By: Mala Mandal
Nag Panchami 2026: हिंदू धर्म में सावन महीने का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस पवित्र महीने में भगवान शिव की आराधना के साथ कई महत्वपूर्ण पर्व और व्रत भी आते हैं। इन्हीं में से एक है नाग पंचमी। हर साल श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी का पर्व मनाया जाता है। इस दिन नाग देवता की पूजा करने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नाग देवता की पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति मिलने का आशीर्वाद प्राप्त होता है। कई लोग इस दिन कुंडली में मौजूद कालसर्प दोष की शांति के लिए भी विशेष पूजा और अनुष्ठान कराते हैं। हालांकि ज्योतिषीय मान्यताओं में कालसर्प दोष को लेकर अलग-अलग मत हैं। आइए जानते हैं नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है, इसके पीछे कौन-कौन सी पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं और इस दिन नाग देवता की पूजा का क्या धार्मिक महत्व बताया गया है।

नाग पंचमी क्यों मनाई जाती है?
नाग पंचमी का पर्व नाग देवताओं के सम्मान और उनकी पूजा के लिए समर्पित माना जाता है। हिंदू धार्मिक परंपरा में नागों का संबंध भगवान शिव, भगवान विष्णु और कई अन्य देवी-देवताओं से बताया गया है। भगवान शिव के गले में नाग विराजमान हैं, जबकि भगवान विष्णु शेषनाग की शय्या पर विराजते हैं। इसी कारण नागों को धार्मिक परंपरा में विशेष स्थान प्राप्त है। नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करके उनसे परिवार की सुख-शांति और सुरक्षा की प्रार्थना की जाती है।

नाग पंचमी की पौराणिक कथा
नाग पंचमी से जुड़ी कई पौराणिक कथाएं अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित हैं। इनमें राजा परीक्षित और उनके पुत्र जनमेजय से जुड़ी कथा काफी प्रसिद्ध है। कथा के अनुसार राजा परीक्षित की मृत्यु तक्षक नाग के डसने से हुई थी। अपने पिता की मृत्यु से दुखी होकर उनके पुत्र राजा जनमेजय ने नागों से बदला लेने के लिए एक विशाल सर्प यज्ञ शुरू करवाया। इस यज्ञ में बड़ी संख्या में नाग अग्नि में गिरने लगे। जब यह यज्ञ चल रहा था, तब आस्तीक मुनि ने वहां पहुंचकर राजा जनमेजय से यज्ञ रोकने का अनुरोध किया। आस्तीक मुनि की प्रार्थना स्वीकार करते हुए राजा ने सर्प यज्ञ रोक दिया और इस तरह अनेक नागों की रक्षा हुई। धार्मिक मान्यता के अनुसार इसी घटना को नाग पूजा की परंपरा से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि नाग पंचमी से संबंधित कथाओं के अलग-अलग संस्करण भी धार्मिक ग्रंथों और लोक परंपराओं में मिलते हैं।

भगवान शिव से नागों का क्या संबंध है?
नाग पंचमी का संबंध भगवान शिव की आराधना से भी जोड़ा जाता है। भगवान शिव के गले में नाग विराजमान हैं और इसी कारण नागों को शिव का प्रिय माना जाता है। सावन महीने में भगवान शिव की पूजा का विशेष महत्व होने के कारण नाग पंचमी का पर्व भी भक्तों के लिए महत्वपूर्ण हो जाता है। इस दिन शिव मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और श्रद्धालु शिवलिंग पर जल तथा बेलपत्र अर्पित करते हैं।
नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा क्यों की जाती है?
भारतीय धार्मिक परंपरा में नागों को प्रकृति और पृथ्वी के संतुलन से भी जोड़ा जाता है। ग्रामीण जीवन में सांपों का सामना अधिक होने के कारण प्राचीन समय से ही नागों के प्रति सम्मान और संरक्षण की भावना रही है। नाग पंचमी के दिन नाग देवता की पूजा करके उनसे परिवार की रक्षा और सुख-समृद्धि की कामना की जाती है। कई जगहों पर नाग देवता की प्रतिमा या चित्र की पूजा की जाती है।

