By: Mala Mandal
देवघर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की कथित विवादित टिप्पणी के विरोध में मंगलवार को देवघर के टावर चौक पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और मल्लिकार्जुन खड़गे का पुतला दहन कर आक्रोश जताया गया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने टिप्पणी को राजनीतिक मर्यादा के विपरीत बताते हुए सार्वजनिक जीवन में शालीनता और परस्पर सम्मान बनाए रखने की अपील की। प्रदर्शन का नेतृत्व भाजपा जिला महामंत्री अभयानंद झा ने किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक विरोध और सरकार की नीतियों की आलोचना करना विपक्ष का अधिकार है, लेकिन किसी नेता के परिवार और दिवंगत परिजनों को राजनीतिक विवाद में घसीटना उचित नहीं है। उनके अनुसार, राजनीतिक प्रतिस्पर्धा विचारों, नीतियों, विकास और जनकल्याण के मुद्दों पर होनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत और पारिवारिक टिप्पणियों के आधार पर।

राजनीतिक संवाद में मर्यादा बनाए रखने की अपील
भाजपा जिला महामंत्री अभयानंद झा ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली भाषा का समाज पर व्यापक प्रभाव पड़ता है। राजनीतिक दलों के नेताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे अपने बयानों में संयम बरतें और लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करें। सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने और उनकी आलोचना करने के लिए लोकतंत्र में पर्याप्त अवसर हैं, लेकिन आलोचना तथ्यों और तर्कों के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक विरोध करना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है। हालांकि, इस विरोध के दौरान उनके दिवंगत पिता या परिवार को निशाना बनाना उचित नहीं माना जा सकता। राजनीतिक मतभेदों को व्यक्तिगत संबंधों और पारिवारिक मामलों से अलग रखा जाना चाहिए। झा ने कांग्रेस नेतृत्व से सार्वजनिक बयानों में मर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने की अपील करते हुए कहा कि सभी राजनीतिक दलों की जिम्मेदारी है कि वे संवाद की गरिमा बनाए रखें। उनके मुताबिक, लोकतंत्र की मजबूती केवल राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से नहीं, बल्कि विरोधी विचारों के प्रति सम्मान और जिम्मेदार आचरण से भी तय होती है।

चाय बेचकर प्रधानमंत्री बनने को बताया मेहनतकशों का सम्मान
प्रदर्शन के दौरान अभयानंद झा ने कांग्रेस पर राजनीतिक हमला बोलते हुए कहा कि लगातार चुनावी चुनौतियों का सामना करने के बाद कांग्रेस का रवैया बदल गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री के शुरुआती जीवन और उनके परिवार को लेकर की जाने वाली टिप्पणियां देश के मेहनतकश लोगों की भावनाओं को भी आहत करती हैं। झा ने सवाल उठाया कि चाय बेचकर और मेहनत के बल पर देश के प्रधानमंत्री के पद तक पहुंचना क्या अपराध है? उन्होंने कहा कि देश में करोड़ों लोग मेहनत और संघर्ष के जरिए अपने जीवन में आगे बढ़ने का प्रयास करते हैं। ऐसे में किसी व्यक्ति की साधारण पारिवारिक पृष्ठभूमि या उसके शुरुआती जीवन को लेकर तंज कसना मेहनतकश वर्ग के सम्मान से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने प्रधानमंत्री की दिवंगत माता और पिता को राजनीतिक बहस में शामिल किए जाने पर भी आपत्ति जताई। झा ने भारतीय संस्कृति की परंपराओं का उल्लेख करते हुए कहा कि माता-पिता का सम्मान भारतीय सामाजिक मूल्यों का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन पारिवारिक सम्मान और सामाजिक मर्यादा को बनाए रखना भी जरूरी है।

कांग्रेस पर साधा निशाना, राजनीतिक भाषा पर उठाए सवाल
अभयानंद झा ने कांग्रेस की राजनीतिक रणनीति की आलोचना करते हुए कहा कि विपक्ष को जनता से जुड़े वास्तविक मुद्दों पर सरकार को घेरना चाहिए। महंगाई, रोजगार, विकास और जनकल्याण जैसे विषयों पर चर्चा लोकतंत्र को मजबूत करती है। इसके विपरीत, व्यक्तिगत टिप्पणियां राजनीतिक संवाद को अनावश्यक रूप से विवादित बनाती हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेतृत्व को अपने बयानों की जिम्मेदारी लेते हुए राजनीतिक संवाद का स्तर बनाए रखना चाहिए। झा ने कहा कि लोकतंत्र में विरोध करने का अधिकार सभी को है, लेकिन विरोध के तरीके और भाषा की भी अपनी मर्यादा होती है। उन्होंने यह भी कहा कि देश की जनता राजनीतिक दलों के व्यवहार और उनके मुद्दों को गंभीरता से देखती है। इसलिए नेताओं को सार्वजनिक मंचों पर ऐसी भाषा से बचना चाहिए, जिससे सामाजिक और राजनीतिक तनाव बढ़ने की आशंका पैदा हो।

एक नवंबर की दिल्ली रैली को लेकर भी जताई चिंता
भाजपा जिला महामंत्री ने एक नवंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विपक्षी जुटान को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने वर्ष 1984 के सिख विरोधी दंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि यह तारीख देश के इतिहास के एक दुखद अध्याय से जुड़ी हुई है। ऐसे दिन प्रस्तावित राजनीतिक कार्यक्रम को लेकर उन्होंने चिंता जताई और आशंका व्यक्त की कि बड़े जमावड़े के दौरान माहौल बिगाड़ने की कोशिश हो सकती है। यह आशंका झा ने अपने राजनीतिक वक्तव्य के दौरान जताई। उन्होंने कांग्रेस नेताओं से अपील की कि वे अपने बयानों और राजनीतिक कार्यक्रमों के जरिए सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाएं। झा ने कांग्रेस के इतिहास का उल्लेख करते हुए पार्टी की विचारधारा और नेतृत्व पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों को अपने आचरण और भाषा के जरिए जनता के बीच विश्वास कायम करना चाहिए। उनके अनुसार, सार्वजनिक जीवन में जिम्मेदार बयानबाजी और शालीनता का पालन सभी दलों के लिए जरूरी है।

कई भाजपा नेता और कार्यकर्ता रहे मौजूद
देवघर के टावर चौक पर आयोजित इस विरोध प्रदर्शन में भाजपा के कई पदाधिकारी, पूर्व विधायक और कार्यकर्ता शामिल हुए। मौके पर जिला उपाध्यक्ष अधीर चंद्र भैया, मुकेश पाठक, विजया सिंह, पंकज सिंह भदोरिया, पूर्व विधायक नारायण दास, प्रमंडलीय प्रभारी तूफान महथा, जिला मंत्री विजया सिंह, सुलोचना देवी, मनोज मिश्र, अलका सोनी, सौरभ पाठक, मनीष सिंह, संजय गुप्ता, चंदन साहा, अमरजीत दूबे, अमृत मिश्रा और संध्या कुमारी सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद थे।

प्रदर्शन के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस के खिलाफ नारेबाजी की और पुतला दहन कर अपना विरोध दर्ज कराया। भाजपा नेताओं ने कहा कि राजनीतिक दलों के बीच मतभेद लोकतंत्र का हिस्सा हैं, लेकिन व्यक्तिगत और पारिवारिक टिप्पणियों से बचते हुए सार्वजनिक संवाद में सम्मान और मर्यादा बनाए रखना जरूरी है।



