By: Vikash Kumar (Vicky)
भारत में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण को बढ़ावा देने के बाद अब फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और ज्यादा इथेनॉल इस्तेमाल करने वाली तकनीक पर जोर दिया जा रहा है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी लंबे समय से फ्लेक्स-फ्यूल इंजन को बढ़ावा देने की वकालत करते रहे हैं। ऐसे इंजन पेट्रोल के साथ अलग-अलग अनुपात वाले इथेनॉल मिश्रण पर चल सकते हैं और तकनीकी रूप से E100 यानी 100 प्रतिशत इथेनॉल पर भी चलने के लिए डिजाइन किए जा सकते हैं।

E20 के बाद E100 की चर्चा क्यों?
भारत में E20 पेट्रोल का मतलब पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक इथेनॉल का मिश्रण है। सरकार के अनुसार 2025-26 में देश ने 20 प्रतिशत इथेनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य निर्धारित समय से पांच साल पहले हासिल किया। इसके साथ ही सरकार अब वैकल्पिक ईंधन और फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के जरिए पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता कम करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। हालांकि, यह समझना जरूरी है कि देश में सामान्य पेट्रोल को सीधे E100 में बदलने की बात नहीं है। E100 जैसे ईंधन के इस्तेमाल के लिए ऐसे वाहनों की आवश्यकता होती है जिनके इंजन और ईंधन सिस्टम को इसके लिए डिजाइन और प्रमाणित किया गया हो। सरकार ने E100 के लिए ईंधन संबंधी तकनीकी मानक भी निर्धारित किए हैं।

क्या है फ्लेक्स-फ्यूल इंजन?
फ्लेक्स-फ्यूल इंजन यानी Flex Fuel Engine ऐसा इंजन है जो पेट्रोल और इथेनॉल के अलग-अलग मिश्रणों पर चलने में सक्षम होता है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि वाहन एक ही प्रकार के ईंधन पर निर्भर नहीं रहता। उपलब्ध ईंधन के अनुसार पेट्रोल-इथेनॉल मिश्रण का इस्तेमाल किया जा सकता है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी पहले भी कह चुके हैं कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहन 100 प्रतिशत पेट्रोल, 100 प्रतिशत बायो-इथेनॉल या दोनों के अलग-अलग मिश्रण पर चल सकते हैं। सरकार ने वाहन निर्माताओं को फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया है।

किसानों को कैसे मिल सकता है फायदा?
इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ना, मक्का, चावल और अन्य कृषि आधारित कच्चे माल का इस्तेमाल किया जाता है। ऐसे में इथेनॉल की मांग बढ़ने से कृषि उत्पादों के लिए अतिरिक्त बाजार तैयार हो सकता है। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार देश में इथेनॉल उत्पादन क्षमता 2014 में करीब 421 करोड़ लीटर से बढ़कर 2026 में लगभग 2,000 करोड़ लीटर हो गई है। सरकार के मुताबिक इथेनॉल कार्यक्रम ने किसानों की आय को समर्थन देने के साथ विदेशी मुद्रा की बचत और कच्चे तेल के आयात में कमी में भी योगदान दिया है। सरकार ने यह भी बताया है कि अगर भविष्य में नए दोपहिया और चार पहिया वाहनों की बिक्री का 50 प्रतिशत हिस्सा फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों का हो जाता है, तो इससे इथेनॉल की अतिरिक्त मांग पैदा हो सकती है और किसानों को अतिरिक्त आय का अवसर मिल सकता है। पेट्रोलियम मंत्री के अनुसार इस स्थिति में किसानों की अतिरिक्त आय करीब ₹12,403 करोड़ तक हो सकती है। यह एक अनुमानित संभावित प्रभाव है, मौजूदा आय का आंकड़ा नहीं।

