By: Mala Mandal
Childhood Sugar Intake And Cancer Risk: बचपन में खान-पान का असर सिर्फ शरीर के विकास तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लंबे समय तक स्वास्थ्य पर प्रभाव डाल सकता है। एक नई स्टडी में शोधकर्ताओं ने बचपन के शुरुआती दौर में चीनी के सेवन और आगे चलकर कुछ गंभीर बीमारियों के खतरे के बीच संबंध की जांच की है। रिसर्च में संकेत मिला है कि बचपन के शुरुआती 1,000 दिनों के दौरान कम मात्रा में मीठा खाने वाले लोगों में आगे की जिंदगी में लिवर और इंट्राहेपेटिक बाइल डक्ट कैंसर का खतरा कम हो सकता है।

यह अध्ययन ब्रिटेन के 64,761 लोगों के स्वास्थ्य और खान-पान से जुड़े आंकड़ों पर आधारित बताया गया है। शोधकर्ताओं ने शुरुआती जीवन में चीनी के सेवन और कई दशकों बाद स्वास्थ्य से जुड़े परिणामों के बीच संभावित संबंध को समझने की कोशिश की। अध्ययन के निष्कर्षों ने इस बात पर ध्यान खींचा है कि बचपन की डाइट का प्रभाव उम्र बढ़ने के साथ भी दिखाई दे सकता है।
बचपन के शुरुआती 1,000 दिन क्यों हैं महत्वपूर्ण?
बच्चे के जन्म से लेकर शुरुआती वर्षों तक का समय शरीर के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दौरान मेटाबॉलिज्म, इम्यून सिस्टम और शरीर के कई अन्य सिस्टम तेजी से विकसित होते हैं। इस अवधि में बच्चे को मिलने वाला पोषण उसके आगे के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। अगर इस दौरान खाने में जरूरत से ज्यादा अतिरिक्त चीनी शामिल हो, तो यह बच्चे की कुल डाइट की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती है। ज्यादा मीठा खाने से पौष्टिक खाद्य पदार्थों के लिए जगह कम हो सकती है। यही वजह है कि विशेषज्ञ आमतौर पर बच्चों के भोजन में अतिरिक्त चीनी को सीमित रखने की सलाह देते हैं।

रिसर्च में कैंसर के जोखिम को लेकर क्या सामने आया?
अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बचपन के शुरुआती समय में चीनी के सेवन और बाद के जीवन में अलग-अलग स्वास्थ्य परिणामों के बीच संबंधों का विश्लेषण किया। रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती जीवन में कम चीनी का सेवन करने वाले लोगों में लिवर कैंसर और इंट्राहेपेटिक बाइल डक्ट कैंसर के जोखिम के कम होने का संबंध देखा गया।
इंट्राहेपेटिक बाइल डक्ट कैंसर क्या है?
इंट्राहेपेटिक बाइल डक्ट कैंसर एक प्रकार का कैंसर है, जो लिवर के अंदर मौजूद पित्त नलिकाओं में विकसित होता है। पित्त नलिकाएं लिवर द्वारा बनाए गए बाइल को शरीर के पाचन तंत्र तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह कैंसर अपेक्षाकृत दुर्लभ माना जाता है, लेकिन इसके लक्षण शुरुआती चरण में आसानी से पहचान में नहीं आ सकते। इसी कारण शोधकर्ता इसके संभावित जोखिम कारकों को बेहतर तरीके से समझने पर लगातार काम कर रहे हैं।

क्या ज्यादा चीनी सीधे कैंसर का कारण बनती है?
इस स्टडी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि बचपन में ज्यादा चीनी खाना सीधे तौर पर कैंसर का कारण बनता है। रिसर्च में मुख्य रूप से चीनी के सेवन और बाद में कैंसर के खतरे के बीच संबंध देखा गया है। किसी भी अध्ययन में पाए गए संबंध को सीधे कारण और परिणाम के रूप में समझने से पहले कई अन्य कारकों पर भी विचार करना जरूरी होता है। व्यक्ति की पूरी डाइट, शारीरिक गतिविधि, वजन, जीवनशैली, आनुवंशिक कारक और उम्र बढ़ने के दौरान खान-पान जैसी कई चीजें स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं।

