By: Vikash Kumar (Vicky)
आंखों में खुजली, लालिमा, जलन या सुबह उठने पर पलकों पर पपड़ी जमी हुई दिखाई देना आम समस्या लग सकती है। कई लोग इसे आंखों की थकान, धूल-मिट्टी या नींद की कमी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन अगर ये लक्षण बार-बार दिखाई देते हैं, पलकों के किनारे सूजन रहती है या आंखों में किरकिरापन महसूस होता है, तो इसके पीछे पलकों की सूजन, एलर्जी, ड्राई आई या संक्रमण जैसी वजहें हो सकती हैं। खासकर सुबह सोकर उठने पर पलकों पर सफेद या पीली पपड़ी जमना, आंखें चिपकी हुई महसूस होना और पलकों के किनारों पर लालिमा होना ब्लेफेराइटिस नामक समस्या के लक्षण हो सकते हैं। यह पलकों के किनारों पर होने वाली सूजन है, जो कई लोगों में लंबे समय तक बनी रह सकती है या बार-बार वापस आ सकती है। आंखें हमारे शरीर के सबसे संवेदनशील अंगों में से एक हैं। इसलिए खुजली या लालिमा होने पर बार-बार आंखों को रगड़ना, बिना डॉक्टर की सलाह के आई ड्रॉप डालना या घरेलू चीजों का इस्तेमाल करना नुकसान पहुंचा सकता है। आइए जानते हैं कि आंखों में खुजली, लालिमा और पलकों पर पपड़ी जमने की क्या वजहें हो सकती हैं, इन लक्षणों में घर पर क्या सावधानियां बरतनी चाहिए और किन परिस्थितियों में तुरंत डॉक्टर को दिखाना जरूरी है।

आंखों में खुजली और पलकों पर पपड़ी जमने की क्या है मुख्य वजह?
आंखों में खुजली और पलकों पर पपड़ी जमने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। केवल लक्षणों के आधार पर बीमारी की सही पहचान करना हमेशा संभव नहीं होता। समस्या कितने समय से है, एक आंख में है या दोनों में, दर्द है या नहीं और आंखों से किस तरह का डिस्चार्ज निकल रहा है, इन सभी बातों से कारण समझने में मदद मिलती है।
1. ब्लेफेराइटिस हो सकता है इसकी वजह
ब्लेफेराइटिस पलकों के किनारों पर होने वाली सूजन को कहते हैं। इसमें पलकों के आधार पर लालिमा, खुजली, जलन और पपड़ी जमने जैसी समस्याएं दिखाई दे सकती हैं। कई बार सुबह उठने पर पलकें आपस में चिपकी हुई महसूस होती हैं। इस समस्या के पीछे पलकों के किनारों पर बैक्टीरिया की अधिकता, त्वचा की कुछ स्थितियां, तेल बनाने वाली ग्रंथियों में गड़बड़ी या आंखों की सतह से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं। कुछ लोगों में रूसी या रोसैशिया जैसी त्वचा संबंधी समस्याओं के साथ भी ब्लेफेराइटिस देखने को मिलता है। ब्लेफेराइटिस आमतौर पर लंबे समय तक बना रह सकता है। इसके लक्षण कभी कम तो कभी अधिक हो सकते हैं। सही देखभाल और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर द्वारा सुझाए गए उपचार से इसे नियंत्रित किया जा सकता है।

2. आंखों में एलर्जी भी हो सकती है कारण
अगर आंखों में तेज खुजली होती है, बार-बार पानी निकलता है और दोनों आंखें लाल दिखाई देती हैं, तो इसकी वजह एलर्जी भी हो सकती है। धूल, परागकण, पालतू जानवरों के बाल, धुआं, कॉस्मेटिक उत्पाद या अन्य एलर्जेन कुछ लोगों में ऐसी प्रतिक्रिया पैदा कर सकते हैं। एलर्जी होने पर आंखों को रगड़ने का मन करता है, लेकिन ऐसा करने से जलन और लालिमा बढ़ सकती है। कुछ मामलों में पलकों में सूजन भी दिखाई देती है। यदि हर बार धूल, मौसम में बदलाव या किसी विशेष उत्पाद के इस्तेमाल के बाद यही परेशानी होती है, तो डॉक्टर से कारण की पहचान करवाना उपयोगी रहेगा। एलर्जी के लिए आई ड्रॉप का चुनाव भी चिकित्सकीय सलाह से करना चाहिए।
3. ड्राई आई यानी आंखों में सूखापन
आंखों में पर्याप्त आंसू न बनने या आंसुओं की गुणवत्ता प्रभावित होने पर ड्राई आई की समस्या हो सकती है। इससे आंखों में जलन, किरकिरापन, लालिमा और कभी-कभी खुजली जैसा एहसास होता है। लंबे समय तक मोबाइल या कंप्यूटर की स्क्रीन देखने, एयर कंडीशनर में रहने, धुएं या हवा के संपर्क में आने और उम्र बढ़ने के साथ ड्राई आई की समस्या बढ़ सकती है। कुछ लोगों को आंखों में सूखापन होने के बावजूद पानी निकलता हुआ दिखाई देता है। ऐसा आंख की सतह पर होने वाली जलन के कारण भी हो सकता है। यदि इसके साथ पलकों पर पपड़ी भी जम रही है, तो ब्लेफेराइटिस या पलकों की तेल ग्रंथियों से जुड़ी समस्या भी मौजूद हो सकती है।

