
छात्रों की मांगों पर सरकार को एक सप्ताह का समय
पूर्व मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार को एक सप्ताह का समय देते हुए कहा कि इस अवधि में छात्रों की मांगों पर ठोस पहल की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि सरकार की ओर से कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता है तो वह स्वयं छात्रों के समर्थन में अनशन करेंगे। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा की समाधि स्थल पर अनशन शुरू करने की बात कही है। रघुवर दास के इस ऐलान के बाद छात्र आंदोलन को राजनीतिक समर्थन मिलने की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि उन्होंने छात्रों के बीच यह भी कहा कि वह इस मंच को राजनीतिक मंच नहीं बनाना चाहते और उनका उद्देश्य छात्रों की जायज मांगों का समर्थन करना है।

JPSC-JSSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी बना बड़ा मुद्दा
झारखंड में पिछले कुछ समय से प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर युवाओं के बीच नाराजगी देखने को मिल रही है। आंदोलनकारी छात्र JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। इसी मुद्दे को लेकर रांची में छात्र आंदोलन कर रहे हैं। रघुवर दास ने आरोप लगाया कि परीक्षा व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और इससे युवाओं का भरोसा प्रभावित हुआ है। उन्होंने सरकार से कहा कि वह छात्रों की शिकायतों को गंभीरता से सुने और ऐसी व्यवस्था तैयार करे, जिससे भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर किसी तरह का संदेह पैदा न हो।

उन्होंने अधिकारियों को भी चेतावनी देते हुए कहा कि छात्रों पर दबाव बनाने के बजाय उनकी समस्याओं को समझना चाहिए। उनका कहना था कि अधिकारी अपने संवैधानिक दायित्वों का पालन करें और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने वाले छात्रों के साथ उचित व्यवहार करें।
‘छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ नहीं होना चाहिए’
छात्रों को संबोधित करते हुए रघुवर दास ने कहा कि युवा किसी भी राज्य की सबसे बड़ी ताकत होते हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्र वर्षों तक मेहनत करते हैं। ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की गड़बड़ी या अनियमितता की शिकायत सामने आने पर उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। उन्होंने कहा कि छात्रों के आंदोलन को केवल कानून-व्यवस्था के नजरिए से नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार को यह समझना होगा कि आंदोलन के पीछे युवाओं के भविष्य से जुड़ी चिंता है। उन्होंने झारखंड की जनता से भी छात्रों के आंदोलन का समर्थन करने की अपील की।

‘मेरा राजनीतिक जन्म भी छात्र आंदोलन से हुआ’
रघुवर दास ने छात्रों के बीच अपने राजनीतिक जीवन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि छात्र आंदोलन से ही उनके राजनीतिक जीवन की शुरुआत हुई थी। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि वह वर्तमान आंदोलन के मंच से राजनीतिक बयानबाजी नहीं करेंगे। उनके मुताबिक यह मंच छात्रों की समस्याओं और उनके भविष्य से जुड़े मुद्दों के लिए है। उन्होंने छात्रों से धैर्य बनाए रखने और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सामने रखने की अपील की। साथ ही उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि वह आंदोलन कर रहे युवाओं के साथ सीधे संवाद करे।

सरकार के सामने बढ़ी चुनौती
रघुवर दास के एक सप्ताह के अल्टीमेटम से राज्य सरकार के सामने राजनीतिक और प्रशासनिक चुनौती बढ़ सकती है। एक तरफ छात्र अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं, वहीं दूसरी तरफ विपक्षी नेताओं की ओर से सरकार पर दबाव बढ़ाया जा रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है। यदि सरकार निर्धारित समय के भीतर कोई ठोस निर्णय लेती है तो आंदोलन को शांत करने की दिशा में रास्ता खुल सकता है। वहीं, मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में रघुवर दास के अनशन के ऐलान से आंदोलन और व्यापक होने की संभावना बन सकती है।

छात्रों के आंदोलन पर सबकी नजर
झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं को लेकर चल रहा विवाद अब केवल परीक्षा व्यवस्था तक सीमित नहीं रह गया है। यह युवाओं के रोजगार, पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया और सरकारी संस्थाओं पर भरोसे से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है।

रघुवर दास के समर्थन के बाद आने वाले दिनों में आंदोलन की दिशा पर सबकी नजर रहेगी। फिलहाल पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार को सात दिनों का समय दिया है। अब देखना होगा कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या फैसला लेती है और क्या इस फैसले से आंदोलन समाप्त करने की राह निकलती है या रघुवर दास अपने ऐलान के मुताबिक अनशन पर बैठते हैं।


