By: Vikash Kumar (Vicky)

आज 4 अक्टूबर 2026, रविवार को आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है। धार्मिक दृष्टि से आज का दिन काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि आज पितृ पक्ष की मातृ नवमी और जितिया व्रत के पारण का विशेष संयोग बन रहा है। मातृ नवमी के दिन माताओं और परिवार की दिवंगत महिलाओं के निमित्त श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने की परंपरा है। वहीं, 3 अक्टूबर को रखा गया जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत आज पारण के साथ संपन्न होगा।
पंचांग के अनुसार आज पुनर्वसु नक्षत्र रहेगा। दिन में परिघ योग के बाद शिव योग का संयोग बनेगा। ऐसे में पूजा-पाठ, पितरों का स्मरण और धार्मिक अनुष्ठान करने के लिए दिन का विशेष महत्व माना जा रहा है।
मातृ नवमी का क्या है महत्व?
पितृ पक्ष की नवमी तिथि को मातृ नवमी के नाम से जाना जाता है। मान्यता है कि इस दिन परिवार की दिवंगत माताओं, दादी, नानी और अन्य महिला पूर्वजों के निमित्त श्राद्ध एवं तर्पण करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। जिन परिवारों में मातृ पक्ष से जुड़े पूर्वजों का श्राद्ध नवमी तिथि को करने की परंपरा है, उनके लिए आज का दिन विशेष माना जाता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मातृ नवमी पर श्रद्धा और विधि-विधान से पितरों का स्मरण करने से परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन कराना, वस्त्र या सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है।

आज जितिया व्रत का होगा पारण
जितिया व्रत या जीवित्पुत्रिका व्रत माताएं अपनी संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना से करती हैं। 2026 में जितिया का निर्जला व्रत 3 अक्टूबर को रखा गया था और 4 अक्टूबर को इसका पारण किया जाएगा। उपलब्ध गणना के अनुसार पारण सुबह 7:28 बजे के बाद किया जा सकता है। हालांकि पारण का सही समय स्थानीय पंचांग और क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार देखना उचित रहेगा।
जितिया पारण कैसे करें?
व्रत रखने वाली महिलाओं को पारण के समय सबसे पहले स्नान करके साफ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद भगवान सूर्य और भगवान जीमूतवाहन का स्मरण कर पूजा करने के बाद व्रत खोलने की परंपरा है। पारण के लिए घर की पारंपरिक विधि का पालन करना शुभ माना जाता है। निर्जला व्रत के बाद अचानक बहुत भारी भोजन करने के बजाय हल्के और सुपाच्य भोजन से पारण करना बेहतर माना जाता है। जिन महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी कोई समस्या है, उन्हें व्रत और पारण के संबंध में चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।

4 अक्टूबर का अभिजीत मुहूर्त
आज अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक रहने का उल्लेख है। इस अवधि को शुभ कार्यों के लिए उपयोगी माना जाता है। पूजा, धार्मिक संकल्प या अन्य शुभ कार्य करने वाले लोग स्थानीय पंचांग के अनुसार समय की पुष्टि कर सकते हैं।
आज का ब्रह्म मुहूर्त
आज ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:47 बजे से 5:35 बजे तक बताया गया है। धार्मिक मान्यताओं में ब्रह्म मुहूर्त को पूजा, ध्यान, मंत्र जाप और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष माना जाता है।

आज का राहुकाल
4 अक्टूबर 2026 को राहुकाल शाम 4:39 बजे से 6:07 बजे तक बताया गया है। राहुकाल को ज्योतिषीय मान्यताओं में शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त नहीं माना जाता है। इसलिए इस अवधि में कोई नया महत्वपूर्ण काम शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
आज का सूर्योदय और सूर्यास्त
आज सूर्योदय लगभग सुबह 6:23 बजे और सूर्यास्त शाम 6:07 बजे के आसपास रहेगा। हालांकि सूर्योदय और सूर्यास्त का समय शहर और स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकता है।

आज की तिथि और नक्षत्र
आज आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि है। पंचांग के अनुसार नवमी तिथि 4 अक्टूबर की सुबह लगभग 5:52 बजे शुरू हुई और 5 अक्टूबर की तड़के तक रहने की जानकारी दी गई है। आज पुनर्वसु नक्षत्र का प्रभाव रहेगा।
आज के प्रमुख शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:47 बजे से 5:35 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:39 बजे तक
अमृत काल: रात 9:56 बजे से 11:27 बजे तक
जितिया व्रत पारण: सुबह 7:28 बजे के बाद, उपलब्ध गणना के अनुसार

आज के प्रमुख अशुभ समय
राहुकाल: शाम 4:39 बजे से 6:07 बजे तक
यमगंड: दोपहर 12:15 बजे से 1:43 बजे तक
कुलिक काल: दोपहर 3:11 बजे से 4:39 बजे तक
दुर्मुहूर्त: शाम 4:33 बजे से 5:20 बजे तक
वर्ज्य: दोपहर 12:51 बजे से 2:22 बजे तक

आज क्या करें?
मातृ नवमी के अवसर पर दिवंगत मातृ पक्ष के पूर्वजों का श्रद्धापूर्वक स्मरण करें। सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण या जरूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराएं और दान-पुण्य करें। घर में पूजा-पाठ और मंत्र जाप कर सकते हैं। जितिया व्रत रखने वाली महिलाएं विधि-विधान से पूजा करने के बाद उचित समय पर पारण करें।
आज क्या न करें?
पितृ पक्ष के दौरान अनावश्यक विवाद और क्रोध से बचना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस अवधि में पितरों का अपमान या उनके प्रति अनादर करना उचित नहीं माना जाता। राहुकाल जैसे अशुभ माने जाने वाले समय में नए महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से भी बचने की परंपरा है।
4 अक्टूबर का धार्मिक महत्व
4 अक्टूबर 2026 का दिन धार्मिक रूप से इसलिए खास है क्योंकि एक तरफ मातृ नवमी के माध्यम से मातृ पक्ष के पूर्वजों का स्मरण किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना से रखा गया जितिया व्रत पारण के साथ पूरा होगा। इस कारण आज का दिन पूजा, पितृ तर्पण, दान-पुण्य और पारिवारिक मंगलकामना के लिए विशेष माना जा रहा है।

आज का पंचांग एक नजर में
दिन: रविवार
तारीख: 4 अक्टूबर 2026
मास: आश्विन
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: नवमी
विशेष: मातृ नवमी, नवमी श्राद्ध, जितिया व्रत पारण
नक्षत्र: पुनर्वसु
अभिजीत मुहूर्त: 11:52 AM से 12:39 PM
राहुकाल: 4:39 PM से 6:07 PM
सूर्योदय: 6:23 AM
सूर्यास्त: 6:07 PM
यह जानकारी धार्मिक मान्यताओं और प्रकाशित पंचांग गणनाओं पर आधारित है। शुभ-अशुभ मुहूर्त और व्रत-पारण के समय में स्थान, शहर तथा स्थानीय पंचांग के अनुसार अंतर हो सकता है। इसलिए किसी विशेष धार्मिक अनुष्ठान या व्रत के लिए अपने स्थानीय पंचांग अथवा योग्य पंडित से समय की पुष्टि अवश्य करें।

