By: Vikash Kumar (Vicky)
स्ट्रोक के लक्षण और बचाव: आजकल बदलती जीवनशैली, बढ़ता तनाव, हाई ब्लड प्रेशर और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। इन्हीं में से एक है स्ट्रोक, जिसे मेडिकल इमरजेंसी माना जाता है। स्ट्रोक ऐसी स्थिति है, जिसमें मस्तिष्क के किसी हिस्से तक रक्त की आपूर्ति बाधित हो जाती है या मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है। ऐसी स्थिति में दिमाग की कोशिकाओं को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिल पाती और वे तेजी से क्षतिग्रस्त होने लगती हैं। समय पर इलाज नहीं मिलने पर स्ट्रोक जानलेवा साबित हो सकता है या व्यक्ति को जीवनभर के लिए शारीरिक अक्षमता का सामना करना पड़ सकता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि स्ट्रोक के लक्षण कई बार अचानक दिखाई देते हैं। व्यक्ति को बोलने में परेशानी होने लगती है, चेहरे का एक हिस्सा लटक सकता है, हाथ-पैर में कमजोरी आ सकती है या देखने में परेशानी हो सकती है। कई लोग इन संकेतों को सामान्य कमजोरी, थकान या चक्कर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, जिससे इलाज में देरी हो सकती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, स्ट्रोक दुनिया भर में मृत्यु और विकलांगता के प्रमुख कारणों में शामिल है। अच्छी बात यह है कि इसके कई जोखिम कारकों को नियंत्रित करके स्ट्रोक की आशंका कम की जा सकती है। आइए जानते हैं स्ट्रोक क्या है, यह इतना खतरनाक क्यों माना जाता है, इसके शुरुआती लक्षण क्या हैं और इससे बचाव के लिए किन बातों का ध्यान रखना जरूरी है।

स्ट्रोक क्या है और यह शरीर को कैसे प्रभावित करता है?
स्ट्रोक को सामान्य भाषा में दिमाग का दौरा भी कहा जाता है। हमारा मस्तिष्क शरीर के लगभग सभी महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करता है। बोलना, चलना, देखना, समझना, याद रखना और शरीर के विभिन्न अंगों को निर्देश देना मस्तिष्क के काम हैं। इन कार्यों को ठीक से करने के लिए मस्तिष्क तक लगातार रक्त और ऑक्सीजन पहुंचना जरूरी है। जब किसी कारण से मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह रुक जाता है या मस्तिष्क की रक्त वाहिका फट जाती है, तो दिमाग की कोशिकाएं प्रभावित होने लगती हैं। यदि इस स्थिति में तुरंत चिकित्सा सहायता नहीं मिलती, तो मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से को स्थायी नुकसान पहुंच सकता है। स्ट्रोक का असर इस बात पर निर्भर करता है कि मस्तिष्क का कौन-सा हिस्सा प्रभावित हुआ है और कितनी देर तक रक्त की आपूर्ति बाधित रही। कुछ लोगों को बोलने या चलने में परेशानी होती है, जबकि कुछ लोगों की याददाश्त, संतुलन और रोजमर्रा के काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

स्ट्रोक को इतना खतरनाक क्यों माना जाता है?
स्ट्रोक खतरनाक इसलिए है, क्योंकि इसमें मस्तिष्क की कोशिकाएं बहुत तेजी से क्षतिग्रस्त हो सकती हैं। समय पर इलाज न मिलने पर व्यक्ति की जान जा सकती है। कई मामलों में मरीज की जान बच जाने के बाद भी उसे लंबे समय तक पुनर्वास और देखभाल की जरूरत पड़ सकती है। स्ट्रोक के कारण शरीर के एक तरफ कमजोरी या लकवा हो सकता है। कुछ लोगों को बोलने, भोजन निगलने, चलने या अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने में परेशानी होने लगती है। गंभीर मामलों में व्यक्ति की चेतना भी प्रभावित हो सकती है। इस बीमारी की एक और बड़ी चुनौती यह है कि इसके लक्षण अचानक शुरू हो सकते हैं। मरीज पहले सामान्य रूप से काम कर रहा होता है, लेकिन कुछ ही समय में उसकी स्थिति गंभीर हो सकती है। इसलिए स्ट्रोक के लक्षण पहचानना और बिना देर किए अस्पताल पहुंचना बेहद जरूरी है।

