By: Vikash Kumar (Vicky)
नई दिल्ली: देश में नेशनल हाईवे को ज्यादा सुरक्षित, सुगम और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने की दिशा में भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने नई गाइडलाइन जारी की है। 21 सितंबर 2026 को जारी इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे के प्लानिंग और डिजाइन में एकरूपता लाना है। नई व्यवस्था के तहत सड़क की लेन संरचना और कॉरिडोर की चौड़ाई को यातायात के अनुमान के आधार पर तय किया जाएगा। यह गाइडलाइन एक्सप्रेसवे से अलग आगामी 4-लेन और 6-लेन ग्रीनफील्ड तथा ब्राउनफील्ड हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे पर लागू होगी। इसका मकसद अलग-अलग परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाले तकनीकी मानकों को एक समान करना, सड़क सुरक्षा बढ़ाना और हाई-स्पीड कॉरिडोर पर यातायात को ज्यादा व्यवस्थित बनाना है।

कितनी होगी हाईवे की चौड़ाई?
नई गाइडलाइन में हाईवे की चौड़ाई को यातायात के अनुमान से जोड़ा गया है। यानी जिस कॉरिडोर पर जितना अधिक ट्रैफिक होगा, वहां उसी के अनुसार लेन और स्ट्रक्चर का प्रावधान किया जाएगा।
15,000 वाहनों तक का ट्रैफिक:ऐसे हाई-स्पीड कॉरिडोर में 4-लेन हाईवे और 4-लेन स्ट्रक्चर का प्रावधान होगा। इसकी कॉरिडोर चौड़ाई 60 मीटर निर्धारित की गई है।
15,000 से 25,000 वाहनों तक का ट्रैफिक: इस श्रेणी में 4-लेन हाईवे और 6-लेन स्ट्रक्चर का प्रावधान होगा। ऐसे कॉरिडोर की चौड़ाई 70 मीटर रखी जाएगी।
25,000 से 40,000 वाहनों तक का ट्रैफिक:अधिक ट्रैफिक वाले कॉरिडोर में 6-लेन हाईवे और 6-लेन स्ट्रक्चर का प्रावधान होगा। इसकी कॉरिडोर चौड़ाई भी 70 मीटर होगी।

60 और 70 मीटर का मतलब क्या है?
यहां यह समझना जरूरी है कि 60 मीटर या 70 मीटर किसी एक लेन की चौड़ाई नहीं है। ये पूरे हाईवे कॉरिडोर की निर्धारित चौड़ाई है। इसमें सड़क से जुड़े अलग-अलग हिस्सों और आवश्यक संरचनाओं को ध्यान में रखा जाता है।इसलिए अगर किसी रिपोर्ट में यह कहा जाए कि नई गाइडलाइन के तहत “एक लेन 60 या 70 मीटर की होगी”, तो यह तकनीकी रूप से सही नहीं होगा। NHAI की गाइडलाइन में 60 और 70 मीटर का उल्लेख कॉरिडोर की कुल चौड़ाई के संदर्भ में किया गया है।

ट्रैफिक के हिसाब से तय होगी लेन
नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि हाई-स्पीड नेशनल हाईवे की लेन संरचना विस्तृत ट्रैफिक आकलन के आधार पर निर्धारित की जाएगी। इससे सड़क की क्षमता को वास्तविक और अनुमानित यातायात के अनुरूप रखने में मदद मिलेगी। कम ट्रैफिक वाले कॉरिडोर में 4-लेन व्यवस्था पर्याप्त हो सकती है, जबकि ज्यादा ट्रैफिक वाले कॉरिडोर में 6-लेन व्यवस्था का प्रावधान किया जाएगा। इस तरह हाईवे के डिजाइन में वर्तमान के साथ भविष्य में बढ़ने वाले यातायात को भी ध्यान में रखा जाएगा।

हाईवे पर प्रवेश और निकास होगा नियंत्रित
नई गाइडलाइन केवल सड़क की चौड़ाई तक सीमित नहीं है। इसमें एक्सेस कंट्रोल को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। हाई-स्पीड नेशनल हाईवे पर वाहनों के अनियंत्रित प्रवेश और निकास को रोकने के लिए इंटरचेंज और रैंप की व्यवस्था की जाएगी। एक्सप्रेसवे, नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और महत्वपूर्ण आर्टेरियल रोड के साथ-साथ बंदरगाह, एयरपोर्ट, मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स पार्क, औद्योगिक क्षेत्र और बड़े पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़कों पर आवश्यकतानुसार इंटरचेंज बनाए जाएंगे।

