By: Vikash Kumar (Vicky)

Aaj Ka Panchang 1 November 2026: आज 1 नवंबर 2026, रविवार का दिन धार्मिक और ज्योतिषीय दृष्टि से बेहद खास माना जा रहा है। आज कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि है। इसके साथ ही आज अहोई अष्टमी, भानु सप्तमी और राधाकुंड स्नान का विशेष महत्व है। सबसे खास बात यह है कि रविवार और पुष्य नक्षत्र के संयोग से रवि पुष्य योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में रवि पुष्य योग को खरीदारी, निवेश और शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए अत्यंत फलदायी माना जाता है।
आज का दिन माता अहोई की पूजा करने वाली माताओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है। अहोई अष्टमी का व्रत संतान की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना से रखा जाता है। वहीं भानु सप्तमी के अवसर पर सूर्य देव की पूजा और उन्हें अर्घ्य देने की परंपरा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धापूर्वक पूजा-पाठ और दान-पुण्य करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
अगर आप आज कोई नया काम शुरू करने, सोना-चांदी खरीदने या किसी महत्वपूर्ण कार्य की योजना बना रहे हैं, तो शुभ और अशुभ समय की जानकारी जरूर प्राप्त कर लें। आइए जानते हैं आज का पूरा पंचांग, तिथि, नक्षत्र, योग, करण, सूर्योदय, सूर्यास्त, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और दिशाशूल।

1 नवंबर 2026 का पंचांग (Aaj Ka Panchang)
दिन: रविवार
विक्रम संवत: 2083
शक संवत: 1948
मास: कार्तिक (पूर्णिमांत)
पक्ष: कृष्ण पक्ष
तिथि: कृष्ण पक्ष सप्तमी, दोपहर 2 बजकर 52 मिनट तक, इसके बाद अष्टमी तिथि प्रारंभ।
नक्षत्र: पुष्य नक्षत्र, 2 नवंबर की सुबह लगभग 4 बजकर 30 मिनट तक।
योग: साध्य योग, दोपहर लगभग 2 बजकर 39 मिनट तक, इसके बाद शुभ योग।
करण: बव करण, दोपहर 2 बजकर 52 मिनट तक, इसके बाद बालव करण।

वार: रविवार
चंद्र राशि: कर्क
सूर्य राशि: तुला
आज सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
1 नवंबर को सूर्य देव तुला राशि में स्थित रहेंगे। रविवार होने के कारण इस दिन सूर्य उपासना का विशेष महत्व माना जाता है।
सूर्योदय: सुबह 5 बजकर 49 मिनट
सूर्यास्त: शाम 5 बजकर 03 मिनट
चंद्रोदय: रात लगभग 11 बजकर 04 मिनट
चंद्रास्त: सुबह लगभग 11 बजकर 58 मिनट
ध्यान दें कि ये समय देवघर, झारखंड के स्थानीय पंचांग के अनुसार हैं। अलग-अलग शहरों में सूर्योदय, सूर्यास्त और चंद्रोदय के समय में अंतर हो सकता है।

आज अहोई अष्टमी का व्रत क्यों है खास?
हिंदू धर्म में अहोई अष्टमी का व्रत संतान की खुशहाली और लंबी आयु के लिए रखा जाता है। इस दिन माताएं अहोई माता की पूजा करती हैं और अपनी संतान की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य तथा उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हैं।
परंपरा के अनुसार, अहोई अष्टमी का व्रत कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष 1 नवंबर को दोपहर लगभग 2 बजकर 52 मिनट पर अष्टमी तिथि शुरू हो रही है और 2 नवंबर को दोपहर लगभग 1 बजकर 11 मिनट तक रहेगी।
इस दिन महिलाएं सुबह स्नान करके व्रत का संकल्प लेती हैं। शाम के समय अहोई माता की पूजा की जाती है। पूजा में अहोई माता का चित्र या दीवार पर उनका पारंपरिक स्वरूप बनाया जाता है। इसके बाद रोली, चावल, फूल, दीपक और मिठाई अर्पित करके व्रत कथा सुनी जाती है।
मान्यता के अनुसार, माताएं शाम को तारों को देखकर व्रत का पारण करती हैं। अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा और पारण की परंपराओं में अंतर हो सकता है।