स्ट्रोक के प्रमुख प्रकार कौन-कौन से हैं?
स्ट्रोक मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है। इसके अलावा एक ऐसी स्थिति भी होती है, जिसके लक्षण स्ट्रोक जैसे होते हैं और जिसे भविष्य में होने वाले स्ट्रोक की चेतावनी माना जा सकता है।
1. इस्केमिक स्ट्रोक
इस्केमिक स्ट्रोक तब होता है, जब मस्तिष्क तक रक्त पहुंचाने वाली कोई रक्त वाहिका रक्त के थक्के या किसी अन्य रुकावट के कारण बंद हो जाती है। इससे मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलती। यह स्ट्रोक का सबसे आम प्रकार है। हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, धूम्रपान, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी कुछ बीमारियां इसके जोखिम को बढ़ा सकती हैं।
2. हेमरेजिक स्ट्रोक
हेमरेजिक स्ट्रोक तब होता है, जब मस्तिष्क की कोई रक्त वाहिका फट जाती है और उसके आसपास रक्तस्राव होने लगता है। इससे मस्तिष्क के ऊतकों पर दबाव बढ़ सकता है और गंभीर नुकसान हो सकता है। अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर इस प्रकार के स्ट्रोक का एक महत्वपूर्ण जोखिम कारक है। मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं से जुड़ी कुछ बीमारियां और अन्य चिकित्सकीय स्थितियां भी इसका कारण बन सकती हैं।

3. ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक (TIA)
ट्रांजिएंट इस्केमिक अटैक को अक्सर मिनी स्ट्रोक कहा जाता है। इसमें मस्तिष्क तक रक्त का प्रवाह कुछ समय के लिए बाधित होता है और स्ट्रोक जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। ये लक्षण कुछ मिनटों में ठीक भी हो सकते हैं। लेकिन लक्षणों का अपने आप ठीक हो जाना इस बात का प्रमाण नहीं है कि खतरा खत्म हो गया है। TIA भविष्य में गंभीर स्ट्रोक होने की चेतावनी हो सकता है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
स्ट्रोक के 7 प्रमुख लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें
स्ट्रोक के लक्षण अक्सर अचानक दिखाई देते हैं। हर व्यक्ति में सभी लक्षण होना जरूरी नहीं है। नीचे दिए गए संकेतों में से कोई भी अचानक दिखाई दे, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
1. चेहरे का एक हिस्सा लटक जाना
स्ट्रोक के दौरान चेहरे की मांसपेशियों पर नियंत्रण प्रभावित हो सकता है। व्यक्ति का मुंह एक तरफ खिंचा हुआ दिखाई दे सकता है या मुस्कुराने पर चेहरे का एक हिस्सा ठीक से नहीं उठता। यदि किसी व्यक्ति का चेहरा अचानक टेढ़ा दिखाई देने लगे, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज न करें।
2. हाथ या पैर में अचानक कमजोरी
स्ट्रोक का एक महत्वपूर्ण संकेत शरीर के एक तरफ हाथ या पैर में अचानक कमजोरी या सुन्नपन होना है। व्यक्ति को हाथ उठाने, चीज पकड़ने, खड़े होने या चलने में परेशानी हो सकती है। यदि दोनों हाथ उठाने के लिए कहने पर एक हाथ नीचे गिरने लगे या शरीर का एक हिस्सा ठीक से काम न करे, तो तुरंत अस्पताल पहुंचने की व्यवस्था करें।

