By: Mala Mandal
फैटी लिवर आजकल तेजी से बढ़ती एक आम समस्या बन गई है। खराब खान-पान, शारीरिक गतिविधि की कमी, बढ़ता वजन और अधिक कैलोरी वाले भोजन की आदत लिवर में अतिरिक्त फैट जमा होने की वजह बन सकती है। ऐसे में लोग अक्सर यह जानना चाहते हैं कि डाइट में किन चीजों को शामिल करने से लिवर की सेहत बेहतर रखी जा सकती है। इन्हीं में ब्लैक कॉफी का नाम भी सामने आता है। कई अध्ययनों में कॉफी के सेवन और लिवर हेल्थ के बीच संभावित सकारात्मक संबंध देखा गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि ब्लैक कॉफी फैटी लिवर का इलाज है। गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट भी आमतौर पर कॉफी को संतुलित मात्रा में लेने और उसमें ज्यादा चीनी, क्रीम या हाई-कैलोरी सामग्री न मिलाने की सलाह देते हैं।

फैटी लिवर में ब्लैक कॉफी क्यों मानी जाती है फायदेमंद?
कॉफी में कैफीन के साथ कई तरह के बायोएक्टिव कंपाउंड पाए जाते हैं। रिसर्च में नियमित कॉफी सेवन को कुछ लोगों में लिवर एंजाइम और क्रॉनिक लिवर डिजीज के कम जोखिम से जोड़ा गया है। कुछ अध्ययनों में कॉफी पीने वालों में लिवर फाइब्रोसिस और सिरोसिस का जोखिम भी कम पाया गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, कॉफी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और अन्य यौगिक शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस तथा सूजन से जुड़े कुछ प्रक्रियाओं पर प्रभाव डाल सकते हैं। हालांकि हर व्यक्ति पर इसका प्रभाव एक जैसा हो, यह जरूरी नहीं है।

ब्लैक कॉफी पीने का सही तरीका क्या है?
अगर आप फैटी लिवर की समस्या के बावजूद कॉफी पीना चाहते हैं, तो इसे साधारण तरीके से लेना बेहतर माना जाता है। कॉफी में अतिरिक्त चीनी, फ्लेवर्ड सिरप, व्हिप्ड क्रीम या ज्यादा क्रीम मिलाने से बचें। ब्लैक कॉफी को बिना चीनी या बहुत कम चीनी के साथ लिया जा सकता है। दिनभर में कितनी कॉफी आपके लिए उचित है, यह आपकी कुल कैफीन खपत, उम्र, स्वास्थ्य और डॉक्टर की सलाह पर निर्भर करता है।

कितनी ब्लैक कॉफी पीनी चाहिए?
कॉफी की मात्रा को लेकर सभी लोगों के लिए एक ही नियम लागू नहीं होता। स्वस्थ वयस्कों में कुल कैफीन की मात्रा सामान्यतः सीमित रखना जरूरी है। FDA के अनुसार, अधिकांश स्वस्थ वयस्कों के लिए प्रतिदिन लगभग 400 मिलीग्राम तक कैफीन आम तौर पर नकारात्मक प्रभावों से जुड़ा नहीं माना जाता, लेकिन संवेदनशील लोगों में इससे कम मात्रा भी परेशानी पैदा कर सकती है। ध्यान रखें कि एक कप कॉफी में कैफीन की मात्रा कॉफी के प्रकार, बनाने के तरीके और कप के आकार के अनुसार काफी बदल सकती है। इसलिए सिर्फ कपों की संख्या के आधार पर कैफीन का अनुमान लगाना सही नहीं है।
सुबह खाली पेट ब्लैक कॉफी पीना जरूरी नहीं
फैटी लिवर को ठीक करने के लिए सुबह खाली पेट ब्लैक कॉफी पीना जरूरी नहीं है। कुछ लोगों को खाली पेट कॉफी पीने से एसिडिटी, पेट में जलन, बेचैनी या गैस जैसी समस्या हो सकती है। अगर आपको कॉफी से पेट संबंधी परेशानी होती है तो इसे खाली पेट लेने के बजाय भोजन के बाद या भोजन के साथ लेना अधिक आरामदायक हो सकता है।