पेट्रोलियम आयात पर क्या असर पड़ेगा?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे तेल का आयात करता है। इसलिए घरेलू स्तर पर तैयार होने वाले वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल बढ़ने से आयातित पेट्रोलियम पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है। सरकार के अनुसार Ethanol Blended Petrol Programme के कारण अब तक 1.97 लाख करोड़ रुपये से अधिक की विदेशी मुद्रा की बचत हुई है और करीब 316 लाख मीट्रिक टन कच्चे तेल के बराबर आयात का स्थान लिया गया है। सरकार ने यह भी बताया कि कार्यक्रम के माध्यम से किसानों को 1.66 लाख करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान हुआ है। इस लिहाज से फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक को केवल ऑटोमोबाइल सेक्टर की तकनीकी बदलाव के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे ऊर्जा सुरक्षा, कृषि और आयात बिल से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

पर्यावरण के लिहाज से भी अहम
इथेनॉल को पेट्रोलियम आधारित ईंधन के विकल्प के रूप में इस्तेमाल करने का एक उद्देश्य वाहनों से होने वाले उत्सर्जन को कम करना भी है। हालांकि किसी भी ईंधन के वास्तविक पर्यावरणीय प्रभाव का आकलन उसके उत्पादन, परिवहन और वाहन में इस्तेमाल समेत पूरे जीवन-चक्र के आधार पर किया जाना जरूरी होता है। सरकार के अनुसार इथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम से अब तक लगभग 952 लाख मीट्रिक टन CO₂ उत्सर्जन में कमी आई है।

E20 से आगे की राह कैसी होगी?
फिलहाल E20 देश के पेट्रोल ब्लेंडिंग कार्यक्रम का महत्वपूर्ण स्तर है। सरकार ने जुलाई 2026 में स्पष्ट किया था कि देशभर में पेट्रोल के बेस ब्लेंडिंग स्तर को E20 से आगे बढ़ाने का कोई निर्णय उस समय नहीं लिया गया था। भविष्य में अधिक इथेनॉल मिश्रण को लेकर कोई फैसला वैज्ञानिक और तकनीकी अध्ययन तथा संबंधित हितधारकों से सलाह के बाद लिया जाएगा। यानी E100 का मुद्दा फिलहाल सामान्य पेट्रोल को E100 बनाने के बजाय E100 जैसे ईंधन पर चल सकने वाले सक्षम फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और इंजन तकनीक के विकास से जुड़ा है।

ऑटो सेक्टर में बढ़ रही है फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक
2026 में भारत में फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों की दिशा में व्यावहारिक कदम भी सामने आए हैं। जून 2026 में देश का पहला फ्लेक्स-फ्यूल पैसेंजर वाहन लॉन्च किया गया, जो E20 से E100 तक के इथेनॉल-पेट्रोल मिश्रण पर चलने की क्षमता के साथ पेश किया गया। उसी अवसर पर भारत में फ्लेक्स-फ्यूल तकनीक के विस्तार और किसानों को इससे मिलने वाले संभावित लाभ पर भी जोर दिया गया। इससे संकेत मिलता है कि आने वाले समय में वाहन कंपनियों, ईंधन कंपनियों और सरकार के सामने फ्लेक्स-फ्यूल इंजन के साथ-साथ पर्याप्त इथेनॉल उपलब्धता, ईंधन वितरण ढांचे और उपभोक्ता जागरूकता को मजबूत करने की चुनौती भी होगी।
E20 के बाद भारत में वैकल्पिक ईंधन को लेकर चर्चा अब फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों और E100 जैसी उच्च इथेनॉल क्षमता वाली तकनीक तक पहुंच रही है। नितिन गडकरी लंबे समय से ऐसी तकनीक के पक्षधर रहे हैं, जिसका उद्देश्य पेट्रोलियम आयात पर निर्भरता घटाने और कृषि क्षेत्र को इथेनॉल की बढ़ती मांग से जोड़ना है।
हालांकि E100 का व्यापक इस्तेमाल तभी संभव होगा जब पर्याप्त उत्पादन, वितरण व्यवस्था और उसके अनुरूप प्रमाणित वाहन उपलब्ध हों। इसलिए आने वाले वर्षों में भारत की ऊर्जा नीति में इथेनॉल, फ्लेक्स-फ्यूल इंजन और किसानों की भूमिका महत्वपूर्ण विषय बने रह सकते हैं।