आज भानु सप्तमी का भी है विशेष महत्व
आज रविवार और सप्तमी तिथि का संयोग होने से भानु सप्तमी का विशेष धार्मिक महत्व है। रविवार का दिन सूर्य देव को समर्पित माना जाता है, जबकि सप्तमी तिथि भी सूर्य उपासना के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भानु सप्तमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करना चाहिए और सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। सूर्य को अर्घ्य देते समय तांबे के लोटे में स्वच्छ जल लेकर उसमें लाल फूल और अक्षत डाल सकते हैं।
इस दिन आदित्य हृदय स्तोत्र, सूर्य मंत्र या गायत्री मंत्र का जाप करना शुभ माना जाता है। जरूरतमंद लोगों को गेहूं, गुड़, लाल वस्त्र और भोजन का दान करने की भी परंपरा है।
मान्यता है कि सूर्य देव की उपासना से जीवन में आत्मविश्वास, सकारात्मकता और ऊर्जा का संचार होता है।

आज राधाकुंड स्नान का भी है विशेष महत्व
कार्तिक मास में राधाकुंड स्नान को अत्यंत पवित्र माना जाता है। विशेष रूप से कार्तिक कृष्ण अष्टमी के अवसर पर मथुरा के गोवर्धन स्थित राधाकुंड में स्नान और पूजा का विशेष धार्मिक महत्व है।
राधाकुंड को भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी की दिव्य लीलाओं से जुड़ा पवित्र तीर्थ माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवसर पर राधाकुंड में स्नान करने और राधा-कृष्ण की आराधना करने से पुण्य की प्राप्ति होती है।
इस दिन श्रद्धालु राधाकुंड पहुंचकर स्नान, दीपदान, पूजा और परिक्रमा करते हैं। जो लोग तीर्थस्थल तक नहीं पहुंच पाते, वे घर पर ही स्नान के बाद राधा-कृष्ण का स्मरण करके पूजा कर सकते हैं।

आज बन रहा है रवि पुष्य योग, खरीदारी के लिए माना जाता है शुभ
1 नवंबर 2026 को रविवार और पुष्य नक्षत्र का विशेष संयोग बन रहा है। इसी कारण आज रवि पुष्य योग का निर्माण हो रहा है। ज्योतिष शास्त्र में रवि पुष्य योग को बेहद शुभ योगों में गिना जाता है।
पुष्य नक्षत्र को समृद्धि, स्थिरता और शुभता का प्रतीक माना जाता है। जब रविवार के दिन पुष्य नक्षत्र पड़ता है, तो उसे रवि पुष्य योग कहा जाता है।
मान्यताओं के अनुसार, इस योग में सोना, चांदी, आभूषण, वाहन और घर के लिए उपयोगी वस्तुओं की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा व्यापार से जुड़ी योजनाएं बनाने, निवेश की जानकारी जुटाने और नए कार्यों की शुरुआत के लिए भी इस योग को अच्छा माना जाता है।
इस बार पुष्य नक्षत्र 2 नवंबर की सुबह लगभग 4 बजकर 30 मिनट तक रहेगा। इसलिए रवि पुष्य योग भी इसी समय तक प्रभावी रहेगा।
हालांकि, किसी विशेष पूजा या मांगलिक कार्य के लिए स्थानीय पंचांग और संबंधित मुहूर्त का ध्यान रखना चाहिए।

1 नवंबर 2026 के शुभ मुहूर्त
आज के दिन शुभ कार्यों के लिए निम्नलिखित मुहूर्त महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ये समय देवघर के स्थानीय पंचांग के अनुसार हैं।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4 बजकर 13 मिनट से 5 बजकर 01 मिनट तक।
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11 बजकर 04 मिनट से 11 बजकर 49 मिनट तक।
विजय मुहूर्त: दोपहर 1 बजकर 18 मिनट से 2 बजकर 03 मिनट तक।
गोधूलि मुहूर्त: शाम 4 बजकर 51 मिनट से 5 बजकर 15 मिनट तक।
प्रदोष काल: शाम 5 बजकर 03 मिनट से 6 बजकर 33 मिनट तक।
निशिता काल: रात 11 बजकर 01 मिनट से 11 बजकर 52 मिनट तक।