4. आंखों में संक्रमण होने पर भी दिख सकते हैं ये लक्षण
आंखों की लालिमा, पानी आना और पलकों का चिपकना कंजंक्टिवाइटिस यानी आंखों के बाहरी हिस्से की झिल्ली में सूजन के कारण भी हो सकता है। यह समस्या वायरस, बैक्टीरिया या एलर्जी के कारण हो सकती है। अगर आंखों से गाढ़ा पीला या हरा डिस्चार्ज निकलता है और पलकें बार-बार चिपकती हैं, तो संक्रमण की संभावना हो सकती है। हालांकि, केवल डिस्चार्ज के रंग से संक्रमण का कारण निश्चित नहीं किया जा सकता। संक्रमण के कुछ प्रकार एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैल सकते हैं। ऐसे में हाथों की सफाई रखना, तौलिया साझा न करना और आंखों को छूने से पहले हाथ धोना जरूरी है।
यदि आंख में दर्द, रोशनी से परेशानी या नजर धुंधली होने जैसे लक्षण भी हैं, तो इसे साधारण संक्रमण समझकर नजरअंदाज न करें।
5. पलकों की तेल ग्रंथियों में गड़बड़ी
पलकों के किनारों पर मौजूद छोटी-छोटी ग्रंथियां आंखों की सतह पर आंसुओं की सुरक्षात्मक परत बनाए रखने में मदद करती हैं। जब इन ग्रंथियों का काम प्रभावित होता है, तो आंखों में सूखापन, जलन और पलकों के किनारों पर सूजन हो सकती है। इस स्थिति में ब्लेफेराइटिस के लक्षण भी दिखाई दे सकते हैं। कुछ लोगों में पलकों के पास छोटी गांठ या सूजन भी बन सकती है। यदि पलकों पर बार-बार गांठ बनती है, सूजन बनी रहती है या समस्या ठीक होकर फिर लौट आती है, तो आंखों के डॉक्टर से जांच करवाना बेहतर है।

सुबह उठने पर पलकों पर पपड़ी क्यों जम जाती है?
सुबह उठने पर पलकों के किनारे सफेद या पीले रंग की पपड़ी दिखाई देने के कई कारण हो सकते हैं। रात के दौरान आंखों से निकलने वाला डिस्चार्ज, त्वचा की मृत कोशिकाएं और पलकों के आसपास जमा तेल आपस में मिलकर पपड़ी बना सकते हैं। ब्लेफेराइटिस में यह समस्या अधिक दिखाई दे सकती है। कुछ लोगों की पलकें सुबह चिपकी हुई महसूस होती हैं और उन्हें आंखें खोलने में परेशानी होती है। हालांकि, हर तरह की पपड़ी ब्लेफेराइटिस का संकेत नहीं होती। यदि इसके साथ आंखों में तेज दर्द, अधिक सूजन, बुखार या नजर में बदलाव है, तो जल्द चिकित्सकीय जांच करवानी चाहिए।
पपड़ी को नाखून से खुरचकर निकालने या पलकों को जोर से रगड़ने से बचें। इससे त्वचा में चोट लग सकती है और परेशानी बढ़ सकती है।

