By: Vikash Kumar (Vicky)
खाना खाने के बाद अचानक पेट में दर्द, मरोड़, उल्टी, दस्त या जी मिचलाने जैसी समस्या होने लगे तो यह फूड पॉइजनिंग का संकेत हो सकता है। दूषित भोजन या पानी के कारण शरीर में बैक्टीरिया, वायरस या अन्य संक्रमण पहुंचने पर पाचन तंत्र प्रभावित हो सकता है। इसकी वजह से पेट में ऐंठन और दर्द के साथ बार-बार टॉयलेट जाना पड़ सकता है। फूड पॉइजनिंग में पेट दर्द हर व्यक्ति में अलग-अलग हो सकता है। कुछ लोगों को हल्का दर्द और मरोड़ होती है, जबकि कुछ लोगों में तेज ऐंठन के साथ उल्टी और दस्त की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में दर्द को तुरंत दबाने के बजाय शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी न होने देना सबसे जरूरी होता है।

फूड पॉइजनिंग में पेट दर्द से राहत पाने का आसान तरीका
डॉक्टरों के अनुसार फूड पॉइजनिंग के दौरान सबसे जरूरी है शरीर को पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ देना। दस्त या उल्टी होने पर शरीर से पानी और इलेक्ट्रोलाइट तेजी से कम हो सकते हैं। इसलिए थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी, ओआरएस या अन्य उपयुक्त तरल पदार्थ लेते रहें। एक साथ बहुत ज्यादा पानी पीने के बजाय कुछ-कुछ अंतराल पर थोड़ी मात्रा में तरल लेना बेहतर हो सकता है। यदि उल्टी हो रही है तो छोटे-छोटे घूंट से शुरुआत करें।

ORS हो सकता है सबसे जरूरी
फूड पॉइजनिंग में दस्त और उल्टी के कारण शरीर में पानी के साथ सोडियम और अन्य इलेक्ट्रोलाइट की कमी हो सकती है। ऐसे में ORS शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी को पूरा करने में मदद करता है। बाजार में मिलने वाले पैकेट वाले ORS को पैकेट पर दिए निर्देश के अनुसार ही पानी में घोलें। तैयार घोल को बहुत देर तक रखने के बजाय निर्देश के अनुसार इस्तेमाल करें।
पेट को दें आराम
फूड पॉइजनिंग के दौरान पाचन तंत्र को आराम देना जरूरी है। जब तक उल्टी और तेज मरोड़ जैसी समस्या बनी रहे, तब तक बहुत ज्यादा तला-भुना, मसालेदार या भारी खाना खाने से बचें। जब भूख लगने लगे और उल्टी कम हो जाए तो हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन थोड़ी मात्रा में लिया जा सकता है। जैसे-जैसे तबीयत बेहतर हो, सामान्य भोजन धीरे-धीरे शुरू किया जा सकता है।

किन चीजों से बनानी चाहिए दूरी?
फूड पॉइजनिंग के दौरान कुछ चीजें पेट की परेशानी को बढ़ा सकती हैं। बहुत ज्यादा मसालेदार और तला-भुना भोजन, शराब, अधिक कैफीन वाले पेय और बहुत ज्यादा मीठे पेय से बचना बेहतर है। दस्त के दौरान कुछ लोगों को दूध और डेयरी उत्पादों से परेशानी बढ़ सकती है। अगर ऐसा महसूस हो तो कुछ समय के लिए इनसे दूरी रखी जा सकती है।