नाग पंचमी पर क्या पूजा की जाती है?
नाग पंचमी के दिन श्रद्धालु सुबह स्नान करके पूजा स्थल को साफ करते हैं। इसके बाद नाग देवता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करके पूजा की जाती है। फूल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित किए जाते हैं। भगवान शिव की पूजा भी की जाती है। कई स्थानों पर नाग देवता को दूध अर्पित करने की परंपरा है, लेकिन वास्तविक सांपों को दूध पिलाना उचित नहीं माना जाता, क्योंकि सांप दूध पचाने के लिए अनुकूलित नहीं होते। नाग पंचमी पर सांपों को पकड़ने या उन्हें परेशान करने के बजाय वन्यजीवों के प्रति सम्मान रखना अधिक उचित है।

क्या नाग पंचमी पर कालसर्प दोष दूर होता है?
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार कुछ लोग नाग पंचमी के दिन कालसर्प दोष की शांति के लिए पूजा, मंत्र जाप और विशेष अनुष्ठान करते हैं। ऐसी मान्यता है कि नाग देवता की पूजा और भगवान शिव की आराधना से ग्रह संबंधी बाधाओं को शांत करने में सहायता मिल सकती है। हालांकि कालसर्प दोष और उसके प्रभाव को लेकर ज्योतिष में अलग-अलग मत हैं। इसलिए इसे वैज्ञानिक रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति इस संबंध में धार्मिक अनुष्ठान करना चाहता है, तो अपनी परंपरा के अनुसार किसी योग्य ज्योतिषाचार्य या विद्वान से सलाह ले सकता है।
नाग पंचमी का धार्मिक महत्व
नाग पंचमी केवल नागों की पूजा का पर्व नहीं है, बल्कि यह प्रकृति के प्रति सम्मान का संदेश भी देता है। हिंदू धर्म में पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और विभिन्न जीवों को धार्मिक परंपराओं से जोड़कर उनके संरक्षण की भावना विकसित की गई है। इस दिन नाग देवता की पूजा करके लोग भय से मुक्ति, परिवार की सुरक्षा, सुख-शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। भगवान शिव की आराधना करने वाले भक्तों के लिए भी यह दिन विशेष माना जाता है।

नाग पंचमी पर क्या नहीं करना चाहिए?
नाग पंचमी के दिन सांपों को पकड़कर उन्हें परेशान करना या उनके साथ किसी तरह का प्रदर्शन करना उचित नहीं है। धार्मिक आस्था के नाम पर किसी वन्यजीव को नुकसान पहुंचाना भी सही नहीं है। इसके अलावा पूजा के दौरान दिखावे के बजाय श्रद्धा और स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए। नाग देवता की पूजा के साथ प्रकृति और जीव-जंतुओं के संरक्षण का संकल्प लेना इस पर्व की भावना के अधिक अनुरूप है।

नाग पंचमी हमें क्या संदेश देती है?
नाग पंचमी का पर्व हमें प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति सम्मान की भावना रखने का संदेश देता है। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ इसका एक सामाजिक और पर्यावरणीय पहलू भी है। सांप पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और चूहों जैसे जीवों की संख्या नियंत्रित करने में उनकी भूमिका होती है। इसलिए नाग पंचमी पर पूजा के साथ यह संकल्प भी लिया जा सकता है कि किसी भी जीव को अनावश्यक रूप से नुकसान नहीं पहुंचाएंगे और प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने में अपना योगदान देंगे।
नाग पंचमी हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है, जिसे नाग देवता के सम्मान और पूजा के लिए मनाया जाता है। भगवान शिव से नागों के संबंध और राजा जनमेजय तथा आस्तीक मुनि की पौराणिक कथा इस पर्व को विशेष धार्मिक महत्व देती है। इस दिन श्रद्धालु नाग देवता और भगवान शिव की पूजा कर सुख-शांति एवं परिवार की सुरक्षा की कामना करते हैं।
यह लेख धार्मिक मान्यताओं, पौराणिक कथाओं और प्रचलित परंपराओं पर आधारित है। कालसर्प दोष, पूजा के फल या सर्प भय से मुक्ति जैसी बातें धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं से संबंधित हैं, इन्हें वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित चिकित्सा या तथ्य के रूप में न लें। पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान अपनी आस्था एवं पारिवारिक परंपरा के अनुसार करें।

