By: Mala Mandal
देवघर। शारदीय नवरात्र को लेकर देवघर में दुर्गा पूजा की तैयारियां तेज हो गई हैं। शहर के विभिन्न पूजा समितियों की ओर से पूजा पंडालों के निर्माण, विद्युत सज्जा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और श्रद्धालुओं की सुविधा को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में पहुंचने लगी हैं। इसी क्रम में गौशाला स्थित झौसागढ़ी दुर्गा पूजा समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में आगामी दुर्गा पूजा को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। इस वर्ष समिति द्वारा 48वें वर्ष दुर्गा पूजा का आयोजन किया जा रहा है। समिति ने पूजा को सादगीपूर्ण तरीके से संपन्न कराने के साथ-साथ आकर्षक पंडाल के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने का निर्णय लिया है।

1979 में 17 सदस्यों ने शुरू की थी पूजा
समिति के अध्यक्ष कृष्ण प्रसाद चौधरी ने बताया कि झौसागढ़ी दुर्गा पूजा समिति की स्थापना वर्ष 1979 में हुई थी। उस समय मोहल्ले के करीब 17 सदस्यों ने स्थानीय लोगों के सहयोग से मां दुर्गा की पूजा की शुरुआत की थी। धीरे-धीरे यह आयोजन क्षेत्र की प्रमुख दुर्गा पूजा में शामिल हो गया। उन्होंने बताया कि देवघर में पूजा पंडाल निर्माण की शुरुआती परंपरा को आगे बढ़ाने में झौसागढ़ी दुर्गा पूजा समिति की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। समिति के अध्यक्ष ने पूजा से जुड़ी पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया कि एक वर्ष पूजा के छठे दिन तेज बारिश के कारण पूजा पंडाल गिर गया था। पंडाल गिरने के बाद समिति के सदस्यों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई थी। इसके बावजूद समिति के 17 सदस्यों ने कारीगरों के साथ मिलकर पूरी रात मेहनत की और सुबह करीब नौ बजे तक पंडाल को दोबारा तैयार कर दिया। इसके बाद निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मां दुर्गा की प्रतिमा के आगमन की व्यवस्था की गई। समिति के सदस्यों के लिए यह घटना आज भी पूजा आयोजन के प्रति समर्पण और सामूहिक प्रयास की मिसाल बनी हुई है।

वर्ष 1980 में हुआ था सांस्कृतिक कार्यक्रम
झौसागढ़ी दुर्गा पूजा समिति के इतिहास में सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी विशेष स्थान रहा है। समिति के अनुसार, वर्ष 1980 में पहली बार देवघर के किसी दुर्गा पूजा पंडाल में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन समिति की ओर से कराया गया था। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध भजन गायक लखबीर सिंह लक्खा ने प्रस्तुति दी थी। उस दौर में इस तरह के आयोजन को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखने को मिला था। समिति के पुराने सदस्य आज भी उस आयोजन को पूजा समिति के इतिहास की महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में याद करते हैं।

10 लाख रुपये के बजट से बनेगा आकर्षक पंडाल
इस वर्ष झौसागढ़ी दुर्गा पूजा समिति द्वारा करीब 10 लाख रुपये के अनुमानित बजट में पूजा आयोजन की तैयारी की जा रही है। समिति की ओर से सादगीपूर्ण पूजा-अर्चना के साथ आकर्षक पंडाल तैयार कराया जाएगा। पंडाल निर्माण में फोम, कपड़े और विभिन्न प्रकार के डिजाइन का इस्तेमाल किया जाएगा। समिति के अनुसार, प्रस्तावित पूजा पंडाल की ऊंचाई करीब 60 फीट, चौड़ाई लगभग 50 फीट और अंदर की लंबाई करीब 35 फीट होगी। पंडाल को आकर्षक रूप देने के साथ श्रद्धालुओं की आवाजाही को ध्यान में रखते हुए व्यवस्था की जाएगी। पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए प्रवेश और निकास व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