आंखों में खुजली और लालिमा होने पर घर पर क्या करें?
अगर आंखों में हल्की खुजली या पलकों पर पपड़ी है और कोई गंभीर लक्षण नहीं है, तो कुछ सामान्य सावधानियां राहत देने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, ये उपाय बीमारी का निश्चित इलाज नहीं हैं और लगातार बने रहने वाले लक्षणों में डॉक्टर की सलाह जरूरी है।
1. पलकों की सफाई का ध्यान रखें
पलकों के किनारों पर पपड़ी जमने की समस्या में साफ-सफाई महत्वपूर्ण है। हाथ धोने के बाद साफ, मुलायम कपड़े को गुनगुने पानी में भिगोकर बंद पलकों पर कुछ मिनट हल्के से रखा जा सकता है।
इसके बाद पपड़ी को बिना रगड़े बहुत धीरे-धीरे साफ करने की कोशिश करें। पानी बहुत गर्म नहीं होना चाहिए, क्योंकि इससे त्वचा जल सकती है।
अगर आंख में दर्द, गंभीर सूजन या संक्रमण की आशंका है, तो घरेलू सफाई के भरोसे रहने के बजाय डॉक्टर से जांच करवाएं।

2. आंखों को बार-बार रगड़ने से बचें
खुजली होने पर आंखों को रगड़ने से कुछ समय के लिए राहत महसूस हो सकती है, लेकिन इससे आंखों की सतह में जलन और लालिमा बढ़ सकती है।
यदि एलर्जी है, तो रगड़ने से परेशानी और बढ़ सकती है। इसलिए आंखों को छूने से बचें और खुजली होने पर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार उचित उपाय अपनाएं।
3. कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल रोकें
यदि आंखें लाल हैं, दर्द हो रहा है या संक्रमण का संदेह है, तो कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल बंद करके आंखों के डॉक्टर से सलाह लें। कॉन्टैक्ट लेंस पहनने वालों में लाल आंख के साथ दर्द होना विशेष रूप से गंभीरता से लेना चाहिए, क्योंकि कुछ संक्रमण नजर को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
लेंस को दोबारा इस्तेमाल करने का फैसला आंखों की स्थिति और डॉक्टर की सलाह के अनुसार करें।
4. आंखों के मेकअप से कुछ समय दूरी रखें
आईलाइनर, काजल, मस्कारा और अन्य आंखों के मेकअप उत्पाद संवेदनशील त्वचा में जलन या एलर्जी पैदा कर सकते हैं। अगर आंखों में खुजली, लालिमा या पपड़ी जम रही है, तो ठीक होने तक आंखों का मेकअप न करना बेहतर है।
पुराने या साझा किए गए मेकअप उत्पादों से बचें। यदि किसी उत्पाद के इस्तेमाल के बाद बार-बार परेशानी होती है, तो उसका इस्तेमाल बंद करें और डॉक्टर से सलाह लें।

5. बिना सलाह के आई ड्रॉप का इस्तेमाल न करें
आंखों की लालिमा दूर करने, एलर्जी नियंत्रित करने या संक्रमण के इलाज के लिए अलग-अलग तरह की आई ड्रॉप उपलब्ध हैं। लेकिन हर आई ड्रॉप हर समस्या में उपयोगी नहीं होती।
खासकर स्टेरॉयड वाली आई ड्रॉप का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। गलत दवा से कुछ संक्रमण बिगड़ सकते हैं और आंखों को नुकसान पहुंच सकता है।
आंखों में गुलाब जल, नींबू का रस, शहद, घरेलू तेल या अन्य पदार्थ डालने से भी बचें। ये चीजें आंखों में जलन या संक्रमण का खतरा बढ़ा सकती हैं।
आंखों में खुजली, लालिमा और पपड़ी होने पर कब डॉक्टर के पास जाएं?
आंखों की छोटी समस्या भी कभी-कभी गंभीर रूप ले सकती है। इसलिए लक्षणों की तीव्रता और उनके साथ दिखाई देने वाले अन्य संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है।
तुरंत चिकित्सा सहायता लें, अगर:
– आंखों में तेज दर्द हो।
– नजर अचानक धुंधली हो जाए या देखने की क्षमता कम हो।
– रोशनी देखने में परेशानी हो।
– आंखों में गंभीर लालिमा के साथ दर्द हो।
– आंख या पलकों के आसपास तेज सूजन हो, खासकर बुखार या आंख हिलाने में दर्द के साथ।
– आंख में चोट लगी हो या कोई रसायन चला गया हो।
– कॉन्टैक्ट लेंस पहनने के दौरान आंख लाल होने के साथ दर्द भी हो।
यदि आंख में कोई रसायन चला गया है, तो तुरंत साफ बहते पानी से आंख को लगातार धोना शुरू करें और तत्काल चिकित्सा सहायता लें। आंख को रगड़ें नहीं।