पेट दर्द में गर्म पानी की बोतल रखें या नहीं?
हल्की पेट की ऐंठन में कुछ लोगों को पेट पर हल्की गर्म सिकाई से आराम महसूस हो सकता है। लेकिन बहुत गर्म पानी की बोतल सीधे त्वचा पर न रखें, क्योंकि इससे जलने का खतरा हो सकता है। अगर पेट दर्द लगातार बढ़ रहा है, बहुत तेज है या इसके साथ अन्य गंभीर लक्षण हैं, तो केवल गर्म सिकाई पर निर्भर न रहें और डॉक्टर से संपर्क करें।
दर्द की दवा खुद से लेने से बचें
फूड पॉइजनिंग में पेट दर्द होने पर अपनी मर्जी से कोई भी दर्द की दवा, दस्त रोकने वाली दवा या एंटीबायोटिक लेना सही नहीं है। कुछ दवाएं कुछ स्थितियों में नुकसान पहुंचा सकती हैं या बीमारी के कारण का इलाज नहीं करतीं। विशेष रूप से एंटीबायोटिक केवल डॉक्टर की सलाह पर ही लेना चाहिए, क्योंकि हर फूड पॉइजनिंग बैक्टीरियल संक्रमण के कारण नहीं होती।

दस्त रोकने वाली दवा कब न लें?
अगर दस्त के साथ तेज बुखार, खून या म्यूकस आ रहा हो, तो बिना डॉक्टर की सलाह के दस्त रोकने वाली दवा लेना उचित नहीं माना जाता। ऐसे लक्षणों में डॉक्टर से जांच कराना जरूरी हो सकता है। बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और पहले से किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों में डिहाइड्रेशन का खतरा अधिक हो सकता है। ऐसे मामलों में लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
कब तुरंत डॉक्टर के पास जाएं?
फूड पॉइजनिंग के ज्यादातर हल्के मामले कुछ समय में ठीक हो सकते हैं, लेकिन कुछ लक्षण गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं। अगर पेट दर्द बहुत तेज है या लगातार बढ़ रहा है, बार-बार उल्टी हो रही है, पानी तक नहीं रुक रहा, मल में खून आ रहा है, तेज बुखार है या बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो रही है तो डॉक्टर से जल्द संपर्क करें। पेशाब बहुत कम होना, मुंह का अत्यधिक सूखना, चक्कर आना, बेहोशी जैसा महसूस होना या अत्यधिक प्यास लगना डिहाइड्रेशन के संकेत हो सकते हैं। ऐसे लक्षणों में तुरंत चिकित्सकीय मदद लेना जरूरी है।

बच्चों में फूड पॉइजनिंग को लेकर रहें ज्यादा सावधान
बच्चों में उल्टी और दस्त के कारण शरीर में पानी की कमी तेजी से हो सकती है। इसलिए बच्चे को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में ORS देना महत्वपूर्ण हो सकता है। अगर बच्चा लगातार उल्टी कर रहा है, सुस्त दिखाई दे रहा है, पेशाब कम हो रहा है या तेज बुखार है तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लें। छोटे बच्चों को बिना डॉक्टर की सलाह के उल्टी, दस्त या पेट दर्द की दवा न दें।

फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए क्या करें?
फूड पॉइजनिंग से बचने के लिए खाना बनाने और खाने से पहले हाथों को अच्छी तरह धोना चाहिए। कच्चे और पके भोजन को अलग रखना, भोजन को अच्छी तरह पकाना और खाने को सही तापमान पर सुरक्षित रखना भी जरूरी है। बासी या लंबे समय तक कमरे के तापमान पर रखा हुआ खाना खाने से बचें। साफ और सुरक्षित पानी का इस्तेमाल करें। फल और सब्जियों को अच्छी तरह धोकर इस्तेमाल करना भी जरूरी है।

फूड पॉइजनिंग के दौरान पेट दर्द और मरोड़ काफी परेशान कर सकती है। ऐसे में सबसे पहले शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी को रोकना जरूरी है। ORS और पर्याप्त तरल पदार्थ लेने, हल्का भोजन करने और आराम करने से हल्के मामलों में राहत मिल सकती है। हालांकि तेज या लगातार पेट दर्द, खून वाले दस्त, तेज बुखार, लगातार उल्टी या डिहाइड्रेशन जैसे लक्षण होने पर घरेलू उपायों के बजाय डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के लिए है। फूड पॉइजनिंग के कारण और उसकी गंभीरता हर व्यक्ति में अलग हो सकती है। किसी भी दवा, एंटीबायोटिक या दस्त रोकने वाली दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना न करें। गंभीर लक्षण होने पर तुरंत योग्य चिकित्सक या नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।

