By: Vikash Kumar Raut (Vicky)
अगर आप भी चाय, कॉफी या सूप को इतना गर्म पीना पसंद करते हैं कि उससे भाप निकल रही हो, तो अपनी इस आदत पर थोड़ा ध्यान देने की जरूरत है। बहुत ज्यादा गर्म पेय पदार्थों का नियमित सेवन सिर्फ मुंह या जीभ को जलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि लंबे समय तक गर्म चीजें पीने से भोजन की नली यानी एसोफैगस पर भी असर पड़ सकता है। कुछ अध्ययनों में बहुत गर्म पेय पदार्थों के सेवन और एसोफैगस कैंसर के बढ़े हुए जोखिम के बीच संबंध पाया गया है। कुछ रिपोर्टों में यह जोखिम सामान्य तापमान पर पेय लेने वालों की तुलना में कई गुना अधिक बताया गया है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि गर्म चाय या कॉफी पीने वाले हर व्यक्ति को कैंसर हो जाएगा। कैंसर का जोखिम कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है।

एसोफैगस क्या होता है?
एसोफैगस को आम भाषा में भोजन की नली या खाने की नली कहा जाता है। यह मुंह और गले से भोजन को पेट तक पहुंचाने का काम करती है। जब हम खाना या कोई पेय पदार्थ निगलते हैं तो वह इसी नली के रास्ते पेट तक पहुंचता है। एसोफैगस की अंदरूनी परत लगातार बहुत गर्म चीजों के संपर्क में आती रहे तो गर्मी से होने वाली जलन और चोट का खतरा बढ़ सकता है। लंबे समय तक बार-बार होने वाली ऐसी क्षति स्वास्थ्य के लिए चिंता का विषय हो सकती है।

बहुत गर्म चाय-कॉफी से कैंसर का खतरा कैसे बढ़ सकता है?
बहुत अधिक तापमान वाले पेय पदार्थ एसोफैगस की अंदरूनी परत को नुकसान पहुंचा सकते हैं। बार-बार गर्म चीजों के संपर्क में आने से वहां जलन और सूजन जैसी समस्या हो सकती है। वैज्ञानिकों ने माना है कि लंबे समय तक होने वाली ऐसी चोट और कोशिकाओं को होने वाले नुकसान का संबंध कैंसर के जोखिम से हो सकता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ बहुत गर्म चाय, कॉफी या अन्य पेय पदार्थों को तुरंत पीने के बजाय कुछ देर ठंडा होने देने की सलाह देते हैं।

क्या सच में 3 गुना बढ़ जाता है एसोफैगस कैंसर का खतरा?
गर्म पेय पदार्थों और एसोफैगस कैंसर पर हुए अध्ययनों में अलग-अलग परिस्थितियों और तापमान के आधार पर जोखिम में वृद्धि देखी गई है। कुछ शोधों में बहुत गर्म चाय या अन्य पेय पदार्थों का सेवन करने वालों में सामान्य या कम तापमान वाले पेय की तुलना में एसोफैगस कैंसर का जोखिम लगभग तीन गुना तक अधिक पाया गया। लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। यह आंकड़ा आबादी के स्तर पर पाए गए संबंध को दर्शाता है, किसी व्यक्ति के लिए निश्चित भविष्यवाणी नहीं करता। कैंसर होने या न होने पर उम्र, तंबाकू और शराब का सेवन, खान-पान, मोटापा, आनुवंशिक कारण और अन्य स्वास्थ्य संबंधी कारक भी असर डालते हैं।

कितनी गर्म चाय या कॉफी से बचना चाहिए?
विश्व स्वास्थ्य संगठन की कैंसर रिसर्च एजेंसी ने 65 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान वाले बहुत गर्म पेय पदार्थों को एसोफैगस कैंसर के लिए संभावित जोखिम वाला माना है। इसलिए चाय, कॉफी या सूप को बहुत गर्म अवस्था में पीने के बजाय थोड़ा ठंडा होने देना बेहतर आदत है। सिर्फ तापमान ही नहीं, बल्कि पेय पदार्थ को कितनी मात्रा में और कितनी बार लिया जा रहा है, यह भी महत्वपूर्ण है। रोजाना बहुत गर्म पेय पीने की आदत हो तो धीरे-धीरे इसे बदलना बेहतर रहेगा।

