By: Mala Mandal
देवघर। शारदीय दुर्गा पूजा को लेकर बाबा नगरी देवघर में उत्साह और भक्ति का माहौल बनने लगा है। शहर के विभिन्न पूजा पंडालों में मां दुर्गा के दर्शन के लिए तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इसी क्रम में बिलासी पूजा समिति (ऊपर) का भव्य पूजा पंडाल श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र बनने के लिए तैयार है। इस वर्ष समिति की ओर से दक्षिण भारत के श्रीराधा-कृष्ण मंदिर की तर्ज पर आकर्षक पंडाल का निर्माण कराया गया है। करीब 1.75 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस भव्य पंडाल का उद्घाटन शुक्रवार की शाम महाषष्ठी तिथि पर समिति के मुख्य संरक्षक डॉ. सुनील खवाड़े ने विधि-विधान के साथ किया।

उद्घाटन के साथ ही बिलासी पूजा समिति के पूजा आयोजन की भव्यता और तैयारियों की चर्चा शुरू हो गई है। धार्मिक आस्था, कलात्मकता और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया यह पंडाल इस बार विशेष आकर्षण का केंद्र बनने की उम्मीद है। समिति का प्रयास है कि मां दुर्गा के दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को धार्मिक वातावरण के साथ-साथ भारतीय मंदिर स्थापत्य कला की खूबसूरती का अनुभव भी मिल सके।
दक्षिण भारतीय मंदिर की तर्ज पर हुआ पंडाल का निर्माण
बिलासी पूजा समिति (ऊपर) ने इस वर्ष अपने पूजा पंडाल की थीम में दक्षिण भारत के श्रीराधा-कृष्ण मंदिर को आधार बनाया है। मंदिर की शैली से प्रेरित होकर पंडाल को भव्य और आकर्षक रूप दिया गया है। करीब 1.75 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस पंडाल को लेकर समिति के सदस्यों में खासा उत्साह है। पंडाल की परिकल्पना से लेकर उसके निर्माण तक स्थानीय स्तर पर कलाकारों और कारीगरों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है।

समिति के मुख्य संरक्षक डॉ. सुनील खवाड़े ने उद्घाटन के बाद पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा कि बिलासी पूजा समिति का पंडाल हर वर्ष अपनी भव्यता और आकर्षक सजावट के लिए जाना जाता रहा है। पहले समिति का पंडाल पूरे संताल परगना प्रमंडल में अव्वल रहता था, लेकिन इस बार उम्मीद है कि यह पूरे झारखंड में अपनी अलग पहचान बनाएगा। उन्होंने कहा कि समिति ने श्रद्धालुओं को बेहतर और यादगार अनुभव देने के उद्देश्य से पंडाल निर्माण पर विशेष ध्यान दिया है।

25 दिनों में स्थानीय कलाकारों ने तैयार किया भव्य पंडाल
इस वर्ष बिलासी पूजा समिति के पंडाल की एक खास विशेषता यह भी है कि इसका निर्माण देवघर के स्थानीय कलाकारों ने महज 25 दिनों में पूरा किया है। इतने कम समय में इतने बड़े स्तर पर पंडाल का निर्माण स्थानीय कलाकारों की मेहनत, कौशल और रचनात्मकता को दर्शाता है। पंडाल के साथ मां दुर्गा की प्रतिमा का निर्माण भी स्थानीय कलाकारों द्वारा किया गया है।