3. बोलने या समझने में परेशानी
स्ट्रोक के दौरान व्यक्ति की बोलने और भाषा समझने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। वह स्पष्ट शब्द नहीं बोल पाता, उसकी आवाज लड़खड़ा सकती है या उसे दूसरों की बात समझने में कठिनाई हो सकती है। यदि कोई व्यक्ति अचानक सामान्य तरीके से बात करना बंद कर दे या उसकी बातें अस्पष्ट हो जाएं, तो यह स्ट्रोक का संकेत हो सकता है।
4. अचानक देखने में परेशानी
कुछ मरीजों को अचानक एक या दोनों आंखों से धुंधला दिखाई देने लगता है। किसी वस्तु की दो छवियां दिखाई दे सकती हैं या देखने की क्षमता अचानक कम हो सकती है। अचानक होने वाली दृष्टि संबंधी परेशानी को केवल चश्मे के नंबर या थकान से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। इसकी तुरंत चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
5. अचानक चक्कर आना या संतुलन बिगड़ना
स्ट्रोक के दौरान व्यक्ति को अचानक चक्कर आ सकते हैं, चलने में परेशानी हो सकती है या शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है। विशेष रूप से यदि इसके साथ दोहरी दृष्टि, कमजोरी या बोलने में परेशानी भी हो, तो स्थिति गंभीर हो सकती है। ऐसे लक्षणों को नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लें।

6. अचानक बहुत तेज सिरदर्द होना
बिना किसी स्पष्ट कारण के अचानक बेहद तेज सिरदर्द होना, विशेष रूप से यदि यह जीवन का सबसे गंभीर सिरदर्द महसूस हो, तो मस्तिष्क में रक्तस्राव जैसी गंभीर समस्या का संकेत हो सकता है। यदि तेज सिरदर्द के साथ उल्टी, बेहोशी, गर्दन में अकड़न या अन्य असामान्य लक्षण हों, तो तत्काल आपातकालीन सहायता लें।
7. अचानक भ्रम या चेतना में बदलाव
स्ट्रोक के दौरान व्यक्ति अचानक भ्रमित हो सकता है, सामान्य बातों को समझने में कठिनाई महसूस कर सकता है या उसकी चेतना प्रभावित हो सकती है। गंभीर स्थिति में बेहोशी भी हो सकती है।
ऐसे संकेत दिखाई देने पर मरीज को घर पर ठीक होने का इंतजार न कराएं।
स्ट्रोक की पहचान के लिए याद रखें FAST नियम
स्ट्रोक के शुरुआती लक्षण पहचानने के लिए FAST नियम बहुत उपयोगी है।
F यानी Face: व्यक्ति से मुस्कुराने के लिए कहें। क्या उसके चेहरे का एक हिस्सा लटक रहा है?
A यानी Arms: व्यक्ति से दोनों हाथ उठाने के लिए कहें। क्या एक हाथ नीचे गिर रहा है या कमजोर लग रहा है?
S यानी Speech: व्यक्ति से कोई आसान वाक्य बोलने के लिए कहें। क्या उसकी आवाज लड़खड़ा रही है या वह शब्द बोलने में परेशानी महसूस कर रहा है?
T यानी Time: यदि इनमें से कोई भी संकेत दिखाई दे, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। लक्षण शुरू होने का समय नोट करें।
यह याद रखना जरूरी है कि स्ट्रोक के सभी मरीजों में FAST के तीनों लक्षण दिखाई नहीं देते। अचानक दृष्टि संबंधी समस्या, संतुलन बिगड़ना या असामान्य तेज सिरदर्द भी गंभीर संकेत हो सकते हैं।