चाय और कॉफी पूरी तरह छोड़ने की जरूरत है क्या?
सिर्फ इस वजह से चाय या कॉफी को पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है। चिंता मुख्य रूप से बहुत ज्यादा गर्म तापमान को लेकर है। यदि आपको चाय या कॉफी पसंद है तो उसे पीने से पहले कुछ समय इंतजार करें और जब वह पीने लायक गर्म रह जाए, तब सेवन करें। चाय या कॉफी को बार-बार गर्म करके तुरंत पीने की बजाय उचित तापमान तक आने देना एक आसान सावधानी हो सकती है।

किन लोगों को ज्यादा सावधानी बरतनी चाहिए?
जो लोग लंबे समय से बहुत गर्म चाय, कॉफी या सूप पीते हैं, उन्हें इस आदत पर विशेष ध्यान देना चाहिए। इसके अलावा धूम्रपान और अत्यधिक शराब का सेवन एसोफैगस कैंसर के महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में शामिल हैं। इन आदतों के साथ बहुत गर्म पेय पदार्थों का नियमित सेवन जोखिम को और चिंताजनक बना सकता है। इसलिए केवल चाय का तापमान कम करना ही नहीं, बल्कि तंबाकू से दूरी बनाना, शराब का सेवन सीमित करना, संतुलित आहार लेना और स्वस्थ वजन बनाए रखना भी जरूरी है।

एसोफैगस कैंसर के लक्षणों को नजरअंदाज न करें
एसोफैगस कैंसर की शुरुआत में हमेशा स्पष्ट लक्षण दिखाई दें, ऐसा जरूरी नहीं है। लेकिन लगातार निगलने में परेशानी, खाना निगलते समय दर्द, बिना वजह वजन कम होना, लंबे समय तक सीने या गले में परेशानी, लगातार अपच या भोजन के गले में अटकने जैसा महसूस होना जैसे लक्षण दिखाई दें तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। इनमें से कोई एक लक्षण होने का मतलब कैंसर होना नहीं है। ऐसे लक्षण कई अन्य कारणों से भी हो सकते हैं, लेकिन लंबे समय तक बने रहने पर जांच कराना बेहतर होता है।

आज से बदलें गर्म चाय-कॉफी पीने की आदत
अगर आपकी आदत है कि चाय या कॉफी बनते ही उसे पीना शुरू कर देते हैं, तो आज से कुछ मिनट इंतजार करने की आदत डालें। पेय को थोड़ा ठंडा होने दें और फिर आराम से पिएं। इसी तरह बहुत गर्म सूप या अन्य पेय पदार्थों को भी सीधे मुंह में लेने से बचें। छोटी-सी सावधानी लंबे समय में आपके स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकती है।
बहुत गर्म चाय, कॉफी और अन्य पेय पदार्थों का नियमित सेवन एसोफैगस यानी भोजन की नली के लिए नुकसानदायक हो सकता है। शोधों में बहुत गर्म पेय और एसोफैगस कैंसर के जोखिम के बीच संबंध पाया गया है और कुछ अध्ययनों में जोखिम कई गुना अधिक बताया गया है।
हालांकि, इसे यह मान लेना सही नहीं होगा कि गर्म चाय या कॉफी सीधे कैंसर का कारण बनती है या हर गर्म पेय पीने वाले व्यक्ति को कैंसर होगा। सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि चाय, कॉफी और सूप को बहुत गर्म अवस्था में पीने से बचें और अन्य ज्ञात जोखिम कारकों से भी दूरी बनाए रखें।
यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी और उपलब्ध वैज्ञानिक अध्ययनों पर आधारित है। इसमें दी गई जानकारी किसी बीमारी का निदान, इलाज या व्यक्तिगत चिकित्सकीय सलाह नहीं है। गर्म पेय पदार्थ और एसोफैगस कैंसर के बीच संबंध पर शोध उपलब्ध है, लेकिन व्यक्तिगत जोखिम कई अन्य कारकों पर निर्भर करता है। यदि आपको निगलने में लगातार परेशानी, बिना वजह वजन कम होना, सीने या गले में लगातार दर्द अथवा कोई अन्य चिंताजनक लक्षण है, तो योग्य डॉक्टर से सलाह लें।

