By: Vikash Kumar (Vicky)

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सार्वजनिक जीवन में नेतृत्व के 25 साल पूरे होने के मौके पर अपने लंबे राजनीतिक सफर को याद किया। इस दौरान उन्होंने अपने जीवन और राजनीतिक यात्रा में आए उतार-चढ़ाव, चुनौतियों, आलोचनाओं और विरोध का जिक्र करते हुए कहा कि इन अनुभवों ने उन्हें लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। प्रधानमंत्री ने अपने सफर को याद करते हुए कहा कि उन्हें गिराने वालों ने फिर से खड़ा होना सिखाया, जबकि विरोध करने वालों ने उन्हें लोकतंत्र की ताकत समझाई।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक सफर भारतीय राजनीति में लंबे समय से चर्चा का विषय रहा है। उन्होंने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी जिम्मेदारी संभाली थी। इसके बाद करीब 13 वर्षों तक गुजरात के मुख्यमंत्री रहने के बाद 2014 में वह देश के प्रधानमंत्री बने। 2019 और 2024 के लोकसभा चुनावों के बाद उन्होंने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली।
25 साल के सफर को पीएम मोदी ने कैसे याद किया?
अपने नेतृत्व के 25 साल पूरे होने के मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने राजनीतिक जीवन के अनुभवों को याद किया। उन्होंने कहा कि इस लंबे सफर में उन्हें कई तरह की परिस्थितियों का सामना करना पड़ा। कभी प्रशंसा मिली तो कभी कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। कभी राजनीतिक विरोधियों ने सवाल उठाए तो कभी उनके फैसलों को लेकर देशभर में बहस हुई।
पीएम मोदी के अनुसार, इन सभी अनुभवों ने उन्हें सीखने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उन्हें गिराने की कोशिश की, उन्होंने उन्हें दोबारा खड़े होना सिखाया। वहीं, विरोध करने वालों ने उन्हें लोकतंत्र की ताकत और उसकी अहमियत को समझने का अवसर दिया।

प्रधानमंत्री का यह बयान उनके राजनीतिक सफर के उस पहलू को सामने रखता है, जिसमें संघर्ष और आलोचना को उन्होंने सीखने के माध्यम के तौर पर देखा।
गुजरात से दिल्ली तक का सफर
नरेंद्र मोदी ने 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी राजनीतिक नेतृत्व की बड़ी जिम्मेदारी संभाली। गुजरात में उनके नेतृत्व को लेकर विकास, प्रशासन, औद्योगिक निवेश और बुनियादी ढांचे जैसे मुद्दों पर लगातार चर्चा होती रही।
2014 में भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लोकसभा चुनाव लड़ा और पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला। इसके बाद नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। 2019 में बीजेपी ने फिर बड़ी जीत हासिल की और मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने।
2024 के लोकसभा चुनाव में एनडीए को बहुमत मिलने के बाद नरेंद्र मोदी ने तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। इस तरह गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर देश के प्रधानमंत्री तक का उनका सफर भारतीय राजनीति की सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक यात्राओं में शामिल हो गया।

25 साल के नेतृत्व में किन क्षेत्रों में बदलाव की चर्चा?
प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के नेतृत्व की चर्चा करते समय कई ऐसे क्षेत्र हैं, जिनमें सरकार की नीतियों और योजनाओं को लेकर व्यापक बहस हुई है। इनमें डिजिटल इंडिया, बुनियादी ढांचा, रेलवे, सड़क निर्माण, बैंकिंग और डिजिटल भुगतान, गरीब कल्याण योजनाएं, रक्षा क्षेत्र, विदेश नीति और सरकारी सेवाओं का डिजिटलीकरण प्रमुख हैं।
डिजिटल इंडिया और ऑनलाइन सेवाएं
पिछले वर्षों में भारत में डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सरकारी सेवाओं का विस्तार तेजी से हुआ है। UPI जैसे डिजिटल पेमेंट सिस्टम ने छोटे कारोबारियों से लेकर आम लोगों तक डिजिटल लेनदेन को आसान बनाया है। सरकारी सेवाओं में भी ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल दस्तावेज और मोबाइल आधारित सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ा है।