सामान्य जांच कब करवाएं?
अगर खुजली, लालिमा या पपड़ी कई दिनों तक बनी रहती है, बार-बार वापस आती है, पलकों पर गांठ बनती है या घरेलू देखभाल के बावजूद परेशानी कम नहीं होती, तो आंखों के डॉक्टर से अपॉइंटमेंट लें।
बच्चों में बार-बार आंख लाल होना, सूजन आना या आंखों से लगातार डिस्चार्ज निकलना भी जांच की वजह है। छोटे बच्चों में आंखों की समस्या को केवल एलर्जी मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
डॉक्टर आंखों की जांच कैसे करते हैं?
आंखों का डॉक्टर सबसे पहले लक्षणों के बारे में जानकारी ले सकता है। इसमें खुजली कब शुरू हुई, एक आंख प्रभावित है या दोनों, पपड़ी किस तरह की है और दर्द या नजर में बदलाव है या नहीं, जैसी बातें शामिल हो सकती हैं।
इसके बाद डॉक्टर पलकों के किनारों, आंखों की सतह और जरूरत पड़ने पर आंसुओं की परत की जांच कर सकता है। कुछ स्थितियों में विशेष उपकरण से आंखों को देखकर सूजन या संक्रमण के संकेत तलाशे जाते हैं।
इलाज समस्या के कारण पर निर्भर करता है। ब्लेफेराइटिस में पलकों की नियमित सफाई की सलाह दी जा सकती है। एलर्जी में उचित दवा या आई ड्रॉप की जरूरत हो सकती है। बैक्टीरियल संक्रमण में डॉक्टर की सलाह पर एंटीबायोटिक उपचार दिया जा सकता है। वायरल संक्रमण में उपचार अलग हो सकता है।
इसलिए आंखों की समस्या का इलाज केवल लक्षण देखकर स्वयं तय करने के बजाय सही जांच के बाद करवाना बेहतर है।

आंखों को स्वस्थ रखने के लिए इन बातों का रखें ध्यान
आंखों की स्वच्छता और नियमित देखभाल से कई परेशानियों का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।
सबसे पहले, आंखों को छूने से पहले हाथ धोएं। तौलिया, रुमाल और आंखों का मेकअप दूसरों के साथ साझा न करें। स्क्रीन देखते समय बीच-बीच में ब्रेक लें और पर्याप्त नींद लेने की कोशिश करें। यदि आपको एलर्जी है, तो उसके संभावित कारणों की पहचान करें। धूल और धुएं के संपर्क को कम करना उपयोगी हो सकता है। कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल करते समय सफाई और उपयोग से जुड़े निर्देशों का पालन करें। यदि आपको पहले ब्लेफेराइटिस की समस्या हो चुकी है, तो डॉक्टर द्वारा बताई गई पलकों की सफाई की दिनचर्या जारी रखना उपयोगी हो सकता है। लेकिन लक्षण बदलने या बढ़ने पर दोबारा जांच करवाना जरूरी है।

आंखों में खुजली, लालिमा और पलकों पर पपड़ी जमना ब्लेफेराइटिस, एलर्जी, ड्राई आई या संक्रमण जैसी अलग-अलग समस्याओं का संकेत हो सकता है। सुबह उठने पर पलकों का चिपकना और किनारों पर पपड़ी जमना ब्लेफेराइटिस में देखा जा सकता है, लेकिन केवल इन लक्षणों से बीमारी की पुष्टि नहीं होती।
हल्की परेशानी में पलकों की सावधानीपूर्वक सफाई और आंखों को रगड़ने से बचना उपयोगी हो सकता है। वहीं, तेज दर्द, रोशनी से परेशानी, नजर में बदलाव या गंभीर सूजन होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेना जरूरी है। आंखों की समस्या बार-बार होने या लंबे समय तक बने रहने पर इसे नजरअंदाज न करें। सही समय पर जांच और उचित उपचार से आंखों को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।
यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता और जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। यह डॉक्टर की जांच, निदान या उपचार का विकल्प नहीं है। आंखों में तेज दर्द, नजर में बदलाव, गंभीर लालिमा या सूजन होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। किसी भी आई ड्रॉप या दवा का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करें।
