By: Mala Mandal
भारत आज 15 अगस्त 2026 को अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस पूरे उत्साह, उमंग और देशभक्ति के साथ मना रहा है। देश के कोने-कोने में तिरंगा शान से लहरा रहा है और स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद करते हुए राष्ट्रीय गौरव की भावना दिखाई दे रही है। दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किले से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी राष्ट्र को संबोधित किया। स्वतंत्रता दिवस का यह अवसर केवल उत्सव का दिन नहीं, बल्कि देश की अब तक की यात्रा और आने वाले भविष्य का आकलन करने का भी मौका है।प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के 12 साल पूरे होने के बाद उनके कार्यकाल को लेकर देश में अलग-अलग तरह की राय देखने को मिलती है। समर्थक जहां इसे विकास, डिजिटल बदलाव, बुनियादी ढांचे, आत्मनिर्भरता और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका का दौर मानते हैं, वहीं विपक्ष रोजगार, महंगाई, सामाजिक मुद्दों और आर्थिक असमानता जैसे सवाल उठाता रहा है। ऐसे में 12 वर्षों के कार्यकाल का मूल्यांकन उपलब्धियों के साथ-साथ चुनौतियों के आधार पर करना ज्यादा संतुलित दृष्टिकोण होगा।

विकास और बुनियादी ढांचे पर जोर
मोदी सरकार के कार्यकाल में सड़क, रेलवे, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से बढ़ाने पर जोर दिया गया। देश में हाईवे और एक्सप्रेसवे नेटवर्क के विस्तार के साथ रेलवे के आधुनिकीकरण और वंदे भारत जैसी ट्रेनों को भी सरकार की विकास नीति के प्रतीक के रूप में पेश किया गया। सरकार ने डिजिटल इंडिया के माध्यम से सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन और आसान बनाने पर भी जोर दिया। डिजिटल भुगतान और UPI ने आम लोगों तथा छोटे कारोबारियों के लेन-देन के तरीके में बड़ा बदलाव किया है। इसी तरह सरकारी योजनाओं को डिजिटल माध्यम से लाभार्थियों तक पहुंचाने की कोशिश ने प्रशासनिक व्यवस्था में भी परिवर्तन किया है।

आत्मनिर्भर भारत और विनिर्माण
मोदी सरकार ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ के जरिए भारत को उत्पादन और विनिर्माण का बड़ा केंद्र बनाने की कोशिश की है। मोबाइल फोन निर्माण, इलेक्ट्रॉनिक्स, रक्षा उत्पादन और अन्य क्षेत्रों में घरेलू उत्पादन बढ़ाने की नीतियों पर जोर दिया गया। सरकार की प्राथमिकता यह रही है कि भारत केवल बड़े बाजार के रूप में नहीं, बल्कि वैश्विक सप्लाई चेन में महत्वपूर्ण उत्पादन केंद्र के रूप में भी अपनी जगह बनाए। हालांकि विशेषज्ञों और विपक्ष की ओर से रोजगार की गुणवत्ता तथा पर्याप्त रोजगार सृजन को लेकर लगातार सवाल भी उठते रहे हैं।

गरीब और मध्यम वर्ग के लिए योजनाएं
पिछले 12 वर्षों में केंद्र सरकार ने गरीब और कमजोर वर्गों को ध्यान में रखते हुए कई कल्याणकारी योजनाएं लागू कीं। उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जनधन खाते, आयुष्मान भारत और मुफ्त राशन जैसी योजनाओं को सरकार अपनी सामाजिक कल्याण नीति की प्रमुख उपलब्धियों में गिनाती है। इन योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों तक सीधे सरकारी सहायता पहुंचाना रहा है। हालांकि इन योजनाओं के प्रभाव को लेकर राज्यों और सामाजिक समूहों के स्तर पर अलग-अलग अनुभव भी सामने आते रहे हैं। यही वजह है कि सरकार की उपलब्धियों का मूल्यांकन केवल घोषणाओं से नहीं, बल्कि वास्तविक लाभार्थियों तक पहुंच और उनके जीवन में हुए बदलाव से करना जरूरी है।

