By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
नई दिल्ली: दिल्ली की मतदाता सूची में बीजेपी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा का नाम जुड़ने को लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) और बीजेपी के बीच राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। AAP ने दावा किया है कि राघव चड्ढा का नाम दिल्ली की वोटर लिस्ट में ऐसे समय जोड़ा गया, जब पंजाब की ड्राफ्ट मतदाता सूची में उनका नाम ‘स्थायी रूप से स्थानांतरित’ के तौर पर दर्ज किया गया था। पार्टी ने इस पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए चुनाव आयोग से स्पष्टीकरण मांगा है।

मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि राघव चड्ढा का नाम दिल्ली की राजेंद्र नगर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में दिखाई दे रहा है। AAP की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने दावा किया कि 31 अगस्त को जारी ड्राफ्ट मतदाता सूची में राजेंद्र नगर क्षेत्र में 746 मतदाता थे, लेकिन बाद में सूची में राघव चड्ढा का नाम 747वें मतदाता के तौर पर दिखाई देने लगा। AAP ने इसी आधार पर चुनाव आयोग से पूरी प्रक्रिया स्पष्ट करने की मांग की है।

पंजाब की वोटर लिस्ट से शुरू हुआ विवाद
राघव चड्ढा से जुड़ा यह विवाद अचानक दिल्ली से शुरू नहीं हुआ। इससे पहले विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया के दौरान पंजाब की ड्राफ्ट मतदाता सूची से उनका नाम हटाए जाने की खबर सामने आई थी। सूची में उनके नाम के सामने ‘Permanently Shifted’ यानी स्थायी रूप से स्थानांतरित होने का उल्लेख किया गया था। इसके बाद चड्ढा ने इस कार्रवाई पर सवाल उठाए थे और इसे राजनीतिक प्रतिशोध से जोड़कर देखा था। हालांकि, मौजूदा विवाद में एक अहम बात यह है कि पंजाब की सूची से नाम हटना और दिल्ली की मतदाता सूची में नाम शामिल होना दो अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं। मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने या पता बदलने के लिए निर्धारित प्रक्रिया और दस्तावेजों का पालन करना होता है। ऐसे में AAP का मुख्य सवाल यही है कि दिल्ली में राघव चड्ढा का नाम किस प्रक्रिया के तहत जोड़ा गया और इसके लिए कौन-कौन से दस्तावेज जमा किए गए।

AAP ने चुनाव आयोग से क्या पूछा?
आम आदमी पार्टी का कहना है कि चुनाव आयोग को यह स्पष्ट करना चाहिए कि राघव चड्ढा का नाम दिल्ली की मतदाता सूची में किस आधार पर शामिल किया गया। पार्टी इस बात को लेकर भी सवाल उठा रही है कि जब उनके नाम को लेकर पंजाब में SIR प्रक्रिया के दौरान अलग स्थिति सामने आई, तो दिल्ली में उनका नाम किस तरह शामिल हुआ। AAP नेताओं ने इस मामले को सिर्फ एक व्यक्ति के वोटर रजिस्ट्रेशन का मुद्दा नहीं बताया है, बल्कि इसे मतदाता सूची तैयार करने की प्रक्रिया और उसकी पारदर्शिता से जोड़कर देखा है। पार्टी चाहती है कि चुनाव आयोग पूरे मामले पर स्थिति साफ करे, ताकि यह पता चल सके कि राघव चड्ढा का नाम जोड़ने में सभी निर्धारित नियमों का पालन हुआ है या नहीं।

राघव चड्ढा का क्या कहना है?
AAP के आरोपों के बीच बीजेपी सांसद राघव चड्ढा ने भी पलटवार किया है। उनका कहना है कि उन्होंने दिल्ली में मतदाता के रूप में पंजीकरण कराने के लिए चुनाव आयोग की निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया है। यानी चड्ढा की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि दिल्ली की वोटर लिस्ट में उनका नाम किसी गैरकानूनी तरीके से नहीं जोड़ा गया है। राघव चड्ढा का जवाब ऐसे समय आया है जब AAP और उनके बीच राजनीतिक रिश्तों में बड़ा बदलाव हो चुका है। पहले वह आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल थे, लेकिन अब बीजेपी में हैं। ऐसे में वोटर लिस्ट से जुड़ा यह मामला राजनीतिक रूप से भी काफी संवेदनशील बन गया है।