आज राहुकाल का समय क्या रहेगा?
हिंदू पंचांग में राहुकाल को अशुभ समय माना जाता है। इस अवधि में नए और महत्वपूर्ण कार्यों की शुरुआत करने से बचने की परंपरा है।
1 नवंबर 2026, रविवार को देवघर के अनुसार राहुकाल का समय इस प्रकार है।
राहुकाल: दोपहर 3 बजकर 39 मिनट से शाम 5 बजकर 03 मिनट तक।
इस दौरान विवाह, गृह प्रवेश, नए व्यापार की शुरुआत या किसी महत्वपूर्ण शुभ कार्य का शुभारंभ करने से बचने की मान्यता है। हालांकि, नियमित पूजा-पाठ और रोजमर्रा के कार्य किए जा सकते हैं।
आज के अशुभ समय
आज के दिन राहुकाल के अलावा अन्य अशुभ समय भी इस प्रकार हैं।
गुलिक काल: दोपहर 2 बजकर 15 मिनट से 3 बजकर 39 मिनट तक।
यमगण्ड काल: सुबह 10 बजकर 02 मिनट से 11 बजकर 26 मिनट तक।
राहुकाल: दोपहर 3 बजकर 39 मिनट से शाम 5 बजकर 03 मिनट तक।
इन समयों में महत्वपूर्ण शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की पारंपरिक सलाह दी जाती है।
आज दिशाशूल किस दिशा में रहेगा?
पंचांग के अनुसार, रविवार के दिन पश्चिम दिशा में दिशाशूल माना जाता है। इसलिए आज पश्चिम दिशा की ओर लंबी यात्रा शुरू करने से बचने की परंपरा है।
यदि किसी जरूरी काम से पश्चिम दिशा की यात्रा करनी पड़े, तो यात्रा से पहले गुड़, घी या मीठा भोजन ग्रहण करने का पारंपरिक उपाय किया जाता है।
आज का चंद्रोदय और तारों को देखने का समय
अहोई अष्टमी के व्रत में तारों के दर्शन का विशेष महत्व है। इस दिन माताएं शाम के समय आकाश में तारे निकलने के बाद अहोई माता की पूजा करती हैं और अपनी संतान की खुशहाली की कामना करती हैं।
देवघर के अनुसार चंद्रोदय रात लगभग 11 बजकर 04 मिनट पर है। हालांकि, अहोई अष्टमी का व्रत सामान्यतः तारों के दर्शन के बाद खोला जाता है, चंद्रमा के दर्शन के बाद नहीं।
तारों के दर्शन का समय मौसम, बादलों और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार अलग हो सकता है।
1 नवंबर 2026 का धार्मिक महत्व
आज का दिन कई धार्मिक संयोगों के कारण विशेष माना जा रहा है। एक ओर माताएं अहोई अष्टमी का व्रत रखकर अपनी संतान की लंबी आयु और सुखी जीवन की कामना करेंगी, वहीं दूसरी ओर भानु सप्तमी के अवसर पर सूर्य देव की पूजा-अर्चना की जाएगी।
रवि पुष्य योग के कारण खरीदारी और शुभ कार्यों को लेकर भी लोगों में उत्साह रहेगा। वहीं कार्तिक मास में राधाकुंड स्नान का विशेष महत्व होने से भगवान श्रीकृष्ण और राधा रानी के भक्तों के लिए भी आज का दिन खास है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ पूजा-पाठ करने, जरूरतमंदों की सहायता करने और दान-पुण्य करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं।
इस लेख में दी गई पंचांग, मुहूर्त और धार्मिक जानकारी पारंपरिक हिंदू पंचांग एवं ज्योतिषीय मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग शहरों और पंचांग पद्धतियों के अनुसार तिथि तथा मुहूर्त के समय में अंतर हो सकता है। पूजा, व्रत और मांगलिक कार्यों के लिए अपने स्थानीय पंचांग या विद्वान पंडित से पुष्टि अवश्य करें। लेख का उद्देश्य केवल सामान्य जानकारी प्रदान करना है।
