By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
भारत और श्रीलंका के बीच कोलंबो में खेले जा रहे दूसरे टेस्ट मैच के पहले दिन मैदान पर ऐसा नजारा देखने को मिला, जिसने क्रिकेट फैंस का ध्यान खींच लिया। भारतीय ओपनर यशस्वी जायसवाल और श्रीलंकाई तेज गेंदबाज असिथा फर्नांडो के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। मामला इतना बढ़ गया कि दोनों खिलाड़ी एक-दूसरे के बेहद करीब आ गए और बाद में साथी खिलाड़ियों को बीच-बचाव करना पड़ा। अब इस पूरे विवाद पर यशस्वी जायसवाल ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए दिग्गज कमेंटेटर हर्षा भोगले को भी जवाब दिया है।

कैसे शुरू हुआ यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो का विवाद?
कोलंबो टेस्ट के पहले दिन भारतीय पारी के 17वें ओवर में यह विवाद देखने को मिला। असिथा फर्नांडो की गेंद पर यशस्वी जायसवाल 45 रन के स्कोर पर आउट हुए। इससे पहले उसी ओवर में जायसवाल ने फर्नांडो की गेंदों पर लगातार तीन चौके लगाए थे। आखिरी गेंद पर फर्नांडो ने वापसी करते हुए भारतीय बल्लेबाज को बोल्ड कर दिया। इसके बाद श्रीलंकाई गेंदबाज की ओर से आक्रामक अंदाज में सेलिब्रेशन और कथित तौर पर कुछ कहे जाने के बाद जायसवाल पीछे मुड़े और फर्नांडो के पास पहुंच गए। दोनों के बीच कुछ देर तक तीखी बातचीत हुई। इस दौरान दोनों खिलाड़ी काफी करीब आ गए और शारीरिक संपर्क भी हुआ। श्रीलंका के कप्तान धनंजय डी सिल्वा समेत अन्य खिलाड़ियों ने दोनों को अलग किया।
हालांकि, फर्नांडो ने वास्तव में जायसवाल से क्या कहा था, इसका पूरा विवरण सार्वजनिक तौर पर सामने नहीं आया है। इसलिए विवाद की शुरुआत किस बात से हुई, इस पर किसी निश्चित निष्कर्ष पर पहुंचना मुश्किल है।

हर्षा भोगले ने जायसवाल के रवैये पर उठाए सवाल
मैदान पर हुई इस घटना के बाद क्रिकेट कमेंटेटर हर्षा भोगले ने भी पूरे मामले पर अपनी राय रखी। भोगले का मानना था कि यशस्वी को उकसाया गया हो सकता है, लेकिन उन्हें वहां रुकने के बजाय सीधे पवेलियन लौट जाना चाहिए था। भोगले ने यह भी कहा कि यशस्वी बेहद प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं और उनका मुख्य ध्यान उनकी बल्लेबाजी पर होना चाहिए। उनके मुताबिक, विपक्षी खिलाड़ी उकसाते हैं, लेकिन ऐसे मौकों पर बल्लेबाज को अपना संयम बनाए रखना चाहिए।
यही टिप्पणी यशस्वी जायसवाल को पसंद नहीं आई और उन्होंने सोशल मीडिया पर हर्षा भोगले की पोस्ट के कमेंट सेक्शन में अपनी प्रतिक्रिया दे दी।

यशस्वी जायसवाल ने दिया सीधा जवाब
यशस्वी ने अपने जवाब में कहा कि अगर किसी को यह पता ही नहीं है कि मैदान पर वास्तव में क्या कहा गया था, तो उसे पूरे मामले पर फैसला नहीं सुनाना चाहिए। भारतीय ओपनर ने आगे स्पष्ट शब्दों में कहा कि अगर कोई हद पार करता है तो उसका जवाब देना जरूरी है। उनके कमेंट का सार था कि भारत लड़ना और जवाब देना जानता है। यह टिप्पणी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर यशस्वी जायसवाल और हर्षा भोगले की चर्चा तेज हो गई। यशस्वी के बयान से यह संकेत जरूर मिलता है कि उनके मुताबिक मैदान पर जो कुछ हुआ, वह केवल एक सामान्य ‘सेंड-ऑफ’ का मामला नहीं था। हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि असिथा फर्नांडो ने उनसे कौन-से शब्द कहे थे। इसलिए इस विवाद के उस हिस्से की पूरी तस्वीर अभी सामने नहीं आई है।