बच्चों को ज्यादा मीठा खिलाने से क्या नुकसान हो सकता है?
बच्चों के भोजन में ज्यादा मात्रा में अतिरिक्त चीनी शामिल होने से डाइट असंतुलित हो सकती है। मीठे खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थ अक्सर कैलोरी तो देते हैं, लेकिन उनमें जरूरी विटामिन, मिनरल, प्रोटीन और फाइबर की मात्रा कम हो सकती है। कम उम्र में मीठे स्वाद की आदत पड़ने से बच्चा आगे चलकर भी मीठे खाद्य पदार्थों और पेय पदार्थों को ज्यादा पसंद कर सकता है। इससे कुल कैलोरी का सेवन बढ़ने और स्वस्थ खान-पान की आदतों पर असर पड़ने की संभावना रहती है।

बच्चों की डाइट में किन चीजों पर दें ध्यान?
बच्चों को संतुलित भोजन देने की कोशिश करनी चाहिए। उनकी डाइट में उम्र के अनुसार फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, दूध या उपयुक्त डेयरी विकल्प और पर्याप्त प्रोटीन शामिल होना चाहिए। पैकेज्ड जूस, मीठे पेय, कैंडी, चॉकलेट, मिठाई और ज्यादा चीनी वाले स्नैक्स को रोजाना की डाइट का हिस्सा बनाने के बजाय सीमित मात्रा में देना बेहतर माना जाता है। बच्चों को मीठे पेय की जगह पानी या उम्र के अनुसार उपयुक्त बिना अतिरिक्त चीनी वाले विकल्प देने की आदत डाली जा सकती है।

50 साल बाद भी कैसे दिख सकता है बचपन की डाइट का असर?
रिसर्च का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यही है कि शुरुआती जीवन में खान-पान और बाद के जीवन में स्वास्थ्य के बीच संभावित संबंधों को समझने की कोशिश की गई है। शरीर के विकास के शुरुआती चरणों में पोषण मेटाबॉलिक और जैविक प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकता है। हालांकि किसी व्यक्ति के 50 साल बाद स्वास्थ्य का निर्धारण केवल बचपन में खाई गई चीनी से नहीं होता।
वयस्क जीवन में भी खान-पान, वजन, व्यायाम, शराब और तंबाकू का सेवन, नींद तथा अन्य जीवनशैली से जुड़े कारक स्वास्थ्य पर महत्वपूर्ण प्रभाव डालते हैं।

स्टडी से क्या सीख मिलती है?
इस रिसर्च से एक बार फिर यह संकेत मिलता है कि बच्चों के शुरुआती वर्षों में संतुलित और पौष्टिक आहार पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। बच्चों को मीठा पूरी तरह बंद कराने के बजाय अतिरिक्त चीनी की मात्रा को सीमित रखना और पौष्टिक भोजन की आदत विकसित करना ज्यादा व्यावहारिक तरीका हो सकता है।
माता-पिता को बच्चों के भोजन में फल, सब्जियां और अन्य पौष्टिक चीजों को प्राथमिकता देनी चाहिए। किसी भी बच्चे की डाइट में बड़ा बदलाव करने से पहले उसकी उम्र और जरूरतों के अनुसार डॉक्टर या योग्य पोषण विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर है।
यह खबर एक वैज्ञानिक अध्ययन में सामने आए निष्कर्षों और उपलब्ध जानकारी पर आधारित है। स्टडी में किसी संबंध का पाया जाना यह साबित नहीं करता कि बचपन में चीनी का सेवन सीधे तौर पर लिवर या इंट्राहेपेटिक बाइल डक्ट कैंसर का कारण या बचाव करता है। कैंसर का जोखिम कई आनुवंशिक, पर्यावरणीय, आहार और जीवनशैली से जुड़े कारकों पर निर्भर करता है। यह लेख चिकित्सकीय सलाह का विकल्प नहीं है। स्वास्थ्य से जुड़ा कोई निर्णय लेने से पहले डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह लें।