स्ट्रोक होने पर सबसे पहले क्या करना चाहिए?
यदि किसी व्यक्ति में स्ट्रोक के लक्षण दिखाई दें, तो समय बर्बाद किए बिना एंबुलेंस बुलाएं या उसे तुरंत ऐसे अस्पताल पहुंचाएं जहां स्ट्रोक का इलाज उपलब्ध हो। भारत में आपातकालीन सहायता के लिए 112 पर संपर्क किया जा सकता है।
मरीज के लक्षण शुरू होने का सही समय नोट करें। यदि लक्षण सोकर उठने के बाद दिखाई दिए हैं, तो यह भी बताएं कि व्यक्ति आखिरी बार कब सामान्य अवस्था में देखा गया था। मरीज को खुद गाड़ी चलाकर अस्पताल जाने न दें। उसे अपनी सुविधा के अनुसार पानी, भोजन या दवा न दें, क्योंकि स्ट्रोक के दौरान निगलने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। डॉक्टर की सलाह के बिना एस्पिरिन जैसी दवा भी न दें, क्योंकि स्ट्रोक रक्त वाहिका बंद होने के कारण हुआ है या रक्तस्राव के कारण, यह जांच के बिना पता नहीं चलता। यदि मरीज बेहोश है, तो उसकी सांस पर ध्यान दें और आपातकालीन सहायता के निर्देशों का पालन करें। सांस सामान्य न होने पर प्रशिक्षित व्यक्ति को सीपीआर शुरू करना चाहिए।बसे महत्वपूर्ण बात यह है कि लक्षण कुछ मिनटों में ठीक हो जाएं, तब भी अस्पताल जाना जरूरी है।

स्ट्रोक होने के प्रमुख कारण और जोखिम कारक
स्ट्रोक का खतरा कई स्वास्थ्य समस्याओं और जीवनशैली से जुड़ी आदतों के कारण बढ़ सकता है। कुछ जोखिम कारकों को नियंत्रित किया जा सकता है, जबकि कुछ को नहीं।
हाई ब्लड प्रेशर: लंबे समय तक अनियंत्रित रक्तचाप रहने से मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। यह स्ट्रोक के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है।
मधुमेह: लंबे समय तक बढ़ा हुआ ब्लड शुगर रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकता है और स्ट्रोक का खतरा बढ़ा सकता है।
बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल: रक्त में कुछ प्रकार के कोलेस्ट्रॉल का स्तर अधिक होने से रक्त वाहिकाओं में प्लाक जमा होने का खतरा बढ़ सकता है, जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित हो सकता है।
धूम्रपान: तंबाकू का सेवन रक्त वाहिकाओं और हृदय के स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचा सकता है। इससे स्ट्रोक का खतरा बढ़ता है।
हृदय संबंधी बीमारियां: एट्रियल फिब्रिलेशन जैसी हृदय की कुछ समस्याओं में रक्त के थक्के बनने और मस्तिष्क तक पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।
मोटापा और शारीरिक निष्क्रियता: अतिरिक्त वजन और नियमित व्यायाम की कमी से हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह और अन्य जोखिम कारकों की आशंका बढ़ सकती है।
अस्वास्थ्यकर खानपान: अधिक नमक, अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन और असंतुलित आहार लंबे समय में हृदय और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकते हैं।
उम्र और पारिवारिक इतिहास: बढ़ती उम्र के साथ स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है। परिवार में स्ट्रोक का इतिहास होने पर भी जोखिम प्रभावित हो सकता है। हालांकि, स्ट्रोक किसी भी उम्र में हो सकता है।