डॉ. सुनील खवाड़े ने स्थानीय कलाकारों के योगदान की सराहना करते हुए कहा कि देवघर में प्रतिभा की कोई कमी नहीं है। यहां के कलाकार सीमित समय में भी बेहतर और आकर्षक कलाकृतियां तैयार करने की क्षमता रखते हैं। स्थानीय कलाकारों के हाथों तैयार हुआ यह पंडाल शहर की कला और सांस्कृतिक विरासत को भी सामने लाता है। उन्होंने कहा कि दुर्गा पूजा केवल धार्मिक अनुष्ठान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय कला, संस्कृति और सामूहिक भागीदारी को प्रोत्साहित करने का भी अवसर है। पूजा समितियों के माध्यम से कलाकारों को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता है और शहर की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होती है।
पर्यावरण संरक्षण को दिया गया विशेष महत्व
बिलासी पूजा समिति ने इस बार पंडाल निर्माण में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी है। समिति के अनुसार, निर्माण कार्य में ऐसी सामग्रियों के उपयोग पर ध्यान दिया गया है, जिनसे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे। धार्मिक आयोजनों के दौरान बढ़ते पर्यावरणीय प्रभाव को देखते हुए यह पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। डॉ. सुनील खवाड़े ने बताया कि भव्यता के साथ पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाना भी जरूरी है। पूजा आयोजन में इस बात का ध्यान रखा गया है कि सजावट और निर्माण के दौरान पर्यावरण को कम से कम नुकसान हो। उन्होंने कहा कि धार्मिक आस्था और प्रकृति संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। इसलिए पूजा समितियों को आयोजन के साथ पर्यावरण के प्रति अपनी जिम्मेदारी भी समझनी चाहिए।समिति की इस पहल से यह संदेश देने का प्रयास किया गया है कि बड़े धार्मिक आयोजन भी पर्यावरण के अनुकूल तरीके से किए जा सकते हैं। आने वाले समय में ऐसी पहल अन्य पूजा समितियों के लिए भी प्रेरणादायक साबित हो सकती है।

1972 से मां दुर्गा की आराधना कर रही है समिति
बिलासी पूजा समिति (ऊपर) का इतिहास भी काफी पुराना है। समिति की ओर से वर्ष 1972 से लगातार मां दुर्गा की पूजा-अर्चना की जा रही है। दशकों से जारी इस परंपरा का उद्देश्य नगरवासियों के कल्याण, सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करना है। हर वर्ष शारदीय नवरात्र के दौरान समिति की ओर से धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा की तैयारियां की जाती हैं। समिति की निरंतर सक्रियता ने इसे देवघर के प्रमुख दुर्गा पूजा आयोजनों में एक विशिष्ट पहचान दिलाई है। समय के साथ पूजा आयोजन का स्वरूप भव्य होता गया है, लेकिन मां दुर्गा की आराधना और नगरवासियों के कल्याण की कामना इसकी मूल भावना बनी हुई है। इस वर्ष दक्षिण भारतीय मंदिर की तर्ज पर पंडाल निर्माण और पर्यावरण संरक्षण पर जोर देकर समिति ने अपने आयोजन को नया रूप देने का प्रयास किया है। करीब 1.75 करोड़ रुपये की लागत से तैयार पंडाल के माध्यम से श्रद्धालुओं को एक अलग धार्मिक और सांस्कृतिक अनुभव मिलने की उम्मीद है।

महासप्तमी से आम श्रद्धालु कर सकेंगे दर्शन
समिति के मुख्य संरक्षक डॉ. सुनील खवाड़े ने बताया कि आम श्रद्धालुओं के लिए पूजा पंडाल के पट महासप्तमी तिथि से खोल दिए जाएंगे। इसके बाद श्रद्धालु पंडाल में पहुंचकर मां दुर्गा के दर्शन कर सकेंगे और पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त कर सकेंगे। नवरात्र के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना को देखते हुए पंडाल को आकर्षक रूप दिया गया है।

उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान समिति के संरक्षक रामेश्वर चक्रवर्ती, काली नाथ खवाड़े, आजाद पाठक, सुरेशानंद झा, शेषनाथ झा, आशीष झा, कोषाध्यक्ष मुकेश कुमार उर्फ टोनी, समीर खवाड़े, बॉबी द्वारी, गौरव, संतोष अग्रवाल, सोनू, अमित जजवाड़े, उत्तम चक्रवर्ती, वाबन चक्रवर्ती, रविंद्र धारी, गोपा पाठक, रंजू देवी, चंदना झा, नीतू देवी, प्रकाश भारद्वाज, मनोज पांडेय, दीपक दुबे, टिंकू खवाड़े, उमेश मिश्रा, सुनैना खवाड़े, रंजू झा और किंजल सहित अन्य सदस्य मौजूद रहे।

कुल मिलाकर, बिलासी पूजा समिति (ऊपर) का इस वर्ष का आयोजन धार्मिक आस्था, स्थानीय कलाकारों की प्रतिभा और पर्यावरण संरक्षण के संदेश को एक साथ प्रस्तुत कर रहा है। दक्षिण भारत के श्रीराधा-कृष्ण मंदिर की तर्ज पर बना भव्य पंडाल देवघर की दुर्गा पूजा की रौनक बढ़ाने के साथ श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण बनने की उम्मीद है।