क्या एक से ज्यादा जगह वोटर के तौर पर नाम हो सकता है?
मतदाता पंजीकरण से जुड़े नियमों का मूल सिद्धांत यह है कि किसी व्यक्ति का नाम एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्रों की मतदाता सूची में नहीं होना चाहिए। यदि कोई व्यक्ति अपना सामान्य निवास बदलता है तो उसे निर्धारित प्रक्रिया के तहत नए स्थान पर मतदाता के रूप में पंजीकरण या स्थानांतरण कराना होता है। इसी वजह से राघव चड्ढा के मामले में भी सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि उनके दिल्ली में नाम जुड़ने के समय उनकी अन्य जगह की मतदाता स्थिति क्या थी और संबंधित अधिकारियों ने उनके आवेदन एवं रिकॉर्ड का किस तरह सत्यापन किया। चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और पात्र मतदाताओं के नाम सुनिश्चित करना है। आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर SIR-2026 और मतदाता सूची से संबंधित जानकारी उपलब्ध है।

SIR के बीच बढ़ा राजनीतिक विवाद
दिल्ली में इस समय मतदाता सूची का विशेष पुनरीक्षण भी राजनीतिक चर्चा का बड़ा मुद्दा बना हुआ है। ड्राफ्ट वोटर रोल में बड़ी संख्या में नामों को लेकर दावे और आपत्तियां दर्ज की जा रही हैं। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, हजारों मतदाताओं ने नाम जोड़ने और सुधार के लिए आवेदन किए हैं। ऐसे माहौल में किसी बड़े राजनीतिक नेता का नाम वोटर लिस्ट में जुड़ना स्वाभाविक रूप से राजनीतिक बहस का विषय बन गया है। AAP इसे लेकर चुनाव आयोग से जवाब मांग रही है, जबकि राघव चड्ढा का कहना है कि उन्होंने नियमों का पालन करते हुए अपना नाम दर्ज कराया है।

अब आगे क्या होगा?
फिलहाल इस विवाद का सबसे अहम पहलू चुनाव आयोग की ओर से आने वाला स्पष्टीकरण होगा। यदि आयोग यह स्पष्ट कर देता है कि राघव चड्ढा के नाम को दिल्ली की मतदाता सूची में शामिल करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया पूरी की गई थी, तो AAP के आरोपों पर स्थिति साफ हो सकती है। वहीं, यदि प्रक्रिया में कोई तकनीकी या दस्तावेजी कमी सामने आती है तो उसे नियमों के तहत ठीक किया जा सकता है। इस पूरे मामले में यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ड्राफ्ट मतदाता सूची में नाम जुड़ना या हटना अंतिम स्थिति नहीं माना जाता। SIR प्रक्रिया में दावे और आपत्तियां दर्ज करने का अवसर दिया जाता है और उसके बाद अंतिम मतदाता सूची तैयार होती है।

दिल्ली की वोटर लिस्ट में बीजेपी सांसद राघव चड्ढा का नाम जुड़ने का विवाद फिलहाल राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप के बीच है। AAP चुनाव आयोग से यह जानना चाहती है कि उनका नाम किस प्रक्रिया के तहत दिल्ली की सूची में शामिल किया गया, जबकि राघव चड्ढा का कहना है कि उन्होंने सभी निर्धारित नियमों का पालन किया है।
अब निगाहें चुनाव आयोग के स्पष्टीकरण और मतदाता सूची की आगे की प्रक्रिया पर हैं। असल तस्वीर तभी पूरी तरह साफ होगी जब संबंधित रिकॉर्ड और प्रक्रिया को लेकर आधिकारिक स्थिति सामने आएगी। फिलहाल यह मामला दिल्ली की SIR प्रक्रिया, मतदाता सूची की पारदर्शिता और AAP-BJP के बीच जारी राजनीतिक टकराव के कारण सुर्खियों में बना हुआ है।