क्या यशस्वी ने सही किया?
यशस्वी जायसवाल के बयान को दो अलग नजरिए से देखा जा सकता है। पहला नजरिया यह है कि खिलाड़ी को मैदान पर अपनी टीम और सम्मान के लिए मजबूती से खड़ा होना चाहिए। क्रिकेट में आक्रामकता और प्रतिस्पर्धा खेल का हिस्सा हैं और कई बार खिलाड़ी भावनाओं में प्रतिक्रिया भी दे देते हैं। लेकिन दूसरा नजरिया यह है कि किसी भी परिस्थिति में खिलाड़ी को शारीरिक टकराव से बचना चाहिए। पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय मांजरेकर ने भी इस घटना को लेकर यशस्वी की आलोचना की और कहा कि बल्लेबाज को अपना संयम बनाए रखना चाहिए। भारत के बल्लेबाजी कोच सितांशु कोटक ने भी माना कि यशस्वी को फर्नांडो के इतने करीब नहीं जाना चाहिए था। इससे साफ है कि भारतीय टीम के अंदर भी इस घटना को लेकर संयम बरतने की बात कही गई है।

‘भारत जवाब देगा’ बयान पर क्यों हो रही चर्चा?
यशस्वी जायसवाल का ‘भारत लड़ेगा और जवाब देगा’ वाला बयान अब इस पूरे विवाद का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया है। उनके इस बयान को कुछ लोग भारतीय टीम की आक्रामक मानसिकता से जोड़ रहे हैं, जबकि कुछ का मानना है कि मैदान पर जवाब देने का सबसे बेहतर तरीका बल्ले और प्रदर्शन से होना चाहिए। टेस्ट क्रिकेट में भावनाओं पर नियंत्रण बेहद महत्वपूर्ण होता है। खासकर तब, जब मुकाबला लंबा हो और पांच दिनों तक चलने वाला हो। एक छोटी सी बहस कभी-कभी टीम के लिए बड़ी परेशानी पैदा कर सकती है। यशस्वी के मामले में भी यही सवाल उठ रहा है कि क्या उन्होंने उकसावे का जवाब देकर सही किया या उन्हें बिना पलटे पवेलियन चले जाना चाहिए था। हालांकि, इस सवाल का जवाब काफी हद तक इस बात पर निर्भर करता है कि असिथा फर्नांडो ने वास्तव में उनसे क्या कहा था, जिसकी पूरी जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं है।

सोशल मीडिया पर भी गरमाया मामला
यशस्वी की टिप्पणी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर बहस तेज हो गई है। कुछ क्रिकेट फैंस युवा बल्लेबाज के समर्थन में दिखाई दे रहे हैं, जबकि कुछ यूजर्स का कहना है कि यशस्वी को अपने गुस्से पर नियंत्रण रखना चाहिए था। इस पूरे मामले में सबसे अहम बात यह है कि मैदान पर हुई घटना का पूरा संदर्भ अभी स्पष्ट नहीं है। वीडियो में दोनों खिलाड़ियों के बीच तीखी बहस और शारीरिक नजदीकी जरूर दिखाई दी, लेकिन बातचीत में इस्तेमाल किए गए सभी शब्द सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।
ऐसे में यशस्वी जायसवाल का यह कहना कि ‘अगर आपको नहीं पता कि उसने क्या कहा, तो फैसला मत सुनाइए’ इस विवाद का दूसरा पक्ष सामने रखता है।

यशस्वी जायसवाल और असिथा फर्नांडो के बीच कोलंबो टेस्ट में हुई भिड़ंत ने एक बार फिर क्रिकेट में आक्रामकता और खेल भावना को लेकर बहस छेड़ दी है। यशस्वी ने हर्षा भोगले की आलोचना का जवाब देकर अपना पक्ष साफ कर दिया है। उनका कहना है कि पूरी घटना जाने बिना किसी खिलाड़ी को दोषी ठहराना उचित नहीं है।
हालांकि, मैदान पर खिलाड़ियों के बीच प्रतिस्पर्धा और आक्रामकता अपनी जगह है, लेकिन शारीरिक टकराव से बचना भी उतना ही जरूरी है। इसलिए यशस्वी का ‘भारत लड़ेगा और जवाब देगा’ वाला बयान जहां उनके आत्मविश्वास और टीम के लिए खड़े होने की भावना को दिखाता है, वहीं यह सवाल भी कायम है कि क्या ऐसी स्थिति में सबसे बेहतर जवाब मैदान पर प्रदर्शन से देना नहीं होता।
अब सबकी नजर इस बात पर है कि इस विवाद को लेकर आगे क्या कार्रवाई होती है और भारत-श्रीलंका के बीच कोलंबो टेस्ट में दोनों टीमों का मुकाबला किस दिशा में जाता है।