पर्यावरण संरक्षण का संदेश देगा पूजा पंडाल
इस वर्ष झौसागढ़ी दुर्गा पूजा समिति ने पर्यावरण संरक्षण और जागरूकता को विशेष प्राथमिकता देने का निर्णय लिया है। पूजा पंडाल और आसपास के परिसर में पर्यावरण संरक्षण से जुड़े स्लोगन और आकर्षक चित्र लगाए जाएंगे। इनके माध्यम से श्रद्धालुओं और आम लोगों को प्रकृति संरक्षण, स्वच्छ वातावरण तथा पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का संदेश देने का प्रयास किया जाएगा। समिति का उद्देश्य है कि दुर्गा पूजा केवल धार्मिक आयोजन तक सीमित न रहे, बल्कि सामाजिक जागरूकता का माध्यम भी बने। पंडाल में प्रदर्शित किए जाने वाले संदेशों के माध्यम से बच्चों और युवाओं को भी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने की कोशिश की जाएगी।

विद्युत सज्जा और मनोरंजन की भी रहेगी व्यवस्था
हर वर्ष की तरह इस बार भी पूजा पंडाल और आसपास के क्षेत्र में आकर्षक विद्युत सज्जा की जाएगी। रंग-बिरंगी रोशनी और सजावटी लाइटों से पूजा परिसर को आकर्षक रूप देने की तैयारी है। पूजा के दौरान बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले, मिकी माउस और विभिन्न प्रकार की खेल सामग्री की व्यवस्था भी की जाएगी। इसके अलावा बच्चों से लेकर बड़ों तक के लिए अलग-अलग प्रकार के व्यंजनों के स्टॉल लगाए जाएंगे। इससे पूजा के दौरान आने वाले श्रद्धालुओं को मनोरंजन के साथ खान-पान की सुविधाएं भी उपलब्ध होंगी।

अष्टमी-नवमी को प्रसाद वितरण
दुर्गा पूजा के अष्टमी और नवमी के दिन समिति की ओर से श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया जाएगा। समिति के सदस्यों ने बताया कि प्रसाद वितरण के दौरान भीड़ को नियंत्रित करने और श्रद्धालुओं को व्यवस्थित तरीके से प्रसाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाएगी।
सप्तमी से नवमी तक सुरक्षा पर रहेगा विशेष जोर
सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दौरान पूजा पंडाल में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना रहती है। इसे देखते हुए समिति की ओर से सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने का निर्णय लिया गया है। पूजा परिसर में बड़ी संख्या में वालंटियर तैनात किए जाएंगे, जो श्रद्धालुओं की सहायता के साथ भीड़ को व्यवस्थित करने में सहयोग करेंगे। इसके अलावा पुलिस प्रशासन से भी आवश्यक सहयोग लिया जाएगा। समिति की ओर से श्रद्धालुओं से पूजा के दौरान व्यवस्था बनाए रखने और वालंटियरों एवं प्रशासन का सहयोग करने की अपील की जाएगी।

21 अक्टूबर को होगा प्रतिमा विसर्जन
समिति के अनुसार, दुर्गा पूजा आयोजन के बाद 21 अक्टूबर को एकादशी तिथि पर मां दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन किया जाएगा। विसर्जन को लेकर भी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी की जाएंगी।
बैठक में समिति के उपाध्यक्ष महेश सिंह, विनय केसरी, सचिव सुनील कुमार अग्रवाल समेत समिति के दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद थे। बैठक में सभी सदस्यों ने शांतिपूर्ण और व्यवस्थित तरीके से दुर्गा पूजा संपन्न कराने को लेकर अपनी जिम्मेदारियों पर चर्चा की। समिति का कहना है कि इस बार धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक और पर्यावरणीय जागरूकता को भी पूजा आयोजन का हिस्सा बनाया जाएगा।