स्ट्रोक से बचाव के 10 असरदार तरीके
1. ब्लड प्रेशर नियंत्रित रखें
हाई ब्लड प्रेशर को अक्सर बिना स्पष्ट लक्षणों वाली समस्या माना जाता है। इसलिए नियमित रूप से रक्तचाप की जांच कराना जरूरी है। यदि डॉक्टर ने दवा दी है, तो उसे निर्धारित तरीके से लें और बिना सलाह के बंद न करें।
2. ब्लड शुगर की जांच कराएं
मधुमेह से पीड़ित लोगों को ब्लड शुगर की नियमित निगरानी करनी चाहिए। संतुलित भोजन, शारीरिक गतिविधि और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इलाज से जोखिम कारकों को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है।
3. नमक का सेवन सीमित करें
खाने में बहुत अधिक नमक लेने से रक्तचाप बढ़ सकता है। पैकेट वाले स्नैक्स, अत्यधिक नमकीन खाद्य पदार्थ और प्रोसेस्ड भोजन का सेवन सीमित करें। भोजन में नमक की मात्रा संतुलित रखें।
4. संतुलित और पौष्टिक आहार लें
अपने भोजन में हरी सब्जियां, फल, साबुत अनाज, दालें, बीन्स और मेवे शामिल करें। जरूरत के अनुसार प्रोटीन के स्वस्थ स्रोत चुनें। अत्यधिक तला हुआ भोजन और ट्रांस फैट वाले खाद्य पदार्थों का सेवन कम करें।
5. रोजाना शारीरिक गतिविधि करें
नियमित शारीरिक गतिविधि रक्तचाप, वजन और ब्लड शुगर को नियंत्रित रखने में मदद कर सकती है। अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार तेज चाल से चलना, साइकिल चलाना या अन्य व्यायाम अपनाएं। यदि आपको कोई गंभीर बीमारी है, तो व्यायाम शुरू करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।

6. धूम्रपान और तंबाकू से दूर रहें
धूम्रपान रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाता है और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ाता है। तंबाकू का सेवन छोड़ना स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण कदम है। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से सहायता लें।
7. कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच कराएं
बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल का पता हमेशा लक्षणों से नहीं चलता। डॉक्टर की सलाह के अनुसार लिपिड प्रोफाइल जांच कराएं और यदि दवा निर्धारित की गई है, तो नियमित रूप से लें।
8. स्वस्थ वजन बनाए रखें
अतिरिक्त वजन हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह और अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकता है। संतुलित भोजन, नियमित गतिविधि और पर्याप्त नींद से वजन को स्वस्थ सीमा में रखने में मदद मिल सकती है।
9. पर्याप्त नींद लें और तनाव नियंत्रित करें
नियमित और पर्याप्त नींद स्वास्थ्य के लिए जरूरी है। लगातार तनाव, खराब नींद और अनियमित दिनचर्या अन्य जोखिम कारकों को प्रभावित कर सकती है। आराम, ध्यान और नियमित दिनचर्या अपनाना उपयोगी हो सकता है।
10. हृदय की बीमारियों का इलाज कराएं
यदि आपको हृदय की धड़कन अनियमित होने या हृदय संबंधी किसी बीमारी की समस्या है, तो डॉक्टर से नियमित परामर्श लें। कुछ हृदय रोगों में स्ट्रोक का जोखिम अधिक हो सकता है, इसलिए समय पर जांच और सही इलाज महत्वपूर्ण है।
क्या युवाओं को भी स्ट्रोक हो सकता है?
अक्सर माना जाता है कि स्ट्रोक केवल बुजुर्गों को होता है, लेकिन यह धारणा सही नहीं है। युवाओं और यहां तक कि बच्चों में भी स्ट्रोक हो सकता है। हालांकि, जोखिम और कारण उम्र के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं। युवाओं में अनियंत्रित हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह, धूम्रपान, कुछ हृदय संबंधी समस्याएं और अन्य चिकित्सकीय स्थितियां स्ट्रोक के खतरे को बढ़ा सकती हैं। कुछ मामलों में रक्त वाहिकाओं से जुड़ी असामान्यताएं या रक्त के थक्के बनने की समस्याएं भी कारण हो सकती हैं। इसलिए उम्र कम होने के बावजूद स्ट्रोक के अचानक दिखाई देने वाले लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। चेहरे का लटकना, बोलने में परेशानी या शरीर के एक हिस्से में अचानक कमजोरी होने पर तुरंत अस्पताल पहुंचना जरूरी है।