सड़क, रेलवे और बुनियादी ढांचा
देश में एक्सप्रेसवे, हाईवे, रेलवे आधुनिकीकरण, मेट्रो नेटवर्क और एयरपोर्ट जैसी बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को भी मोदी सरकार के कार्यकाल की प्रमुख प्राथमिकताओं में गिना जाता है। सरकार का जोर कनेक्टिविटी बढ़ाने और परिवहन व्यवस्था को आधुनिक बनाने पर रहा है।
गरीब कल्याण और सामाजिक योजनाएं
केंद्र सरकार ने गरीब और निम्न आय वर्ग के लिए कई योजनाएं शुरू कीं या उनका विस्तार किया। इनमें जनधन खाते, उज्ज्वला योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत और मुफ्त राशन जैसी योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं के प्रभाव और इनके क्रियान्वयन को लेकर समर्थकों और आलोचकों के बीच अलग-अलग राय भी रही है।

रक्षा और विदेश नीति
प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की विदेश नीति और रक्षा क्षेत्र को भी विशेष महत्व मिला है। भारत ने विभिन्न वैश्विक मंचों पर अपनी भूमिका बढ़ाने की कोशिश की है। रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता और घरेलू स्तर पर रक्षा उपकरणों के निर्माण पर भी जोर दिया गया है।
अर्थव्यवस्था और रोजगार
भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर भी पिछले 25 वर्षों के नेतृत्व की चर्चा होती रही है। भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हुआ है। हालांकि रोजगार, महंगाई, आय असमानता और छोटे कारोबारियों की स्थिति जैसे मुद्दों पर विपक्ष और आलोचक सरकार से सवाल उठाते रहे हैं।

लोकतंत्र और विरोध की राजनीति
प्रधानमंत्री मोदी के बयान में लोकतंत्र और विरोध का जिक्र खास तौर पर महत्वपूर्ण है। भारतीय लोकतंत्र में सरकार और विपक्ष दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण मानी जाती है। किसी भी सरकार के फैसलों पर सवाल उठाना, उनका विरोध करना और नीतियों पर बहस करना लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है।
पीएम मोदी ने अपने अनुभव के आधार पर कहा कि विरोध करने वालों ने उन्हें लोकतंत्र की ताकत समझाई। उनका यह बयान राजनीतिक विरोध को लेकर उनके लंबे अनुभव की ओर इशारा करता है।

हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के नेतृत्व का मूल्यांकन अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक दृष्टिकोण से किया जाता है। उनके समर्थक विकास, डिजिटल बदलाव, बुनियादी ढांचे और वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका को बड़ी उपलब्धियां बताते हैं। वहीं विपक्ष और आलोचक रोजगार, महंगाई, सामाजिक मुद्दों और संस्थागत सवालों को लेकर सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते रहे हैं।
जनता के लिए सबसे बड़ा बदलाव कौन सा?
प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के नेतृत्व में सबसे बड़ा बदलाव किस क्षेत्र में हुआ, इसका जवाब हर व्यक्ति के अनुभव के आधार पर अलग हो सकता है। किसी के लिए डिजिटल भुगतान और ऑनलाइन सेवाएं सबसे बड़ा बदलाव हैं, तो किसी के लिए सड़क और रेलवे का विस्तार। कुछ लोग गरीब कल्याण योजनाओं को महत्वपूर्ण मानते हैं, जबकि अन्य लोग विदेश नीति और रक्षा क्षेत्र में भारत की भूमिका को बड़ा परिवर्तन मानते हैं।

यही वजह है कि 25 साल के नेतृत्व का मूल्यांकन केवल एक क्षेत्र के आधार पर करना आसान नहीं है। यह एक ऐसा राजनीतिक सफर है जिसमें कई नीतियां, योजनाएं, उपलब्धियां, विवाद और आलोचनाएं शामिल रही हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व के 25 साल भारतीय राजनीति में एक महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। गुजरात के मुख्यमंत्री से लेकर लगातार तीसरी बार देश के प्रधानमंत्री बनने तक का उनका सफर कई राजनीतिक घटनाओं और बदलावों से जुड़ा रहा है।
अपने इस लंबे सफर को याद करते हुए पीएम मोदी का यह कहना कि गिराने वालों ने उन्हें फिर खड़ा होना सिखाया और विरोध करने वालों ने लोकतंत्र की ताकत समझाई, उनके राजनीतिक अनुभवों का एक अलग पक्ष सामने रखता है।

अब सवाल यह है कि जनता प्रधानमंत्री मोदी के 25 साल के नेतृत्व में सबसे बड़ा बदलाव किस क्षेत्र में देखती है—डिजिटल इंडिया, बुनियादी ढांचा, गरीब कल्याण, रक्षा, विदेश नीति, अर्थव्यवस्था या किसी अन्य क्षेत्र में? यही सवाल आने वाले समय में उनके नेतृत्व के मूल्यांकन का एक महत्वपूर्ण आधार भी बन सकता है।