अवैध प्रवेश और अतिक्रमण रोकने की तैयारी
हाई-स्पीड कॉरिडोर पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए NHAI ने बाहरी किनारे पर 1 मीटर ऊंची बाउंड्री वॉल का भी प्रावधान किया है। इसका उद्देश्य अनधिकृत प्रवेश, अतिक्रमण और आवारा पशुओं के हाईवे पर आने की संभावना को कम करना है। हाई-स्पीड सड़क पर अचानक पैदल यात्री, स्थानीय वाहन या पशु आ जाने से दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है। नियंत्रित प्रवेश और बाउंड्री व्यवस्था इस तरह के जोखिम को कम करने के लिए डिजाइन का हिस्सा होगी।

एंट्री और एग्जिट की पहले मिलेगी जानकारी
नई गाइडलाइन में हाई-स्पीड ट्रैफिक के लिए एडवांस नोटिफिकेशन पर भी जोर दिया गया है। यानी हाईवे उपयोगकर्ताओं को आगे आने वाले प्रवेश और निकास बिंदुओं की पहले से जानकारी देने की व्यवस्था की जाएगी, ताकि वाहन चालक समय रहते अपनी दिशा और लेन बदलने का निर्णय ले सकें। इसका उद्देश्य हाई-स्पीड कॉरिडोर पर अचानक लेन बदलने और अनियोजित एंट्री-एग्जिट से होने वाले जोखिम को कम करना है।

देश में बढ़ेंगे हाई-स्पीड कॉरिडोर
NHAI की नई गाइडलाइन ऐसे समय आई है जब देश में एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर के नेटवर्क को बड़े स्तर पर विकसित करने की योजना पर काम हो रहा है। सरकार के दीर्घकालिक विजन में 2047 तक लगभग 50,000 किलोमीटर एक्सेस-कंट्रोल्ड हाई-स्पीड कॉरिडोर विकसित करने का लक्ष्य बताया गया है। ऐसे में हाईवे परियोजनाओं की DPR यानी Detailed Project Report तैयार करने से लेकर डिजाइन और निर्माण तक एक समान तकनीकी मानक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

मौजूदा हाईवे पर क्या होगा असर?
नई गाइडलाइन को लेकर सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या देश के सभी मौजूदा नेशनल हाईवे अब 60 या 70 मीटर चौड़े कर दिए जाएंगे? इसका जवाब है—ऐसा सीधे तौर पर नहीं कहा गया है। NHAI के मुताबिक नई व्यवस्था आगामी 4/6-लेन ग्रीनफील्ड और ब्राउनफील्ड हाई-स्पीड एक्सेस-कंट्रोल्ड नेशनल हाईवे परियोजनाओं की योजना और डिजाइन के लिए है। इसलिए किसी मौजूदा नेशनल हाईवे का चौड़ीकरण संबंधित परियोजना, ट्रैफिक जरूरत और स्वीकृत डिजाइन के आधार पर ही होगा।
NHAI की नई गाइडलाइन का मुख्य फोकस हाई-स्पीड नेशनल हाईवे के डिजाइन में एकरूपता, सड़क सुरक्षा और बेहतर यातायात संचालन पर है। 15,000 वाहनों तक के ट्रैफिक के लिए 4-लेन हाईवे और 4-लेन स्ट्रक्चर के साथ 60 मीटर कॉरिडोर, जबकि 15,000 से 25,000 वाहनों के लिए 4-लेन हाईवे और 6-लेन स्ट्रक्चर के साथ 70 मीटर कॉरिडोर रखा गया है। वहीं 25,000 से 40,000 वाहनों के ट्रैफिक वाले कॉरिडोर में 6-लेन हाईवे और 6-लेन स्ट्रक्चर के साथ 70 मीटर चौड़ाई निर्धारित की गई है।
इसके साथ इंटरचेंज, नियंत्रित प्रवेश-निकास और 1 मीटर ऊंची बाउंड्री वॉल जैसे प्रावधान हाई-स्पीड कॉरिडोर को ज्यादा व्यवस्थित और सुरक्षित बनाने की दिशा में किए गए हैं