क्या स्ट्रोक के बाद मरीज पूरी तरह ठीक हो सकता है?
स्ट्रोक के बाद मरीज कितना ठीक होगा, यह कई बातों पर निर्भर करता है। इनमें स्ट्रोक का प्रकार, मस्तिष्क के प्रभावित हिस्से का आकार, इलाज मिलने में लगा समय और मरीज की अन्य स्वास्थ्य स्थितियां शामिल हैं। कुछ मरीज समय पर इलाज मिलने के बाद काफी हद तक सामान्य जीवन में लौट सकते हैं। वहीं, कुछ लोगों को चलने, बोलने, निगलने या रोजमर्रा के काम करने में लंबे समय तक परेशानी रह सकती है। फिजियोथेरेपी, स्पीच थेरेपी, व्यावसायिक चिकित्सा और अन्य पुनर्वास सेवाएं मरीज की कार्यक्षमता बेहतर करने में मदद कर सकती हैं। इलाज और पुनर्वास की योजना डॉक्टर तथा विशेषज्ञों की टीम द्वारा मरीज की स्थिति के अनुसार बनाई जाती है।
इसलिए स्ट्रोक के बाद भी सुधार की संभावना रहती है, लेकिन इसके लिए समय पर चिकित्सा सहायता और नियमित पुनर्वास महत्वपूर्ण हैं।
स्ट्रोक से जुड़े मिथक और उनकी सच्चाई
मिथक: स्ट्रोक केवल बुजुर्गों को होता है।
सच्चाई: स्ट्रोक किसी भी उम्र में हो सकता है। युवाओं में भी इसके मामले सामने आते हैं।
मिथक: यदि लक्षण अपने आप ठीक हो जाएं, तो अस्पताल जाने की जरूरत नहीं है।
सच्चाई: थोड़ी देर में ठीक होने वाले लक्षण भी TIA का संकेत हो सकते हैं। तुरंत चिकित्सा जांच जरूरी है।
मिथक: स्ट्रोक होने पर कुछ देर आराम करने से मरीज ठीक हो सकता है।
सच्चाई: स्ट्रोक एक मेडिकल इमरजेंसी है। आराम करने या घरेलू उपचार आजमाने से इलाज में देरी हो सकती है।
मिथक: स्ट्रोक के दौरान मरीज को तुरंत पानी या दवा देनी चाहिए।
सच्चाई: निगलने में परेशानी हो सकती है और गलत दवा नुकसान पहुंचा सकती है। चिकित्सा सहायता आने तक मुंह से कुछ न दें।
स्ट्रोक के लक्षण दिखें तो एक मिनट भी बर्बाद न करें
स्ट्रोक एक गंभीर लेकिन कई मामलों में जोखिम कम किए जा सकने वाली बीमारी है। हाई ब्लड प्रेशर और मधुमेह को नियंत्रित रखना, संतुलित आहार लेना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, धूम्रपान से दूर रहना और डॉक्टर की सलाह के अनुसार स्वास्थ्य जांच कराना इसके खतरे को कम करने में मदद कर सकता है। लेकिन यदि किसी व्यक्ति को अचानक चेहरे का एक हिस्सा लटकने, हाथ-पैर में कमजोरी, बोलने में परेशानी, दृष्टि में बदलाव या संतुलन बिगड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो बचाव के उपायों के बारे में सोचने के बजाय तत्काल चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है।
स्ट्रोक के इलाज में समय बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए लक्षणों को पहचानें, उनके शुरू होने का समय नोट करें और तुरंत अस्पताल पहुंचें। जागरूकता और सही समय पर कार्रवाई किसी व्यक्ति की जान बचाने तथा स्थायी विकलांगता का खतरा कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता और शैक्षणिक जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसे डॉक्टर की जांच, निदान या उपचार का विकल्प न मानें। स्ट्रोक के लक्षण दिखाई देने पर तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। लक्षण अपने आप ठीक हो जाने पर भी चिकित्सकीय जांच जरूरी है। किसी भी दवा को शुरू करने, बदलने या बंद करने से पहले डॉक्टर से सलाह लें।