वैश्विक स्तर पर भारत की भूमिका
मोदी सरकार के 12 वर्षों में विदेश नीति और वैश्विक मंच पर भारत की सक्रियता भी चर्चा का विषय रही है। भारत ने विभिन्न अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी भूमिका को मजबूत करने की कोशिश की है। वैश्विक अर्थव्यवस्था, रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग और कूटनीतिक संबंधों के क्षेत्र में भारत की सक्रियता बढ़ी है। सरकार समर्थकों के अनुसार भारत की वैश्विक छवि मजबूत हुई है और देश अब कई अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर अधिक प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री ने पिछले स्वतंत्रता दिवसों के भाषणों में भी भारत को विकसित राष्ट्र बनाने और 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य पर जोर दिया है।

चुनौतियां भी कम नहीं
किसी भी सरकार के 12 वर्षों का मूल्यांकन केवल उपलब्धियों के आधार पर नहीं किया जा सकता। रोजगार, महंगाई, किसानों की आय, शिक्षा, स्वास्थ्य, छोटे कारोबार और सामाजिक समानता जैसे मुद्दे आज भी महत्वपूर्ण बने हुए हैं। युवाओं के लिए पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण रोजगार पैदा करना आने वाले वर्षों की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल होना चाहिए। इसी तरह बढ़ती अर्थव्यवस्था का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे, यह भी महत्वपूर्ण चुनौती है। विपक्ष समय-समय पर बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक असमानता को लेकर सरकार पर सवाल उठाता रहा है। सरकार की ओर से विकास दर, बुनियादी ढांचे, कल्याणकारी योजनाओं और डिजिटल अर्थव्यवस्था को अपनी उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत किया जाता है। इसलिए जनता के नजरिए से अंतिम मूल्यांकन इन दोनों पक्षों को साथ रखकर किया जाना चाहिए।

2047 के लक्ष्य की ओर नजर
आजादी के 80वें वर्ष पर देश का ध्यान अब 2047 के विकसित भारत के लक्ष्य पर भी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वतंत्रता दिवस के मंच से बार-बार युवाओं, तकनीक, आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय विकास को भविष्य की प्राथमिकताओं से जोड़ा है। 2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में भी युवाशक्ति और विकसित भारत की दिशा पर विशेष ध्यान दिखाई देता है। 12 साल के शासन के बाद मोदी सरकार के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि अगले वर्षों में भारत की आर्थिक प्रगति को कितनी तेजी से रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और आम नागरिक की आय में बदला जा सकता है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 12 वर्षों के कार्यकाल को भारत के राजनीतिक और आर्थिक इतिहास के एक महत्वपूर्ण दौर के रूप में देखा जा सकता है। डिजिटल इंडिया, बुनियादी ढांचा, कल्याणकारी योजनाएं, आत्मनिर्भरता और वैश्विक कूटनीति सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में रही हैं। दूसरी ओर रोजगार, महंगाई, असमानता और सामाजिक विकास जैसे मुद्दे अभी भी निरंतर ध्यान मांगते हैं।

इसलिए लाल किले से प्रधानमंत्री के 12 साल के कामकाज का हिसाब केवल उपलब्धियों या आलोचनाओं के आधार पर नहीं, बल्कि जनता के जीवन में आए वास्तविक बदलाव के आधार पर किया जाना चाहिए। 80वें स्वतंत्रता दिवस पर देश के सामने सबसे बड़ा लक्ष्य यही है कि आजादी की भावना को विकास, समान अवसर, मजबूत लोकतंत्र और बेहतर भविष्य में बदला जाए।

आखिरकार, किसी भी सरकार के कामकाज का अंतिम फैसला जनता ही करती है। आने वाले वर्षों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि 2047 तक विकसित भारत का सपना किस हद तक जमीन पर वास्तविकता बन पाता है।