कॉफी में चीनी और क्रीम डालने से क्यों बचें?
फैटी लिवर के मैनेजमेंट में कुल कैलोरी और अतिरिक्त शुगर का सेवन कम रखना महत्वपूर्ण हो सकता है। ऐसे में अगर ब्लैक कॉफी को बहुत अधिक चीनी, क्रीम, फ्लेवर्ड सिरप या मीठे कॉफी मिक्स के साथ लिया जाए तो इसका कैलोरी और शुगर कंटेंट काफी बढ़ सकता है। इसलिए अगर आपका उद्देश्य लिवर हेल्थ के लिए बेहतर विकल्प चुनना है, तो साधारण कॉफी को प्राथमिकता देना अधिक उचित है।
सिर्फ ब्लैक कॉफी से फैटी लिवर ठीक नहीं होता
यह बात समझना बेहद जरूरी है कि ब्लैक कॉफी किसी भी तरह से फैटी लिवर की दवा नहीं है। फैटी लिवर को मैनेज करने के लिए सबसे महत्वपूर्ण चीजें हैं स्वस्थ वजन बनाए रखना, संतुलित डाइट लेना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना और शराब का सेवन करने वालों में उसे बंद करना या डॉक्टर की सलाह लेना। अगर फैटी लिवर के साथ मोटापा, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल या हाई ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं हैं, तो इनका सही प्रबंधन भी बेहद जरूरी है।

किन लोगों को कॉफी पीने में सावधानी बरतनी चाहिए?
जिन लोगों को कैफीन से धड़कन बढ़ना, बेचैनी, नींद की समस्या, पेट में जलन या एसिडिटी जैसी परेशानी होती है, उन्हें कॉफी सीमित करनी चाहिए। गर्भावस्था के दौरान कैफीन की मात्रा भी डॉक्टर की सलाह के अनुसार सीमित रखना जरूरी है। इसके अलावा यदि आपको कोई लिवर बीमारी है और आप नियमित दवाएं लेते हैं, तो कॉफी की मात्रा को लेकर अपने डॉक्टर या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से सलाह लेना बेहतर रहेगा।

फैटी लिवर में इन आदतों पर भी दें ध्यान
फैटी लिवर को नियंत्रित करने के लिए केवल किसी एक खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहना सही तरीका नहीं है। रोजाना पर्याप्त शारीरिक गतिविधि, वजन को स्वस्थ स्तर पर लाने की कोशिश, सब्जियों और फाइबर से भरपूर भोजन, पर्याप्त प्रोटीन और कम अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड लेना मददगार हो सकता है। मीठे पेय, ज्यादा तला-भुना खाना और जरूरत से ज्यादा कैलोरी का सेवन कम करना भी महत्वपूर्ण है। यदि डॉक्टर ने फैटी लिवर की पुष्टि की है, तो समय-समय पर लिवर की जांच और चिकित्सकीय सलाह लेते रहना चाहिए।

ब्लैक कॉफी को फैटी लिवर वाले लोगों के लिए एक संभावित हेल्दी ड्रिंक माना जा सकता है और रिसर्च में कॉफी सेवन का बेहतर लिवर हेल्थ से संबंध देखा गया है। लेकिन इसे फैटी लिवर का इलाज समझना सही नहीं होगा। कॉफी का फायदा तभी ज्यादा मायने रखता है जब आपकी पूरी लाइफस्टाइल भी संतुलित हो।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाणों पर आधारित है। फैटी लिवर का इलाज व्यक्ति की स्थिति के अनुसार अलग हो सकता है। ब्लैक कॉफी शुरू करने, इसकी मात्रा बढ़ाने या किसी दवा/इलाज में बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट की सलाह लें। लगातार पेट दर्द, पीलिया, अत्यधिक कमजोरी या अन्य गंभीर लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

